बरेली: घोटाले की जांच में सहयोग नहीं कर रहे बैंक
बरेली, अमृत विचार। पीलीभीत में अपनी निजी फर्म के जरिए मनरेगा योजना के तहत 25 करोड़ रुपये के घोटाले में एपीओ अजय गंगवार और तीन रोजगार सेवकों की सेवाएं समाप्त कर उनको जेल भेजने के बाद अफसरों में हड़कंप मच गया है। वहीं, अब बरेली में भी ऐसा ही एक मामला चल रहा है। यहां …
बरेली, अमृत विचार। पीलीभीत में अपनी निजी फर्म के जरिए मनरेगा योजना के तहत 25 करोड़ रुपये के घोटाले में एपीओ अजय गंगवार और तीन रोजगार सेवकों की सेवाएं समाप्त कर उनको जेल भेजने के बाद अफसरों में हड़कंप मच गया है। वहीं, अब बरेली में भी ऐसा ही एक मामला चल रहा है। यहां स्वच्छता मिशन के तहत शौचालयों में हुए करीब 12 करोड़ के घोटाले में संलिप्त अधिकारी पहले दस्तावेजों में गड़बड़ी की बात कह रहे थे। अब उनके तेवर बदल गए। बैंकों से लाभार्थियों के खातों का ब्यौरा नहीं मिलने की वजह से जांच पूरी नहीं होने की बात अब कह रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि बैंक ने एक सप्ताह का समय मांगा है। इसके बाद जांच को गति मिल सकेगी।
बता दें कि वर्ष 2018-19 में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) में करीब 10 हजार शौचालयों के निर्माण को मिली करीब 12.34 करोड़ की रकम प्रधान सचिव ने विभागीय कर्मियों से साठगांठ कर लाभार्थियों के बजाए अपात्रों को बांट दी थी। घोटाला उजागर न हो इसलिए इसकी डाटा फीडिंग भी नहीं कराई गई थी। सत्यापन में फर्जीवाड़ा पकड़े जाने पर तत्कालीन डीपीआरओ चंद्रिका प्रसाद ने पिछले माह विभाग के एक लिपिक को निलंबित कर दिया था।
जांच अधिकारी डीपीआरओ धर्मेंद्र का कहना है कि इस प्रकरण की जांच में 11 बैंकों से लाभार्थियों के खातों का ब्यौरा मांगा गया है। इनमें बैंक ऑफ बड़ौदा और बड़ौदा ग्रामीण ने अब तक करीब पांच हजार लाभार्थियों के खाते की जानकारी नहीं दी है। जबकि अन्य बैंकों ने यह जानकारी उपलब्ध करा दी है। डीपीआरओ के मुताबिक, सूचनाएं देने को बैंकों की तरफ से एक सप्ताह का समय मांगा गया है। इसकी जानकारी मिलने पर ही जांच को गति मिल सकेगी।
निलंबित बाबू हो सकता है बर्खास्त
पीलीभीत की तरह यह भी घोटाले के आरोप में निलंबित किए गए बाबू को बर्खास्त किए जाने की चर्चा इन दिनों विकास भवन में जोरों पर है। हालांकि अफसर 12 करोड़ के घोटाले की जांच पूरी होने के बाद ही इस मामले में अग्रिम कार्रवाई का निर्णय लेने की बात कह रहे हैं।
