'जलवायु परिवर्तन को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठा रहे धनी देश'
बैंकॉक। प्रशांत द्वीप समूह के नेताओं ने धनी देशों की आलोचना करते हुए कहा है कि जलवायु परिवर्तन संकट के लिए सबसे अधिक जिम्मेदार होने के बावजूद वे इसे नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठा रहे हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि धनी देश इस संकट से प्रभावित देशों को दिए गए ऋण से मुनाफा कमाने में जुटे हैं। प्रशांत द्वीप देशों के नेताओं तथा प्रतिनिधियों ने सोमवार को बैंकॉक में संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में मांग की कि दुनिया को पर्यावरणीय प्रभाव का मुकाबला करने में भेदभाव को दूर करने के लिए और अधिक प्रयास करने चाहिए, खासकर जब उनके देश कोविड-19 वैश्विक महामारी के कारण आर्थिक परेशानियों का सामना कर रहे हैं।
कुक आइसलैंड के प्रधानमंत्री मार्क ब्राउन ने ‘द एसोसिएटेड प्रेस’ से कहा कि जलवायु परिवर्तन का मुकाबला करने के लिए वित्त मॉडल (प्रभाव को कम करने के लिए ऋण देना) उनके क्षेत्र में ऐसी छोटी आबादी वाले देशों के लिए ‘‘उचित विकल्प नहीं’’ है जो ‘‘कार्बन का बेहद कम उत्सर्जन’’ करते हैं लेकिन इसका प्रभाव उन पर सबसे अधिक है। उन्होंने आर्थिक रूप से कमजोर देशों पर वित्तीय बोझ को कम करने में मदद करने के लिए अनुदान या ब्याज मुक्त ऋण जैसे विकल्पों को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
पलाऊ के राष्ट्रपति सुरंगेल एस व्हिप्स जूनियर ने सहमति व्यक्त की कि वित्तपोषण के अवसर ‘‘ बेहद कम और कठिन’’ हैं, और उन्होंने वित्तीय सहायता प्रदान करने में विफल रहने के लिए धनी देशों की आलोचना की। उन्होंने ‘द एसोसिएटेड प्रेस’ से कहा, ‘‘ हम समस्या की वजह नहीं हैं, लेकिन अब वे हमें ऋण देकर उसका ब्याज सहित भुगतान लेकर हमसे पैसे कमाएंगे।’’ व्हिप्स ने कहा कि पलाऊ की अर्थव्यवस्था पर्यटन पर बहुत अधिक निर्भर है, जिसे जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से बहुत खतरा है।
अमेरिका के साथ ‘कॉम्पैक्ट्स ऑफ फ्री एसोसिएशन’ पर पलाऊ की वार्ता में देश की आर्थिक सुरक्षा भी एक प्रमुख मुद्दा है। यह एक व्यापक समझौता है जो अगले दो दशकों तक अमेरिका के साथ हमारे संबंधों को नियंत्रित करेगा। उन्होंने कहा कि ये संबंध पर्याप्त सहायता के बदले में द्वीपों में अमेरिका को विशिष्ट सैन्य और अन्य सुरक्षा अधिकार प्रदान करते हैं। व्हिप्स ने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रशासन ने 20 साल की अवधि में लगभग 90 करोड़ अमेरिकी डॉलर का वादा किया है, जबकि यह उस राशि से ‘‘निश्चित रूप से कम’’ है जो उनके देश को चाहिए।
व्हिप्स ने कहा कि वह अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के दौरान तय की गईं शर्तों से काफी हद तक संतुष्ट हैं। अमेरिकी कांग्रेस द्वारा विदेशी सहायता में कटौती करने की चिंताओं पर व्हिप्स ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अमेरिका समझौते का सम्मान करेगा। उन्होंने अगले सप्ताह पापुआ न्यू गिनी में दोनों पक्षों द्वारा इस समझौते पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद जतायी।
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