इस तरह कार्यकर्ता करें दोबारा कार्य, खीरी बने समाजवादियों का गढ़- अखिलेश यादव

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Edited By Amrit Vichar
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लखीमपुर-खीरी, अमृत विचार। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने लखीमपुर खीरी से लोक जागरण अभियान की शुरुआत करते हुए आगामी लोकसभा चुनाव 2024 की तैयारियों का आगाज कर बड़ा दांव खेल दिया है। उन्होंने कहा कि दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में को संबोधित करते हुए कहा कि लखीमपुर समाजवादियों का गढ़ रहा है। दोबारा गढ़ बन जाए। इसके लिए सभी कार्यकर्ताओं को जागरुक होना पड़ेगा और जब जरूरत हो तब संगठन वहां दिखाई दे। इस तरह कार्यकरना होगा।

पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि जब हम लोग 2022 का चुनाव लड़ रहे थे तो जनता में भारी उत्साह देख कर लग रहा था कि सपा की सरकार बन रही है। अधिकारियों का व्यवहार भी बदल गया था, लेकिन सरकार नहीं बन पाई और फिर एक बार अधिकारियों का व्यवहार में बड़ा परिवर्तन दिखने लगा। हमसे कहां पर चूक हुई। कहां पर कमी रह गई। लोक जागरण अभियान इन्हीं कमियों और चूक को जानने के लिए शुरू किया गया है। वह बोले कि यहां थार अन्याय और अत्याचार का प्रतीक बन गई थी। किसानों पर थार चढ़ा दी गई। उन्हें रौंद दिया गया। समाजवादियों ने घायलों की सबसे पहले आकर मदद की। 

उन्होंने यहां के लोगों से पूछा कि जो किसान अपने खोये क्या सरकार को इसकी परवाह होगी। 700 किसानों की जान चली गई, लेकिन सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ा। किसानों पर लादे गए तीन कृषि कानून किसानों की मौत से वापस नहीं हुए बल्कि उत्तर प्रदेश, पंजाब समेत तीन  राज्यों में चुनावों को देखते हुए तीनों कृषि कानून सरकार ने वापस लिए थे। अखिलेश ने कहा कि सरकार बताए कि उन्होंने कितना गेहूं खरीदा है। सब गेहूं उन्हीं लोगों ने खरीद लिया जिन उद्योगपतियों को सरकार तीन कानूनों से लाभ पहुंचाना चाहती थी। सरकार चाहती तो गेहूं की एमएसपी बढ़ाकर सीधे किसानों को फायदा पहुंचा सकती थी, लेकिन किसानों को मिलने वाला लाभ पैकेट बंद आटा बेचने वाली कंपनी को पहुंचा दिया। 

रामदेव का आटा बाजार में नहीं चल पा रहा है, लेकिन अन्य कंपनियों का आटा खाने वालों की संख्या समाज में बढ़ गई है। 14 दिन में गन्ने का भुगतान दिलाने का दावा करने वाली भाजपा सरकार भुगतान के मामले में एक साल पीछे चल रही है। मुख्यमंत्री ने कुछ दिन पहले ही कहा था कि ट्रिपल इंजन की सरकार बनाए और ओडिशा में ट्रिपल इंजन आपस में भिड़ गए। कितने लोगों की जान चली गई, लेकिन अभी तक सही संख्या सरकार नहीं बता पा रही है। सरकार कहती थी कि कवच लगा दिया है। ट्रेन आगे से आए या पीछे से आए। इसका तुरंत पता चल जाएगा और दुर्घटना रुक जाएगी। सवाल उठाया कि अब यह कवच कहां गया। 

वह बोले कि सरकार का यह कवच भ्रष्टाचार का कवच था। उनके सारे सिग्नल सिस्टम फेल हो रहे थे। दिल्ली का कवच भी फेल हो गया। कानून व्यवस्था पर बोले कि यूपी वाले कहते हैं कि कानून व्यवस्था बेहतर है, लेकिन एक डीजीपी तक नहीं दे पाए। आजादी के बाद से यह पहली सरकार होगी, जिसमें तीन बार कार्यवाहक डीजीपी नियुक्त किए गए। डबल इंजन सरकार के मुख्यमंत्री एक डीजीपी नहीं दे पा रहे हैं। ऐसा लगता है कि लखनऊ और दिल्ली के इंजन भी आपस में टकरा रहे हैं। आरोप लगाया कि सरकार अपनी मनमर्जी का काम कराना चाहती है। इसलिए कार्यवाहक डीजीपी की नियुक्त करती है। भाजपा के नेता व कार्यकर्ताओं की मनमानी चल सके। 

बोले कि गरीब के लिए कानून अलग है, भाजपा के बड़े लोगों के लिए कानून अलग है और सपा के लिए कानून अलग है। इसके लिए उन्होंने थार, महिला पहलवानों का अपमान, भाजपा सांसद द्वारा दबंगों को ले जाकर पुलिस की पिटाई जैसे उदाहरण देते हुए कहा कि उस चौकी पर बुलडोजर भी नहीं था। अगर बुलडोजर होता तो भाग रही पुलिस उसके पीछे छुप जाती। पुलिस ने मुकदमा तो लिखा, लेकिन सांसद का पता उन्हें नहीं पता है। क्या ऐसा माना जा सकता है कि पुलिस को अपने स्थानीय सांसद का पता न ज्ञात हो। इसलिए कार्यवाहक डीजीपी रखा गया है कि सरकार मनमानी कर सके। 

अखिलेश यहीं नहीं रुके। बोले कि प्रदेश में अब तक 10,900 एनकाउंटर हो चुके हैं। यह आंकड़ा पुराना है। शायद मैं जब बोल रहा हूं तो सौ और एनकाउंटर बढ़ चुके हों। जिसमें पांच हजार घायल हैं, दो सौ की मौत हुई है। दो हजार से अधिक लोगों की पुलिस अभिरक्षा में मौत हुई है। यूपी पुलिस निशानेबाजी में इतनी तेज है कि गोली हमेशा पैर में ही लगती है, लेकिन गोली मारने वाली पिस्टल न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत नहीं की जा रही है। एनकाउंटर पर तंज कसते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि नोएडा में शादी से लौट रहे एक जिम ट्रेनर को पुलिस ने गोली मार दी। जब पता चला कि बदमाश नहीं है तो उसका इलाज कराया। वह बच तो गया, लेकिन आज भी व्हील चेयर पर है। 

गोरखपुर में कारोबार करने गए व्यापारी को होटल में मार-मार कर हत्या कर दी गई। जब सच सामने आया तो पुलिस को जेल जाना पड़ा। कानपुर  देहात में बलवंत सिंह को पुलिस ने इतना मारा कि वह मर गया, लेकिन सरकार ने उसकी कोई मदद नहीं की। कानपुर में ब्राह्मण मां-बेटी का घर बुलडोजर से गिरा दिया गया और उसमें आग लगा दी गई, जिसमें दोनों की मौत हो गई थी। इसी तरह झांसी में पुष्पेंद्र जो गुर्जर समाज का था और अग्निवीर बनने गया था। उसे बस से उतारकर पुलिस ने गोली मार दी थी और उसे बालू माफिया बता दिया था। 

जब सपा ने उसकी मदद की तब सच सामने आया और वह मुरैना मध्य प्रदेश का निकला। जातीय जनगणना जरूरी है। जब हमे पता होगा कि देश में हमारी संख्या कितनी है। तभी हम लोग देश प्रदेश और समाज को बांधकर रख सकेंगे। नोटबंदी पर बोले नोट काला सफेद नहीं होता। जनता से पूछा कि क्या नोटबंदी से तहसील व पुलिस का भ्रष्टाचार बंद हो गया है। कहा कि दो हजार का नोट छापा ही क्यों जब बंद करना था। इस पर कार्यकर्ता बोला कि नोट में लगी चिप खराब हो गई। जिस पर अखिलेश बोले की आप लोगों को बीजेपी की चिप खराब करनी है क्योंकि बीजेपी की चिप लोगों को गुमराह कर देती है।   

अखिलेश बोले, लातों के भूत बातों से नहीं मानते
पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने चुनावों पर तंज कसते हुए कहा कि लखीमपुर खीरी में ब्लॉक प्रमुख के चुनाव में एक बहन का पर्चा छीन लिया गया। जिला पंचायत के चुनाव में बीजेपी कम प्रशासन ज्यादा चुनाव लड़ रहा था। नगर निकाय चुनाव में भी कई जगहों से जानकारी मिली थी कि लखनऊ से निर्देश हैं कि सपा का प्रत्याशी न जीतने पाए। समाजवादियों को तो हरा दिया, लेकिन चंदौली में किन्नर का परिणाम नहीं बदल पाए। जीतने के बाद किन्नर को पता चला कि उसे हरा दिया गया है तो पहले किन्नरों ने बातचीत कर लड़ने का काम किया, लेकिन बातचीत से नहीं माने तो उन्होंने वही किया जो किन्नर करते हैं। कपड़े उतारकर पुलिस की लाठी छीनकर पुलिस को दौड़ा दौड़ाकर पीटा। वह बोले की कहना नहीं चाहिए फिर भी कह देते हैं पता नहीं बीजेपी इसका क्या मतलब निकालेगी कि एक कहावत प्रचलित है कि लातों के भूत बातों से नहीं मानते हैं।

आरक्षण पर भी किया करारा प्रहार
सपा सरकार में पुलिस भर्ती हुई थी। मेरिट के आधार पर भर्ती की गई थी। जिसका परीक्षा परिणाम रुकवा दिया गया। उसी दौरान चुनाव आ गया। प्रदेश में सत्ता बदल गई। उसके बाद अभ्यर्थी सुप्रीम कोर्ट गए। कोर्ट ने रिजल्ट घोषित करने के निर्देश दिए। रिजल्ट घोषित होने के चार दिन बाद ही हाईकोर्ट ने नया आदेश जारी कर दिया, जिसमें रिजल्ट बदल गया और 17 सौ नौजवानों की नौकरी चली गई। सपा ने पुराने आरक्षण के हिसाब से रिजल्ट बनाया था, जबकि बदला हुआ रिजल्ट नई आरक्षण व्यवस्था के तहत बनाया गया। नई आरक्षण व्यवस्था पर तंज कसते हुए कहा कि हमारे अधिकारों को छीनने के लिए यह बड़ी साजिश की गई है।

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