विश्व अस्थमा दिवस : आस्थमा का इलाज करा रहे गंभीर मरीज हो जायें सवाधान, पढ़िये डॉक्टर की रिपोर्ट
लखनऊ, अमृत विचार। विश्व अस्थमा दिवस से एक दिन पहले यानी की एक मई को किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) स्थित पल्मोनरी एण्ड क्रिटिकल केयर मेडिसिन की तरफ से एक प्रेसवार्ता का आयोजन किया गया। इस दौरान पल्मोनरी एण्ड क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो.वेद प्रकाश ने बताया कि 100 में से 70 फीसदी अस्थमा के मरीज इलाज लेने के लिए डॉक्टर तक नहीं पहुंच पाते। 25 फीसदी मरीज गलत इलाज ले रहे हैं। जबकि महज 5 फीसदी मरीज सही इलाज ले रहे हैं।
डॉ.वेद प्रकाश के मुताबिक अस्थमा एक सांस की बीमारी है जो वायुमार्ग को प्रभावित करती है, जिससे सांस लेना मुश्किल हो जाता है। इससे घरघराहट, खांसी, सीने मे जकड़न और सांस लेने में तकलीफ होती है। अस्थमा एक आम बीमारी है, जो दुनिया भर में अनुमानित 34 करोड़ लोगों को प्रभावित करती है। यह विमारी मुख्य रुप से छोटे उम्र के बच्चों में पायी जाती है। अस्थमा का प्रसार हाल के सालों में रहा है, जिसमें विषेश रूप से निम्न और मध्यम आय वाले देश सम्मिलित होते हैं।
डॉ. वेद के मुताबिक अस्थमा से हर वर्ष अनुमानित रूप से 2.5 लाख लोगों की मृत्यु होती है। पुरूषों की तुलना में महिलाओं में अस्थमा अधिक पाया जाता है। अस्थमा मुख्य रूप से बच्चों में होता है, तथा दुनिया भर में अनुमानित 14 प्रतिशत बच्चे प्रति वर्ष अस्थमा के चलते कई बच्चों का स्कूल छूटता है।
ग्लोबल अस्थमा रिपोर्ट 2018 के अनुसार, लगभग 6.2 प्रतिशत भरतीय (लगभग 74 मिलियन लोग) अस्थमा से प्रभावित है। जिसमें लगभग 6-7 प्रतिशत बच्चे प्रभावित है । भारत में नॉन इन्फेक्टिव कारणों से होने वाली सभी मृत्यु का 10 प्रतिशत हिस्सा अस्थमा की वजह से होता है।
उन्होंने बताया कि अस्थमा के बारे में जागरूकता बढ़ाने और बेहतर अस्थमा नियंत्रण के लिए मई के पहले मंगलवार को विश्व अस्थमा दिवस मनाया जाता है। GINA ने 2023 विश्व अस्थमा दिवस के लिए थीम के रूप में "अस्थमा केयर फॉर ऑल' को चुना है। अस्थमा केयर फॉर ऑल संदेश सभी संसाधन दशों में प्रभावी अस्थमा प्रबंधन कार्यक्रमों के विकास और कार्यान्वयन को बढ़ावा देता है।
इस अवसर पर केजीएमयू के प्रो.आरएस कुशवाहा ने बताया कि अस्थमा होने के सही कारणों का अभी तक पता नही चला है, लेकिन यह माना जाता है कि यह आनुवांशिक और पर्यावरणीय कारकों के बीच एक जटिल परस्पर क्रिया है, जहाँ कुछ ज्ञात या अज्ञात कारक हैं जो अस्थमा के विकास में योगदान कर सकते है।
1. अनुवांशिक कारण : अस्थमा या एलर्जी का पारिवारिक इतिहास अस्थमा को बढ़ा सकता है।
2. पर्यावरणीय एलर्जी : धूल के कण, जानवरों की रूसी, पराग और मोल्ड जैसे एलर्जी संपर्क में आने से कुछ लोगों में अस्थमा के लक्षण पैदा हो सकते है।
3. वायु प्रदूषण : धूम्रपान, वाहन निकास और औद्योगिक प्रदूषकों सहित वायु प्रदूषण के संपर्क में आने से अस्थमा में योगदान हो सकता है। 4. रेस्पिरेटरी इंफेक्शन : वायरल इंफेक्शन जैसे कि कॉमन कोल्ड, फ्लू और रेस्पिरेटरी सिंकिटियल वायरस (RSV) अस्थमा के लक्षणों को ट्रिगर कर सकते हैं या अस्थमा को बढ़ा सकते हैं।
5. पर्यावरणीय कारण : वायु प्रदूषण पैदा करने वाले पदार्थों और धूल, रसायनों और धुएं जैसे पदार्थों के संपर्क में आने से अस्थमा हो सकता है। 6. व्यायाम अस्थमा : व्यायाम या शारीरिक गतिविधि कुछ लोगों में अस्थमा के लक्षणों को ट्रिगर कर सकती है।
लक्षण -
- मरीज के सीने में कसाव व दर्द महसूस होना।
2. बच्चो में अस्थमा का महत्वपूर्ण लक्षण सुबह या रात में खांसी/श्वांस फूलना/पसली
चलना है।
3. रोगी की श्वास फूलना।
4. खांसी आना ।
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