अयोध्या: भाजपा में बागियों और भितरघातियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं
अयोध्या/अमृत विचार। सर्वाधिक सदस्यता और अनुशासन का दावा करने वाली पार्टी भाजपा अब तक बागियों और भितरघातियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर पाई है, जबकि मतदान के लिए अब कुछ ही दिन शेष बचे हैं। जबकि पार्टी के प्रदेश महामंत्री संगठन और मुख्यमंत्री का दौरा हो चुका है। सियासी हलकों में पार्टी नेतृत्व की ओर से कार्रवाई को लेकर हो रही हीलहवाली पर खुसुर-फुसुर जारी है।
गौरतलब है कि नगर निकाय चुनाव के रण में टिकट कटने और तवज्जो न दिए न दिए जाने से नाराज लोगों की भितरघात तो खुलकर सामने नहीं आ रही है, लेकिन बागी ताल ठोंक मैदान में जुटे हैं। नगर निगम क्षेत्र में महापौर पद पर ही पार्टी के एक बागी शरद पाठक बाबा ने पूरे दमखम के साथ अपनी पत्नी को निर्दलीय मैदान में उतार रखा है।
तमाम वार्डो में पार्षद पद पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे कई कार्यकर्ताओं ने टिकट न मिलने के बाद निर्दलीय ताल ठोंक रखी है। इनमें से कुछ तो काफी दिनों से पार्टी और आनुसांगिक संगठन के विचार-परिवार से जुड़े रहे है, जबकि कुछ सियासत की नई पौध भी है। किसी को साधू-संतों का निकटस्थ माना जाता है तो किसी का नजदीकी जुड़ाव विहिप, भाजपा अथवा अन्य संगठनों से है।
कुछ को परदे के पीछे जनप्रतिनिधियों और पार्टी पदाधिकारियों का सियासी आशीर्वाद भी हासिल बताया जाता है। चुनावी रण में ताल ठोंक रहे बागी अपने को बागी नहीं मान रहे , बल्कि मतदाताओं के बीच खुद को असली भाजपाई बता रहे हैं। कई दावेदार तो अभी भी भाजपा और उसकी रीति-नीति के साथ होने तथा चुनाव जीतने पर भी भाजपा में ही रहने की बात कह रहे हैं।
भीतरखाने बागियों को मिल रहा आशीर्वाद भी
भाजपा समेत अनुसांगिक संगठनों के कई वरिष्ठ लोगों को पार्टी प्रत्याशी के खिलाफ ताल ठोंक रहे बागियों को को समझा-बुझा मैदान से बाहर लाने का जिम्मा दिया गया था, लेकिन इस कवायद का कोई ख़ास असर नहीं हुआ।
समझाने-बुझाने की यह कवायद नगर निगम क्षेत्र से लेकर नगर पालिका व नगर पंचायतों तक हुई लेकिन पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ निर्दलीय ताल ठोंक रहे प्रत्याशियों के अपने तर्क सुनकर इनको समझाने-बुझाने के लिए लगाए गए लोग भी निरुत्तर हो गए और गेंद पार्टी नेत्तृव के पाले में डाल दी गई।
इस बात को भाजपा जिलाध्यक्ष संजीव सिंह भी स्वीकार कर चुके हैं कि पार्टी नेतृत्व के निर्देश पर नगर पालिका और नगर पंचायतों में पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ विभिन्न पदों पर चुनाव लड़ रहे तथा अधिकृत प्रत्याशी के अलावा दूसरे का प्रचार-प्रसार कर रहे 100 से ज्यादा लोगों को चिह्नित किया गया है।
वह यह भी कह चुके हैं कि पार्टी के खिलाफ कार्य करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी, मगर अभी तक कार्रवाई की बात केवल जमा-जुबानी तक ही सीमित है। वहीं जिम्मेदार जनप्रतिनिधि, पदाधिकारी और क्षेत्रीय नेता सार्वजनिक रूप से पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ कुछ बोलने से परहेज कर रहे हैं, लेकिन परदे के पीछे अपने-अपने समर्थक बागी प्रत्याशियों को आशीर्वाद देने में जुटे हैं।
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