Chitrakoot News : नमामि गंगे परियोजना के तहत बन रहे घाटों से संत समाज आक्रोशित, बैठक कर जताई नाराजगी

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Edited By Amrit Vichar
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चित्रकूट में नमामि गंगे परियोजना के तहत बन रहे घाटों से संत समाज आक्रोशित।

चित्रकूट में नमामि गंगे परियोजना के तहत बन रहे घाटों से संत समाज आक्रोशित। बैठक कर जताई नाराजगी। इसके साथ ही कहा कि इससे नदी के अस्तित्व को खतरा।

चित्रकूट, अमृत विचार। तीर्थक्षेत्र में मप्र सीमा अंतर्गत नमामि गंगे परियोजना के तहत सनकादिक आश्रम व अन्य जगहों पर बनाए जा रहे घाटों को लेकर साधु-संतों में भी आक्रोश पनप रहा है। शनिवार को कामदगिरि के पास सनकादिक आश्रम में इस संबंध में बैठक हुई। इसमें तय किया गया कि इस निर्माण का हर स्तर पर विरोध किया जाएगा। 

गौरतलब है कि मप्र अंतर्गत इलाकों में सिंचाई विभाग द्वारा तीन घाटों का निर्माण किया जा रहा है। स्फटिक शिला से लेकर आरोग्य धाम तक 25 करोड़ की लागत से इनको बनाया जा रहा है। इन निर्माणों को लेकर समाजसेवियों के साथ साधु-संत नाराज हैं। इनका कहना है कि अगर ये घाट बनाए जाएंगे तो नदी के स्रोत बंद हो जाएंगे, साथ ही वनौषधि भी खत्म हो जाएगी।

शनिवार को बैठक में सुंदर चित्रकूट विषय पर चर्चा की गई। इसकी अध्यक्षता सनकादिक महाराज ने की।  बैठक में सबसे बड़ा मुद्दा मंदाकिनी नदी किनारे सिरसा वन में अर्जुन के पेड़ों के जंगल में घाट निर्माण का औचित्य था। संत गोविंद दास ने कहा कि सभी को अपना विचार ऱखने और निर्माण कार्यों को लेकर आपत्ति दर्ज कराने का हक है।

समाजसेवी अभिमन्यु भाई ने कहा कि मंदाकिनी केवल नदी नहीं है, यह हमारी जीवनदायिनी है। नदी धीरे-धीरे सूख रही है, जिसका कारण है अतिक्रमण और जंगलों का कटना। चित्रकूट में पहले से ही बहुत घाट हैं। अब सिरसा वन में, जहां अर्जुन जैसे औषधीय वृक्षों का जंगल है, की मिट्टी काट कर घाट बनाने का कोई औचित्य नहीं है।

इससे नदी और संकरी होगी और उसके जलस्रोत बंद हो जाएंगे। रामायण कुटी के संत रामहृदय दास ने कहा कि चित्रकूट में नए घाटों की जरूरत नहीं है। सनकादिक महाराज ने कहा कि जहां पर वृक्ष लगे हैं, वहां घाट नहीं बनने चाहिए। कामदगिरि मुखारबिंद के संत मदन गोपाल दास ने कहा कि चित्रकूट के जंगल, पहाड़ बचेंगे तभी मंदाकिनी, सरयू और पयस्वनी नदी बचेंगी।

सुंदर चित्रकूट की परिकल्पना साकार हो

बैठक में अभिमन्यु भाई ने अपील की कि संत समाज के साथ मिलकर सुंदर चित्रकूट की एक परिभाषा को साकार करें। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सरकारों का नक्शा अलग-अलग है। चित्रकूट को किसी एक सरकार के अधीन किया जाए और इसके विकास के लिए बाकायदा एक कार्ययोजना बने। आवासीय भूमि जंगल, कृषि भूमि और सामुदायिक भूमि स्पष्ट हो। बसाहट ऐसी हो कि नदियों से दूर हो और नदियों के किनारे केवल जंगल के अलावा कुछ न हो। सभी ने मिलकर यह कहा कि सुंदर चित्रकूट के लिए एक राय बनाने के बाद इस पर कार्य किया जाएगा। 

सीएम को भी पत्र भेज चुके हैं 

घाटों के निर्माण कार्य पर साधु-संत और समाजसेवी मप्र के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र भेज चुके हैं। इसमें इन लोगों ने घाट निर्माण बंद कराने की मांग की है।    

आरोग्यधाम में भी हुई बैठक

मंदाकिनी नदी के किनारों पर घाट निर्माण के विरोध में शुक्रवार को आरोग्यधाम में भी बैठक हो चुकी है। इसमें दीनदयाल शोध संस्थान के अभय महाजन के साथ एवं सतना जिले के सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता पर्यावरण वैज्ञानिक घनश्याम गुप्ता आदि ने घाटों से मंदाकिनी के भविष्य पर कई तरह की चिंताएं व्यक्त कीं। इन लोगों ने कहा कि सिरसा वन व अन्य जगहों पर नमामि गंगे परियोजना से बन रहे घाट मंदाकिनी नदी के अस्तित्व पर खतरा हैं। बैठक में डॉ. अनिल जायसवाल, अभियंता राजेश त्रिपाठी, रमाकांत त्रिपाठी और प्रदीप पांडेय ने विचार रखे। अभय महाजन ने कहा कि घाट का काम यहां बंद होना चाहिए। यदि घाट बनाना है तो ऐसी जगह बने जहां उसकी जरूरत है। रमाकांत त्रिपाठी ने मोहकमगढ़ के पास घाट की जरूरत बताई।

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