बरेली:... ताकि अपनी कमाई से ही चले नगर निगम
बरेली, अमृत विचार। नगर निगम में इस बार सबसे ज्यादा जोर कमाई और खर्च का संतुलन बनाए रखने पर होगा ताकि फिर खजाना खाली होने की नौबत न आए। टैक्स विभाग के हर कर्मचारी की जिम्मेदारी तय की जाएगी कि वह लक्ष्य के मुताबिक राजस्व वसूली करके दे। जरूरत पड़ेगी तो नगर निगम अपना बांड निकालकर जनता से भी पैसे जुटाएगा। शासन के निर्देश पर नगर निगम में कुछ इसी तरह की कार्ययोजना बनाई जा रही है।
दरअसल, प्रदेश के ज्यादातर निकायों का भ्रष्टाचार की वजह से बुरा हाल हो चुका है और वे कर्ज में डूब गए हैं। टैक्स लागू करने के साथ उसकी वसूली तक सबसे ज्यादा गड़बड़ियां हैं। इसके अलावा कमाई से ज्यादा खर्च और अवैध प्रक्रिया के तहत काम कराना भी बड़ा सिरदर्द है। बरेली नगर निगम के भी ऐसे तमाम मामले शासन तक पहुंचे हैं। अब नए कार्यकाल में निकायों की हालत सुधारने के लिए शासन स्तर से विस्तृत गाइड लाइन जारी की गई है।
दरअसल, 24 अप्रैल को प्रमुख सचिव नगर विकास अमृत अभिजात ने सभी नगर आयुक्त और अधिशासी अधिकारियों के साथ बैठक की थी। इसके मिनट्स स्थानीय निकाय निदेशक की ओर से जारी किए जाने के बाद बरेली में भी नगर निगम की छवि सुधारने के लिए युद्धस्तर पर काम शुरू किया गया है। इसी क्रम में पिछले दिनों 70 बाबुओं का वेतन रोक दिया गया था।
नगर निगम में बनी कार्ययोजना के तहत टैक्स विभाग के सभी टैक्स कलेक्टरों को अपने इलाके के सभी घरों और व्यावसायिक भवनों को बिल पहुंचाने और शत-प्रतिशत वसूली की जिम्मेदारी खुद संभालनी होगी। अगर कहीं कोई दिक्कत आएगी तो अफसरों को सूचना देनी होगी। ऑनलाइन व्यवस्था में गड़बड़ी की आशंका देखते हुए हर आय-व्यय का रजिस्टर बनाया जाएगा।
बड़े बकायेदारों से टैक्स की वसूली, आउटसोर्स एजेंसी से कराने पर विचार
माना गया है कि नगर निगम के टैक्स संबंधी 10 फीसदी मामले कोर्ट में लंबित हैं। इस कारण अरबों रुपये का बकाया होने के कारण उसकी वसूली नहीं हो पा रही है। अब बड़े बकायादारों से वसूली की जिम्मेदारी एजेंसियों को देने पर विचार चल रहा है। इसकी एवज में वसूल की गई धनराशि का कुछ फीसदी एजेंसी को दिया जाएगा।
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