रेडियो में सम्भावनाएं अपार लेकिन कंटेंट चुनौती : प्रो. द्विवेदी
अमृत विचार, अयोध्या। रेडियो एक ऐसा माध्यम है जिसकी पहुंच किसी भी भौगोलिक परिस्थिति में दूर दराज तक होती है। यह एक ऐसा माध्यम है, जो ना तो अपने उपयोगकर्ता से साक्षरता की मांग करता है, और ना ही भाषा ज्ञान की। इसलिए इसकी व्यापकता है। इसका संचालन सुलभ और सहज है। इसमें संभावनाएं अपार हैं, चुनौती केवल कटेंट की है जो लोकप्रियता का आधार होता है। यह बात भारतीय जन संचार संस्थान नई दिल्ली के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने कहीं।
वह प्रेस क्लब में आयोजित संगोष्ठी को बतौर मुख्य वक्ता संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर अतिथियों ने अयोध्या रेडियो. काम की वेबसाइट का उद्घाटन भी किया। मुख्य अतिथि आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विजेंद्र सिंह ने कहा कि इस लोकप्रिय माध्यम से हम ज्ञान-विज्ञान को उन लोगों तक पहुंचाने में सक्षम हैं, जिन्हें इसकी आवश्यकता है। विशिष्ट अतिथि श्रीरामजन्मभूमि के ट्रस्टी डा.अनिल मिश्र ने कहा कि रेडियो हमारी जीवन शैली में शामिल रहा है। इसके माध्यम से हम अपनी संस्कृति और संस्कार दोनों को आगे बढ़ाने का काम कर सकते हैं।
फिल्म सोसायटी आफ इंडिया के डा. दुर्गेश पाठक ने अयोध्या की नई बसावट में रेडियो की प्रासंगिकता को महत्वपूर्ण बताया। वरिष्ठ पत्रकार डॉ. उपेंद्र पांडेय ने कहा कि संचार के सबसे सशक्त और सुलभ माध्यम रेडियो के जरिए हम सकारात्मक जन मानस की रचना में भूमिका निर्वहन कर सकते हैं। संचालन पत्रकार वीएन दास ने किया। स्वागत ज्ञान प्रकाश टेकचंदानी सरल और धन्यवाद ज्ञापन डा. विशाखा ने किया। गया प्रसाद सिंह बालिका विद्यालय की छात्राओं ने अध्यापिका अर्चना त्रिपाठी के निर्देशन में सरस्वती वंदना व स्वागत गीत प्रस्तुत किया। लोक गायक दुर्गा प्रसाद तिवारी आफत व संगीत गुरु मन्नू लाल जी के शिष्य संजीत कुमार ने लोकगीत प्रस्तुत किए। प्रो. आरके सिंह, पत्रकार सूर्यनारायण सिंह, प्रदीप कुमार पाठक, रामकृष्ण बाजपेयी, सतपाल सिंह सचदेवा मौजूद रहे।
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