रामपुर : बच्चों के मसीहा जिलाधिकारी रामपुर को मिलेगा प्रधानमंत्री अवार्ड

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रामपुर, अमृत विचार। बच्चों के मसीहा जिलाधिकारी रामपुर रविंद्र कुमार मांदड़ को सिविल सर्विसेज डे 21 अप्रैल को विज्ञान भवन नई दिल्ली में प्रधानमंत्री अवार्ड से नवाजा जाएगा। जिलाधिकारी ने जिले भर के कुपोषित बच्चों का चिन्हित कर पोषित किट वितरित कराई। पोषित किट में ड्राई फ्रूट, काला गेहूं समेत मोटे अनाज को रखवाया गया था। पोषित किट से कुपोषित बच्चों के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हुआ और तीन महीने के बाद बच्चे कुपोषण मुक्त होकर सामान्य श्रेणी में आ गए। इसके अलावा जिलाधिकारी ने शरीर में खून की कमी से जूझ रही महिलाओं का भी सर्वे कराया और उनके लिए पोषण युक्त भोजन की व्यवस्था कराई और महिलाओं के स्वास्थ्य में भी सुधार हुआ है। 

दिल्ली से आई टीम ने जिले भर में पिछले दिनों सर्वे किया था। जिलाधिकारी द्वारा आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के माध्यम से जिले भर में कुपोषित बच्चों औए एनेमिक महिलाओं को चिन्हित कराया था। लगभर पांच हजार कुपोषित बच्चे और महिलाएं चिन्हित हुए थे। जिसमें करीब 2200 बच्चे कुपोषण की श्रेणी से सामान्य श्रेणी में आ गए हैं। यह रिपोर्ट दिल्ली से आई टीम ने भारत सरकार को भेज दी। जिलाधिकारी की इस उपलब्धि के लिए सिविल सर्विसेज डे पर जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मांदड़ को विज्ञान भवन नई दिल्ली में जिलाधिकारी अवार्ड से नवाजा जाएगा। जिलाधिकारी द्वारा बनाई गई संस्था के माध्यम से कुपोषित और दिव्यांग बच्चों का इलाज कराया जा रहा है। जिलाधिकारी के प्रयास से कई दिव्यांग बच्चों को नया जीवन मिल चुका है। 

बैजना के वसीम को लगे इलैक्ट्रानिक हाथ
कम्पोजिट विद्यालय घाटमपुर में कक्षा चार के वसीम निवासी बैजना के हाथ पतंग उड़ाते समय बिजली के तारों से झुलस गए थे। बच्चे की जान बचाने के लिए तब डाक्टरों ने उसके दोनों हाथ काट दिए थे। जिलाधिकारी वसीम को करीब पांच लाख रुपये की लागत के हाथ दिल्ली में लगवाए गए जोकि, अमेरिका से आए हैं। इसके बाद बच्चा कृत्रिम हाथों से लिख सकता है और सबसे पहले उसने आकर जिलाधिकारी से हाथ मिलाया। 

जिलाधिकारी द्वारा जिले में कुपोषित बच्चों का सर्वे कराकर उन्हें पोषित किट वितरित कराई गई। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की ड्यूटी लगाई कि वे प्रतिदिन कुपोषित बच्चों को पोषण किट में दिए गए आहार को खिलाएंगी। करीब पांच हजार बच्चों और महिलाओं में लगभग 2200 बच्चे सामान्य श्रेणी में आ गए हैं और करीब सात सौ महिलाओं में खून की कमी दूर हुई है। -राजेश कुमार, जिला कार्यक्रम अधिकारी

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