बरेली: बैंकों की मनमानी से कागजों में गुम ‘आत्मनिर्भर’ के दावे

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

बरेली, अमृत विचार। प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भर भारत अभियान की शुरुआत कर भले ही उद्यम को बढ़ावा देने पर जोर दिया हो, लेकिन बैंकों की मनमानी शासन की मंशा पर पानी फेर रही है। एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी), मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार (एमवाईएसवाई) योजना जैसी तमाम योजनाओं से लोग वंचित हैं। हालात ये हैं कि लक्ष्य के …

बरेली, अमृत विचार। प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भर भारत अभियान की शुरुआत कर भले ही उद्यम को बढ़ावा देने पर जोर दिया हो, लेकिन बैंकों की मनमानी शासन की मंशा पर पानी फेर रही है। एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी), मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार (एमवाईएसवाई) योजना जैसी तमाम योजनाओं से लोग वंचित हैं। हालात ये हैं कि लक्ष्य के मुताबिक 10 फीसदी को योजनाओं को लाभ नहीं मिल रहा।

बेरोजगारों को रोजगार मिल सकें और स्वदेशी चीजों को बढ़ावा देने के लिए शासन ने एक जनपद, एक उत्पाद योजना (ओडीओपी)शुरू की है। इस योजना के तहत जिले में जरी जरदोरी उत्पाद को शामिल किया गया, योजना का लाभ लेने के लिए 369 लोगों का चयन किया गया। साथ ही ऋण देने के लिए फाइल को संबंधित बैंकों में आवेदन भेज दिए गए।

इनमें मात्र एक फाइल स्वीकृत हुई। 11 फाइलों को खामियां गिनाकर वापस कर दिया गया। जबकि करीब 357 आवेदन बैंक में अभी लंबित है। यहीं हाल एमवाईएसवाई योजना का है। 206 लोगों को पात्र मानकर फाइल ऋण के लिए संबंधित बैंक भेजी गई। इनमें 13 फाइलें स्वीकृत कर करीब 16 लाख का लोन बांटा गया। 169 पत्रावाली अब भी लंबित हैं। जबकि 11 फाइलें वापस कर दी गई।

प्रधानमंत्री सृजन रोजगार योजना (पीएमईजीपी) योजना का है। जिसमें 277 लोगों को उद्योग विभाग ने पात्र माना। यहां पर भी बैंको की बड़ी लापरवाही सामने आई है। मात्र 21 फाइल स्वीकृत कर करीब 62 लाख का लोन बांटा गया। जबकि 177 फाइलें लंबित हैं। इन आंकड़ों से सहज अंदाजा लगाया जा सकता है युवाओं के आत्मनिर्भर बनने की मंशा पर बैंक किस तरह पलीता लगा रहे हैं।

बेरोजगारों को रोजगार मिल सके इसके लिए उद्योग केंद्र के माध्यम से शासन की तीन प्रमुख योजनाएं संचालित हैं। योजनाओं का लाभ पाने के लिए काफी लोगों ने आवेदन किए थे। उन पत्रावली की जांच करने के उपरांत फाइलों को बैंक भेजा गया। लेकिन बैंकों में अधिकांश पत्रावलियों को स्वीकृत नहीं किया गया है। जिस वजह से लाभार्थियों को ऋण नहीं मिल पा रहा है। हमारे स्तर से वहीं फाइलें भेजी है जो पात्र हैं और उनके लेनदेन का पिछला रिकार्ड भी ठीक रहा हो। – आरआर गोयल, उपायुक्त जिला उद्योग केंद्र

संबंधित समाचार