बरेली: राजस्थानी मटके का कमाल...ठंडे पानी के साथ सेहत का भी ख्याल, ग्राहकों को खूब भा रहे

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
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बरेली, अमृत विचार। सूरज की तपिश लोगों को बेहाल कर रही है। शरीर को झुलसा देने वाली गर्मी में गला सूख रहा है। ऐसे में लोगों को देशी फ्रिज यानी राजस्थानी मटके भा रहे हैं। वे उनकी खरीदारी कर रहे हैं। गर्मियों में स्वास्थ्य के लिए भी मिट्टी से बने मटके का पानी काफी लाभदायक होता है।

शहर के प्रेमनगर, गांधी उद्यान जाने वाली सड़क समेत कई जगहों पर इन दिनों फुटपाथ के किनारे मिट्टी के बने मटकों का बाजार सज गया है। गर्मी बढ़ने के साथ ही मटकों की बिक्री में भी इजाफा हो रहा है। काली मिट्टी के बने हुए यह मटके लोगों को खूब लुभा रहे हैं।

राह चलते इन पर नजर पड़ते ही कार और बाइक सवार रुककर मटकों की खरीदारी कर रहे हैं। औसतन एक दुकान से प्रतिदिन 50 से 60 मटकों की बिक्री हो रही है। आर्डर करके राजस्थान से यह मटके मंगाए जाते हैं। गर्मी में अच्छा व्यापार होने से दुकानदारों के चेहरे पर भी खुशी है। दुकानदारों का मानना है कि अभी गर्मी और पड़ने की संभावना है। ऐसे में बिक्री बढ़ने की भी उम्मीद है।

50 से 700 रुपये तक मिल रहे मटके
प्रेमनगर के पास मटके की दुकान लगाने वाले मनोज प्रजापति बताते हैं कि राजस्थान और आजमगढ़ से मटके मंगाए जाते हैं। ये मटके सामान्य मटकाें की तुलना में काफी अच्छे होते हैं। इनमें पानी भी काफी ठंडा रहता है। बताया कि 50 से लेकर 700 रुपये तक के मटके बाजार में मौजूद हैं। बरेली में भी मटके बन रहे हैं, लेकिन अधिक मांग राजस्थान के मटकों की है। यह मटके बरेली के मटकों की अपेक्षा महंगे हैं। 4 से लेकर 40 लीटर तक के मटके हैं।

प्रतिदिन तीन हजार के बिक रहे मटके
गांधी उद्यान के पास मटके की दुकान लगाने वाले आकाश का कहना है कि राजस्थान से आने वाले मटके काली मिट्टी से बने होते हैं। बताया कि एक दिन में तीन हजार के करीब बिक्री हो जाती है। आने वाले समय में बिक्री बढ़ने की उम्मीद है। बताया कि ज्यादातर लोग घरों में इन मटकों का प्रयोग कर रहे हैं।

वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. वागीश वैश्य ने बताया कि मटके का पानी वातावरण के हिसाब से शीतल होता है। वहीं फ्रिज का तापमान हम अपनी सुविधा के अनुसार ठंडा करते हैं। कई बार ओपीडी में आने वाले मरीजों परामर्श के दौरान बताते हैं कि फ्रिज का पानी पी लिया था जिससे खांसी जुकाम हो गया। मटके का पानी नैचुरल होता है जिससे इसके नुकसान काफी हद तक कम है।

वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. वागीश वैश्य ने बताया कि मटके का पानी वातावरण के हिसाब से शीतल होता है। वहीं फ्रिज का तापमान हम अपनी सुविधा के अनुसार ठंडा करते हैं। कई बार ओपीडी में आने वाले मरीजों परामर्श के दौरान बताते हैं कि फ्रिज का पानी पी लिया था जिससे खांसी जुकाम हो गया। मटके का पानी नैचुरल होता है जिससे इसके नुकसान काफी हद तक कम है।

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