Amrit Vichar Reality Check : फिर माटी के चूल्हे से मोह, उज्ज्वला से तोड़ा रिश्ता 

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Edited By Amrit Vichar
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1167 रुपये का हुआ घरेलू सिलेंडर, 20 प्रतिशत लोग ही भरवा रहे 

पूराबाजार/ अयोध्या, अमृत विचार। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी उज्ज्वला योजना से अब लोगों का मोहभंग होने लगा है। योजना के तहत तमाम दुश्वारियों से परेशान होकर लोग अब परंपरागत तरीके को अपना रहे हैं। 
       
घरेलू सिलेंडर के बढ़े हुए दामों के चलते अब लोग पुराने रास्ते पर चल पड़े हैं और मिट्टी के चूल्हे पर खाना बनाने को मजबूर हो गए हैं। हालत यह है कि मेहनत मजदूरी करके किसी तरह परिवार का पालन पोषण करना ही कठिनाई हो गई है। उनके सामने संकट यह है कि 1167 रुपए का सिलेंडर कहां से भराएंगे, जबकि 2014 तक गैस सिलेंडर की भरवाई मात्र 440 रुपये थी। 

विकासखंड पूरा बाजार के लक्ष्मी दास पुर की सीमा मौर्या, सुशीला मौर्या, दयाशंकर , आसाराम, धर्मराज, श्री कृष्ण, कप्तान शर्मा, बिंदेश्वरी, शिव शंकर व रामू बताते हैं कि गैस सिलेंडर महंगा होने के कारण सिलेंडर भरा पाना असंभव है। मेहनत मजदूरी करके किसी तरह परिवार को पाला जा रहा है।  खाना बनाने के लिए लकड़ी ही मात्र एक सहारा है। इस बाबत सत्यनारायण गैस एजेंसी पूरा बाजार के मालिक संतोष सिंह ने बताया कि एजेंसी से उज्ज्वला योजना से करीब 3000 कनेक्शन हुए थे, जिसमें अब नियमित रूप से 20 प्रतिशत उपभोक्ता ही गैस सिलेंडर भरवा रहे। 

बोले उज्जवला योजना के पात्र -
 
सब्सिडी का भी अता पता नहीं

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पहले गैस सिलेंडर सस्ता था और सब्सिडी भी मिलती थी। तब गरीबों के लिए गैस सिलेंडर भरा पाना संभव था। अब तो मंहगा हो गया और सब्सिडी का भी अता पता नहीं। इसलिए अब चूल्हा ही ठीक है। 
मालती मौर्या, लक्ष्मीदासपुर, पूराबाजार 

 

इतने पैसों का बंदोबस्त नहीं हो पाता

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1167 रुपए गैस सिलेंडर भरवाने के लिए देना पड़ता है। महंगाई के चलते इतने पैसों का बंदोबस्त नहीं हो पाता। ऐसे में लकड़ी से चूल्हे पर खाना बनाकर ही परिवार को खिलाते हैं।
सीमा मौर्या, लक्ष्मीदासपुर, पूराबाजार


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