एड्स वैक्सीन डे: बरेली मंडल में दबे पांव लोगों पर हमला कर रही है जानलेवा बीमारी
बरेली, अमृत विचार। मंडल में तेजी से बढ़ रही एचआईवी संक्रमितों की संख्या एहसास करा रही है कि आम लोग ही नहीं, सरकार भी इस जानलेवा बीमारी को लेकर कितनी बेखबर है। 2017 में बरेली मंडल में एचआईवी संक्रमितों की संख्या सिर्फ 2016 थी जो अब बढ़कर 4845 हो गई है। विशेषज्ञों के मुताबिक आंकड़ों का एक मतलब यह है कि लोगों में जागरूकता बढ़ी है और वे इलाज कराने में संकोच नहीं कर रहे हैं लेकिन ये जता रहे हैं कि सतर्कता की कमी ऐसे ही बनी रही तो एचआईवी संक्रमितों की संख्या और तेजी से बढ़ेगी।
जिला अस्पताल के एंटी रेट्रो वायरल ट्रीटमेंट सेंटर (एआरटी) के आंकड़ों के अनुसार पिछले छह सालों में एचआईवी संक्रमितों की संख्या काफी तेजी से बढ़ी है। इस समय बरेली मंडल में एचआईवी संक्रमितों की संख्या 4845 है, इनमें से 3130 संक्रमित पुरुष हैं और 1483 महिलाएं। इसके अलावा 118 लड़के और 92 लड़कियां भी एचआईवी संक्रमित हैं जिनकी उम्र 14 साल तक है। एचआईवी संक्रमितों में 22 ट्रांसजेंडर मरीज भी शामिल हैं। ये आंकड़े उन्हीं एचआईवी संक्रमितों के हैं जो एआरटी सेंटर पर इलाज करा रहे हैं। जो लोग बेखबर हैं या जानबूझकर इलाज नहीं करा रहे हैं, उनकी संख्या का कोई अनुमान नहीं लगाया जा सकता।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि एक समय एचआईवी या एड्स का संक्रमण काफी शर्मिंदगी की बात मानी जाती थी और लोग इलाज तक नहीं कराते थे लेकिन अब जागरूकता बढ़ने के साथ इलाज कराने वालों की तादाद भी बढ़ी है। जिला अस्पताल स्थित एंटी रेट्रो वायरल ट्रीटमेंट सेंटर पर मरीजों को इलाज की सुविधा भी मिल रही है। सामान्य मरीजों की भी हर ऑपरेशन से एचआईवी जांच होती है। प्रत्येक गर्भवती महिला की एचआईवी जांच की जाती है। पहले एचआईवी जांच सिर्फ एआरटी सेंटर में होती थी, लेकिन अब सभी सीएचसी में यह सुविधा है।
अभी नहीं बन पाई है वैक्सीन
एचआईवी का संक्रमण रोकने के लिए अब तक वैक्सीन नहीं बन पाई है। विश्वस्तर पर इसके लिए तमाम सालों से लगातार शोध किया जा रहा है लेकिन वैज्ञानिकों को अब तक वांछित कामयाबी नहीं मिली है। इसके बावजूद एड्स वैक्सीन दिवस मनाया जाता है तो सिर्फ इसलिए कि लोगों को जागरूक किया जा सके कि इस जानलेवा बीमारी से बचने के लिए वे पर्याप्त सतर्कता बरतें।
मरीजों की संख्या बढ़ने के पीछे जागरूकता एक कारण है। एड्स के मामले में समय पर एचआईवी जांच और पॉजिटिव रिपोर्ट आने पर लगातार इलाज कराना जरूरी है। इसके लिए जागरूकता और बढ़ाने की जरूरत है। - मनोज वर्मा, डेटा मैनेजर एआरटी सेंटर जिला अस्पताल
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