उत्तराखण्ड: उर्दू के साथ संस्कृत में भी लिखे जायेंगे रेलवे स्टेशनों के नाम

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नई दिल्ली। उत्तराखंड के रेलवे स्टेशनों पर स्टेशन के नाम हिंदी, अंग्रेजी और उर्दू के साथ संस्कृत में भी लिखे जायेंगे तथा उर्दू के नाम हटाने की कोई योजना नहीं है। मुरादाबाद मंडल रेल प्रबंधक तरुण प्रकाश ने आज एक वर्चुअल संवाददाता सम्मेलन के दौरान एक प्रश्न के उत्तर में कहा “उत्तराखंड में 22 रेलवे …

नई दिल्ली। उत्तराखंड के रेलवे स्टेशनों पर स्टेशन के नाम हिंदी, अंग्रेजी और उर्दू के साथ संस्कृत में भी लिखे जायेंगे तथा उर्दू के नाम हटाने की कोई योजना नहीं है। मुरादाबाद मंडल रेल प्रबंधक तरुण प्रकाश ने आज एक वर्चुअल संवाददाता सम्मेलन के दौरान एक प्रश्न के उत्तर में कहा “उत्तराखंड में 22 रेलवे स्टेशन हैं।

आज की तारीख में सभी रेलवे स्टेशनों पर हिंदी, अंग्रेजी और उर्दू में स्टेशन के नाम लिखे हुए हैं। इसके अलावा चौथी भाषा के रूप में संस्कृत में भी नाम लिखे जायेंगे।” उत्तराखंड वर्ष 2000 तक उत्तर प्रदेश के हिस्सा था। उत्तर प्रदेश की दूसरी राजकीय भाषा उर्दू होने के कारण सभी रेलवे स्टेशनों के बोर्ड पर नाम हिंदी और अंग्रेजी के अलावा उर्दू में लिखे गये हैं।

उत्तराखंड की दूसरी राजकीय भाषा संस्कृत है। इस साल के आरंभ में राज्य के रेलवे स्टेशनों पर उर्दू के नाम हटाकर उनकी जगह संस्कृत में नाम लिखे गए थे। इससे काफी विवाद खड़ा हो गया था। बाद में फिर संस्कृत के नाम हटाकर उर्दू में नाम लिखे गए। रेलवे के नियमों के अनुसार किसी रेलवे स्टेशन पर अधिकतम तीन भाषाओं में नाम लिखे जा सकते हैं।

प्रकाश ने बताया कि संस्कृत में रेलवे स्टेशनों के नाम कैसे लिखे जायेंगे इस संबंध में स्पष्टीकरण मिलने के बाद संस्कृत में नाम जोड़ दिए जायेंगे। मंडल रेल प्रबंधक ने हरिद्वार रेलवे स्टेशन पर कुंभ की तैयारी के काम रोके जाने के बारे में कहा कि अभी सारा फोकस बुनियादी ढांचों और यात्री सुविधाओं को बेहतर बनाने पर है। कुंभ के समय राज्य सरकार की ओर से जो भी दिशा-निर्देश जारी होगा उसी के अनुसार तैयारी की जायेगी। हरिद्वार कुंभ अगले साल मार्च-अप्रैल में होगा हालांकि कोविड-19 महामारी के कारण इस बार मेले के आयोजन को लेकर संशय है।

 

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