हरदोई: रामगंगा नदी में डूबे दोनों चचेरे भाइयों का शव बरामद, गांव में पसरा मातम
हरपालपुर/हरदोई। अरवल थाना क्षेत्र के बारी गांव में शनिवार की शाम बकरी चराने गए दो चचेरे भाइयों के शव दूसरे दिन रविवार को सुबह नदी में तैरते हुए मिले। पुलिस ने दोनो शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिये है। अरवल थाना क्षेत्र के बारी गांव निवासी अर्जुन 17 वर्ष पुत्र बटेश्वर अपने चचेरे भाई अंशु 16 पुत्र गेंदालाल के साथ रामगंगा नदी के किनारे बकरी चराने गये थे।
दोनों भाइयों ने अपने कपड़े निकाल कर रामगंगा नदी के किनारे रखकर नदी में नहाने लगे। गहरे पानी में जाने के बाद दोनों अचानक डूब गए। पास में खड़े अंशु के भाई सुधांशु ने जब दोनों युवकों को नदी में डूबते देखा तो उसने दौड़ कर परिजनों को घटना की सूचना दी थी।
मौके पर पहुंचे परिजनों ने स्थानीय पुलिस को सूचना दी। घटना की सूचना मिलते ही एसडीएम सवायजपुर अभिषेक सिंह नायब तहसीलदार राजेश कुमार के साथ मौके पर पहुंच गए थे। नाव मंगवा कर दोनों की तलाश कराई गई।लेकिन सफलता नहीं मिली। रविवार की सुबह दोनों चचेरे भाइयों के शव रामगंगा नदी में तैरते हुए पाये गये। नदी में डूबने से दो चचेरे भाइयों की मौत से गांव में मातम सा माहौल है।दो दिन से दोनों घरों में चूल्हे तक नहीं जले। अरवल थानाध्यक्ष श्यामू कनौजिया ने बताया कि दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए गए हैं।
बीते एक माह में डूबने से हो चुकीं है चार मौतें, हादसों से प्रशासन नहीं ले रहा सबक
बीते एक माह में गंगा व रामगंगा नदी में चार लोगों की डूबने से मौत हो चुकी हैं। 11 मई को बेहटा मुडिया गाँव निवासी शिवांशू व केतन की रामगंगा नदी में डूबने से मौत हो गई थी। 14 मई को गंगा स्नान करने गए अरवल थाना क्षेत्र के परचौली गाँव निवासी कृष्ण मुरारी की डूबने से मौत हो गई। ठीक उसके अगले दिन मलिकापुर गाँव निवासी अबधेश सिंह की रामगंगा नदी में डूबने से मौत हो गई थी।
स्थानीय लोगों के अनुसार प्रशासन इन हादसों को रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है। यहाँ तक जब कोई घटना हो जाती है तब गोताखोरों को पडोसी जनपद कन्नौज से बुलाना पड़ता है। स्थानीय स्तर पर गोताखोर, स्टीमर आदि की व्यवस्था हो तो हादसों पर कुछ हद तक रोक लगाई जा सकती है।
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