बरेली: लॉगिन-पासवर्ड है नहीं...लंबित जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र कैसे बनें, जानिए पूरा मामला

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Edited By Amrit Vichar
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तीन माह पहले एक साल से अधिक समय से नहीं बने प्रमाणपत्रों को आरसीसीएमएस पोर्टल से बनाने के हुए हैं आदेश

बरेली, अमृत विचार। एक वर्ष से लंबित जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र बनाने में दिक्कत हो रही है। अधिकारी लॉगिन पासवर्ड न होने का हवाला लिख रहे हैं। एक दूसरे अधिकारियों को चिट्ठी लिखी जा रही है लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकल रहा है।

गृह मंत्रालय के जनगणना कार्य निदेशालय ने आदेश जारी किए कि एक वर्ष से लंबित जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र आरसीसीएमएस (राजस्व न्यायालय कंप्यूटरीकृत प्रबंधन प्रणाली) पोर्टल से बनेंगे और उप जिला मजिस्ट्रेट ही बनाने के लिए अधिकृत हैं लेकिन स्थानीय स्तर पर अफसरों में आरसीसीएमएस पोर्टल का लॉगिन पासवर्ड न होने की बात कहते हुए पत्राचार किया जा रहा है।

पहले नगर मजिस्ट्रेट ने एसडीएम सदर को पत्र लिखकर कहा कि शहरी क्षेत्र के साथ छावनी परिषद क्षेत्र के भी जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र आरसीसीएमएस पोर्टल से बनाने को डीएम के आदेश पर आपको नामित किया गया है, क्योंकि मेरी लॉग इन पासवर्ड नहीं बना है। नगर मजिस्ट्रेट के पत्र के जवाब में एसडीएम सदर ने भी चिट्ठी लिखी है कि राजस्व परिषद ने एसडीएम सदर कार्यालय का भी लॉग इन पासवर्ड नहीं बनाया है, ऐसे में कार्यवाही किया जाना संभव नहीं है।

15 मार्च को शीतल वर्मा निदेशक एवं संयुक्त महारजिस्ट्रार की ओर से जारी पत्र के क्रम में नगर आयुक्त निधि गुप्ता वत्स ने नगर मजिस्ट्रेट के लिए चिट्ठी लिखकर अवगत कराया था कि 15 मार्च को जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम 1969 एवं राज्य नियमावली 2002 के अंतर्गत एक वर्ष से अधिक के विलंबित प्रकरणों में उप जिला मजिस्ट्रेट द्वारा आदेश पारित किए गए हैं। उक्त के क्रम में जिलाधिकारी ने आपको जन्म-मृत्यु कार्य के लिए नामित किया है।

विलंबित प्रकरणों से संबंधित आदेश आरसीसीएमएस पोर्टल से जारी किए जाएंगे। नगर आयुक्त की चिट्ठी के बाद नगर मजिस्ट्रेट रेनू सिंह ने उप जिलाधिकारी सदर को चिट्ठी लिखी। जिसमें बताया कि जिलाधिकारी के कार्य विभाजन के अनुसार पूर्व से नगर निगम क्षेत्र एवं कैंटोनमेंट बोर्ड से संबंधित एक वर्ष से अधिक समय से विलंबित जन्म एवं मृत्यु के प्रकरणों में कार्यवाही के लिए नगर मजिस्ट्रेट बरेली को प्रभारी अधिकारी नामित किया गया था, जिसके क्रम में इस स्तर से डिले कन्डोन के आदेश किए जा रहे थे।

निदेशक एवं संयुक्त महा रजिस्ट्रार जनगणना कार्य निदेशालय के पत्र के क्रम में जिला सूचना विज्ञान अधिकारी को पत्र भेजा गया। जिसमें पूछा गया कि क्या नगर मजिस्ट्रेट को आरसीसीएमएस पोर्टल आवंटित है या नहीं। जिला सूचना विज्ञान अधिकारी ने अपनी टिप्पणी में 14 अप्रैल को लिखा कि नगर मजिस्ट्रेट कार्यालय को आरसीसीएमएस पोर्टल पर राजस्व परिषद द्वारा कोई लॉगिन पासवर्ड उपलब्ध नहीं कराया गया है।

इसलिए उपरोक्त कार्यवाही के संबंध में जिलाधिकारी के आदेश 3 मई के अनुसार आपको आवंटित किया गया है। वहीं, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट/उप जिलाधिकारी सदर प्रत्यूष पांडेय की ओर से नगर मजिस्ट्रेट को चिट्ठी भेजी गयी है, जिसमें उन्होंने अवगत कराते हुए कहा है कि मेरे द्वारा ग्रामीण क्षेत्र से संबंधित एक वर्ष से अधिक विलंबित जन्म-मृत्यु के प्रकरणों में कार्यवाही कर डिले कन्डोन के आदेश किए जा रहे हैं।

एसडीएम सदर कार्यालय को आरसीसीएमएस पोर्टल पर राजस्व परिषद की ओर से कोई भी लॉगिन/पासवर्ड उपलब्ध नहीं कराया गया है। जिस कारण ग्रामीण क्षेत्र के जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र के प्रकरणों में ऑफलाइन ही कार्यवाही की जा रही है। इसलिए बिना लॉगिन/पासवर्ड के एसडीएम सदर कार्यालय स्तर से कोई भी कार्यवाही किया जाना संभव नहीं है।

यह लिखा है आदेश में
शीतल वर्मा निदेशक एवं संयुक्त महारजिस्ट्रार के आदेश में स्पष्ट लिखा गया है कि सभी सरकारी चिकित्सा संस्थान जन्म एवं मृत्यु रजिस्ट्रार के रूप में अधिसूचित हैं। इसके तहत सरकारी चिकित्सा संस्थान में घटित हुई जन्म अथवा मृत्यु की घटना का स्वत: संज्ञान लेते हुए समयबद्ध पंजीकरण कराया जाना चाहिए लेकिन विलंब पंजीकरण के प्रकरण इन संस्थानों में नहीं होने चाहिए। विलंबित प्रकरण उप जिला मजिस्ट्रेट ही देखेंगे, उनके स्तर से ही आदेश जारी किए जाएंगे।

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