Chitrakoot News : हाईटेंशन तार टूटने से चपेट में आईं पांच भैसों की मौत, पशुपालकों के सामने आजीविका का संकट
चित्रकूट में हाईटेंशन तार टूटने से चपेट में आईं पांच भैसों की मौत।
चित्रकूट में हाईटेंशन तार टूटने से चपेट में आईं पांच भैसों की मौत। भैसों की मौत से लाखों का नुकसान हो गया। अब पशुपालकों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया।
चित्रकूट, अमृत विचार। राजापुर थाना क्षेत्र की ग्राम पंचायत रंपुरिया अव्वल में रविवार को हाईटेंशन तार टूटने से इसकी चपेट में आईं पांच भैसों की मौके पर मौत हो गई। ग्रामीणों ने थाने में तहरीर देकर पोस्टमार्टम कराने की मांग की है।
रंपुरिया अव्वल के पशुपालक अपनी भैंसों को चिल्लीराकस हार में चराने के लिए ले गए थे। उन्होंने बताया कि दोपहर में अचानक खेतों के ऊपर से निकली हाईटेंशन तार टूटकर नीचे गिर गई। इससे बेनी प्रसाद पुत्र श्यामसलोने की तीन भैंसें तथा सत्यदेव पुत्र राजकुमार की दो भैंसें करंट की चपेट में आ गईं। इनकी कुछ देर तड़पने के बाद मौत हो गई।
सत्यदेव ने बताया कि इन्हीं भैंसों से दूध का व्यापार करके किसी तरह से अपने परिवार का जीवीकोपार्जन किया करता था। बेनी प्रसाद भी दूध का व्यापार कर अपने परिवार का भरण पोषण करता था। ग्रामीणों ने बताया कि फसल पैदावारभी ठीक न होने से उनके सामने अब आजीविका का संकट है। उन्होंने बताया कि घटना की सूचना थाना राजापुर में गई है। मृत भैंसों के शव विच्छेदन के लिए कहा गया है।
ग्राम प्रधान राकेश द्विवेदी ने बताया कि दोनों परिवार गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन कर रहे हैं। उन्होंने जिलाधिकारी से विद्युत विभाग से आर्थिक सहायता दिलाए जाने की मांग की है।
एक-एक कर गिरती गईं भैसें
भुक्तभोगियों ने बताया कि जैसे ही तार टूटकर गिरी, इसकी चपेट में भैंसें आ गईं। एक-एककर उनके मवेशी जमीन पर गिरे तो पहले तो वे लोग कुछ समझ नहीं पाए और जब मामला पता चला तो चाहकर भी कुछ नहीं कर सके।
रिपोर्ट के बाद मिल सकेगा मुआवजा
उधर, इस संबंध में बिजली विभाग के सहायक अभियंता डीके सिंह ने बताया कि संयुक्त रिपोर्ट के बाद ही किसानों को मुआवजा मिल पाएगा। बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद विद्युत विभाग भी इसकी जांच करेगा। इसके बाद अधिकारियों की संस्तुति के पश्चात पशुपालकों को मुआवजा मिल पाएगा।
लाखों का हुआ नुकसान
गांववालों की मानें, तो एक दुधारू भैंस की कीमत पचास हजार से लेकर एक लाख तक होती है। मरने वाली सभी भैंसें दुधारू थीं और सुबह-शाम मिलाकर लगभग छह लीटर दूध दे देती थीं। दूध बेचकर पशुपालक अपना घर खर्च चलाते थे। इनकी मौत ने उनको तगड़ा नुकसान पहुंचाया है।
