बरेली: सोशल मीडिया पर सजेगी इमाम हुसैन की महफिल

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बरेली,अमृत विचार। इस बार मोहर्रम पर सामूहिक रूप से सजने वाली महफिल की जगह अब सोशल मीडिया पर जश्ने इमाम हुसैन की महफिल सजेगी। दरगाह से मुसलमानों से अपील करते हुए कहा गया है कि जलसे और अन्य कार्यक्रमों में खर्च होने वाले रुपयों से गरीब और जरूरतमंद लोगों की मदद करें। शरीयत के दायरे …

बरेली,अमृत विचार। इस बार मोहर्रम पर सामूहिक रूप से सजने वाली महफिल की जगह अब सोशल मीडिया पर जश्ने इमाम हुसैन की महफिल सजेगी। दरगाह से मुसलमानों से अपील करते हुए कहा गया है कि जलसे और अन्य कार्यक्रमों में खर्च होने वाले रुपयों से गरीब और जरूरतमंद लोगों की मदद करें। शरीयत के दायरे में रहकर की मोहर्रम के कार्यक्रम अपने घरों में करें। सड़क पर किसी भी तरह का कोई आयोजन भी न करने की अपील की गई है।

दरगाह आला हजरत के संगठन जमात रजा ए मुस्तफा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सलमान मियां ने कहा कि लोग शरीयत के दायरे में ही रहकर ही मोहर्रम मनाएं। घरों में इबादत के साथ गरीब और जरूरतमंद लोगों की मदद करें। मिलाद की महफिल, जलसे, कुरानख्वानी के प्रोग्राम घरों के अंदर करें। सड़क पर किसी तरह की भीड़ न लगाएं। मोहर्रम की 9वीं या 10वीं और 10वीं या 11वीं का रोजा रखें। सुन्नी मुसलमान मोहर्रम पर गैरशरई कामों से बचें। शरीयत में ढोल-ताशे बजाना हराम है। मोहर्रम में मुसलमान इन चीजों से बचें।

इस समय कोरोना महामारी के चलते जलसे, जुलूस नहीं हो पा रहे हैं और न ही मस्जिदों में सामूहिक जुमा हो पा रहा है। इमाम हुसैन की खूबियां लोगों को बताई जा सकें, इसलिए मस्जिदों के इमामों को चाहिए कि ईशा की नमाज के बाद माइक पर थोड़ी देर इमाम हुसैन की सीरत (जिंदगी) पर रोशनी डालें, जिसे लोग अपने-अपने घरों पर सुन सकें।

जमात के प्रवक्ता समरान खान ने बताया जमात रजा-ए-मुस्तफा की तरफ से मोहर्रम की पहली तारीख से 10 वीं तारीख तक प्रतिदिन रात 9 बजे से ऑनलाइन प्रसारण इस लिंक http://mixlr.com/jamat-raza-e-mustafa-mumbai पर जिक्र ए शोहादा ए कर्बला सुन सकते हैं। इस लिंक को सोशल मीडिया के जरिए लोगों के पास भेज दिया गया है।

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