फैसला : लेखपाल की हत्या में सिपाही और उसके बेटे को उम्रकैद की सजा

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Edited By Amrit Vichar
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बांदा, अमृत विचार। अदालत ने एक सिपाही व उसके बेटे को लेखपाल की हत्या के मामले में नौ साल बाद उम्र कैद के साथ 25-25 हजार रुपये आर्थिक दंड की सजा सुनाई है। सिपाही को घटना के बाद ही पुलिस विभाग ने बर्खास्त कर दिया था। दोषी सिपाही और उसका जमानत पर थे। न्यायिक अभिरक्षा में दोनों को जेल भेजा गया है। 

मामला जनपद के पैलानी थाने का है। गत 18 अक्टूबर 2014 को खुली बैठक के दौरान हल्का लेखपाल शिवप्रसाद गांव के अयोध्या पुत्र मनुवा के दरवाजे पर आठ व्यक्तियों के साथ बैठकर खतौनी देख रहे थे। इसी बीच गांव का रहने वाला कर्वी में तैनात सिपाही चंदन प्रसाद वहां शराब के नशे में धुत होकर आया और उन लोगों से अभद्रता करने लगा। लेखपाल ने जब इसका विरोध किया तो उसने अपने बेटे से बंदूक लाने को कहा और फायर झोंक दिया। गोली जाकर सीधा लेखपाल अयोध्या प्रसाद के पेट में लगी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे फौरन जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालत गंभीर होने पर लेखपाल को इलाज के लिये कानपुर में इलाज कराया गया। चश्मदीद हल्का लेखपाल ने चंदन प्रसाद और उसके दो बेटे शैलेंद्र व एक अन्य के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। 

9 साल बाद न्यायाधीश ने फैसला सुनाते हुए सिपाही व उसके बेटे को उम्र कैद और 25-25 हजार रुपये के आर्थिक दंड की सजा सुनाई। दोषियों को सजा मिलने से लेखपाल के परिवारीजनों ने न्यायालय का शुक्रिया अदा करते हुए कहा है कि जब तक देश में न्यायालय सक्रिय हैं, तब तक पीड़ितों को देर से ही सही लेकिन न्याय मिलने की पूरी उम्मीद है।

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