कोरोना से मौत के लिए मुआवजा नीति की मांग वाली याचिका खारिज

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Edited By Amrit Vichar
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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कोरोना वायरस संक्रमण के कारण जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को समान मुआवजा देने के लिए राष्ट्रीय नीति तैयार करने के अनुरोध संबंधी याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि प्रत्येक राज्य की वित्तीय स्थिति के अनुसार …

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कोरोना वायरस संक्रमण के कारण जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को समान मुआवजा देने के लिए राष्ट्रीय नीति तैयार करने के अनुरोध संबंधी याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि प्रत्येक राज्य की वित्तीय स्थिति के अनुसार इस तरह के मुआवजे के लिए अलग नीति है।

याचिकाकर्ता हासिक थाइकांडी का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील दीपक प्रकाश ने दलील दी कि फ्रंटलाइन कोरोना योद्धाओं जैसे डॉक्टरों, नर्सों और पैरामेडिकल स्टाफ आदि के लिए मुआवजा आवश्यक है। उन्होंने कहा कि वायरस के कारण भारत में हजारों लोगों की मौत हो गई है और आरोप है कि पीड़ितों के परिजनों को समान मुआवजा नहीं मिल रहा है।

उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार ने कोरोना वायरस से लड़ने वाले फ्रंटलाइन कर्मचारियों को एक करोड़ रुपये दिए, जबकि अन्य ने केवल एक लाख रुपये की पेशकश की। याचिकाकर्ता ने बताया कि देश की अधिकांश आबादी आर्थिक रूप से कमजोर श्रेणी में आती है, जिसमें पूरा परिवार केवल कमाने वाले सदस्य पर निर्भर है।

याचिकाकर्ता ने निवेदन करते हुए कहा कि दुनिया की स्थिति एक आपात स्थिति के समान है, ऐसे में उन परिवारों को राहत उपायों और वित्तीय सहायता के तौर पर पूर्व अनुदान मुआवजा प्रदान करना अनिवार्य है, जिन्होंने कोविड-19 के कारण अपने प्रियजनों को खो दिया है। पीठ ने याचिका सुनने के लिए इच्छुक नहीं होने की बात कहते हुए इसे खारिज कर दिया।

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