Kanpur News : निवेश के सबसे बड़े प्रस्ताव पर कौन लगा रहा पलीता, 2015 करोड़ के प्रस्ताव पर हुआ था MOC
कानपुर में निवेश के सबसे बड़े प्रस्ताव पर कौन लगा रहा पलीता।
कानपुर में निवेश के सबसे बड़े प्रस्ताव पर कौन पलीता लगा रहा। कंसोर्टियम की ओर से धर्मप्रकाश के हस्ताक्षर हैं।
कानपुर, [महेश शर्मा]। कानपुर के औद्योगिक विकास को नयी गति देने वाले प्रस्ताव पर सरकारी तंत्र के ढीलमपोल रवैये से निवेशकों में निराशा का माहौल है। यूपी ग्लोबल इनवेस्टर्स समिट में 35 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों पर सरकार और उद्यमियों के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर हुए थे। इसमें से कानपुर के लिए करीब 85 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों पर हस्ताक्षर किए गए थे।
शहर में निवेश के सबसे 2015 करोड़ रुपये के सबसे बड़े प्रस्ताव को अमली जामा पहनाने को लेकर बीते कुछ माह से निवेशकों को पापड़ बेलने पड़ रहे हैं। यह प्रस्ताव पहले 1455 करोड़ का था। बाद भू-प्रयोग के तकनीकी कारणों से बढ़कर 2015 करोड़ का हो गया।
शहर में निवेश के इस प्रस्ताव को कानपुर पंचायत के संयोजक धर्मप्रकाश गुप्ता ने दिया था। वह किसी बड़े उद्यम के स्वामी तो नहीं हैं पर उनका कहना है कि जिस कंसोर्टियम का वह प्रतिनिधित्व करते हुए एमओयू पर हस्ताक्षर की ओर से वह ही हस्ताक्षरकर्ता हैं,उसमें 10 हजार करोड़ का निवेश करने वालों के सहमति पत्र उन्हें मिल चुके हैं।
इसमें म्योर मिल की 36 एकड़ लैंड की डील की तरफ सकारात्मक कदम सरकार बढ़ाती है तो औद्योगिक विकास के सपनों के पंख लग जाएंगे। राज्य सरकार की 2014 की नजूल पॉलिसी को लेकर भी पेच नहीं फंसा है। बकौल गुप्ता, लेटर ऑफ इंटेंट में मांगी गयी म्योर मिल की जमीन सरकार उन्हें लीज पर दे दे या फिर 2014 की नजूल पॉलिसी के तहत यह जमीन वर्तमान सर्किल रेट पर उन्हें सरकार बेच दे। जमीन खरीदने का बूता उनके कंसोर्टियम के पास है। इस बाबत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजे पत्र में सहमति पत्रों की प्रतियां और भू-परिसर नक्शा भी नत्थी किया गया है। जवाब नहीं मिला।
इस प्रस्ताव पर सीएम समेत जिलाधिकारी, उद्योग निदेशायल और उद्योग मंत्री तक को पूरे विवरण के साथ लिखा गया है। लेकिन कहीं से भी हां या न में कोई जवाब नहीं आया। कानपुर की औद्योगिक समृद्धि पर राजनीतिक इच्छा शक्ति की कमी दिखती है। कानपुर में देश का सर्वोत्तम आईटी पार्क बनाया जा सकता है। इसके अलावा कार्पोरेट और एपेरल पार्क भी स्थापित किया जा सकता है।
गुप्ता बताते हैं कि म्योर मिल की जमीन निवेशकों को मिलने में कोई अड़चन नहीं है। इसकी नजूल अवधि 1991 में ही खत्म हो गयी थी। सरकार चाहे तो लीज पर या फ्रीहोल्ड करके सर्किल रेट पर बेच सकती है। निवेशक समूह क्रय करने को तैयार है। वह कहते हैं कि सभी संबंधित विभाग इतने बड़े निवेश के प्रस्ताव पर रुचि क्यों नहीं ले रहे हैं, यह समझ से परे है।
प्रस्ताव के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं-
परिसर का क्षेत्रफल-14 लाख 81 हजार वर्गफुट
निर्माण अनुमन्य- 29 लाख वर्गफुट से अधिक
भूमि की लागत- 825 करोड़
निर्माण की लागत-580 करोड़
आधारभूत सुविधा व्यय-50 करोड़
परियोजना लागत-1455 करोड़ (अब 2015 करोड़)
बिक्री/पट्टे पर देने से आय- 2320 करोड़
परियोजना स्थापना से लाभ- 865 करोड़
सीधा रोजगार-करीब 25 हजार लोगों को
अप्रत्यक्ष रोजगार-करीब 25 हजार लोगों को
पार्किंग के लिए 10 लाख वर्गफुट भूमि मिलेगी
परिसर की छतों पर 40 मेगावाट का सोलर प्लांट
यह उद्योग पूरी तरह से प्रदूषणमुक्त है।
परिसर के चारों ओर चौड़ी सड़क है।
दोनों तरफ मेट्रो स्टेशन निर्माणाधीन हैं।
आईआईटी, एचबीटीयू जैसे विश्वस्तरीय संस्थान हैं।
इंजीनियरिंग कालेजों का संजाल है।
यूपीजीआईएस के दौरान कानपुर के विकास के किसी भी प्रस्ताव में कोई अड़चन आ रही है तो निवेशक मुझसे आकर मिलें तो, मैं हर संभव मदद को तैयार हूं। यदि प्रस्ताव में वॉयबिल्टी और फिजीबिल्टी है तो निश्चित अमल कराया जाएगा।- सत्यदेव पचौरी, सांसद
दौड़धूप और लिखापढ़ी करते-करते थक गया हूं, कोई सुनवायी नहीं होती। स्पष्ट जवाब तक अधिकारियों और संबंधित मंत्री नंदगोपाल नंदी से नहीं मिलता। एमओयू में हर संभव मदद किए जाने की बात साफतौर पर लिखी है।- धर्मप्रकाश गुप्ता हस्ताक्षरकर्ता
म्योर मिल की जमीन पर आईटी, कॉर्पोरेट और एपेरल पार्क के प्रस्ताव पर शासन स्तर पर निर्णय होना है। यह मामला मंडलायुक्त स्तर पर विचाराधीन है। औद्योगिक उपयोग किया जा सकता है पर निर्णय औद्योगिक विकास आयुक्त के स्तर से कैबिनेट को भेजकर एप्रूवल लिया जा सकता है। निवेशक शासनस्तर पर बातचीत करें।- सुधीर श्रीवास्तव उपायुक्त जिला उद्योग केंद्र
