नगर निकाय चुनाव: निवर्तमान पार्षदों की पत्नियों को ही टिकट क्यों मिले...अपने ही उठा रहे सवाल

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली, अमृत विचार। निकाय चुनाव में निवर्तमान पार्षदों की पत्नियों को ही टिकट देने और पार्टी की महिला कार्यकर्ताओं को तवज्जो नहीं दिए जाने पर सवाल उठाए जा रहे हैं। ये सवाल कोई और नहीं बल्कि उनकी पार्टियों की महिला नेता उठा रही हैं। कुछ भाजपा और सपा की महिला पदाधिकारियों का दर्द है कि टिकट वितरण में महिला कार्यकर्ताओं को वरीयता नहीं दी गई। टिकट वितरण से पहले महिला विंग की नेताओं से संबंधित दावेदार की सक्रियता के बारे में नहीं पूछा गया। इतना नहीं टिकट वितरण के पैनल में भी उन्हें शामिल नहीं किया गया।

समाजवादी पार्टी में महिला सभा की जिला इकाई में उपाध्यक्ष रहीं किरण आर्या पार्षद का टिकट न मिलने से आहत हैं। उनका कहना है कि टिकट वितरण में पुरुष नेताओं ने मनमानी की है। पार्टी में कई पदों पर रह चुकीं नीरज तिवारी भी संगठन के नेताओं के रवैये से आहत हैं। उनका कहना है कि 22 साल पार्टी को देने के बाद जब-जब टिकट मांगा तो चुप रहने को कहा गया। अब जब बहू के लिए टिकट मांगा तो टिकट वितरण करने वाले नेताओं ने ध्यान नहीं दिया। कहा कि पार्टी में महिलाओं को बराबरी का दर्जा कभी नहीं मिल सकता है। पार्टी में महिलाएं रैली और सभाओं में भीड़ बढ़ाने के काम के लिए हैं और उनका कोई वजूद नहीं है।

भाजपा महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष नीलम जेठा बताती हैं कि टिकट वितरण में केवल वार्ड 18 में एक महिला कार्यकर्ता को टिकट मिला है। शेष निवर्तमान पार्षदों की पत्नियों और नेताओं की सिफारिश पर टिकट दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि महिलाओं को टिकट देने में महिला मोर्चा से पूछना तो दूर उन्हें टिकट वितरण के पैनल में भी शामिल नहीं किया गया। बताया कि वह वार्ड 17 में रहती हैं, लेकिन वहां सामान्य सीट पर ओबीसी को सिफारिश पर टिकट दिया गया, लेकिन उनसे जानकारी तक नहीं ली गई।

सपा महिला सभा की जिलाध्यक्ष रहीं भारती चौहान बताती हैं कि संगठन में निवर्तमान पार्षद और नेताओं की पत्नियों को ही टिकट दिया गया है। महिला सभा की किसी कार्यकर्ता को टिकट देने लायक नहीं समझा गया। टिकटों वितरण की सूची जारी की मगर उसकी भी जानकारी नहीं दी। पैनल में तो रखा नहीं, महिला को टिकट देने से पहले जानकारी तक नहीं की। पार्टी में जब नेता भीड़ लाने को कहते हैं तो पहुंच जाते हैं।

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