बरेली: कानूनी झोल...बरी हाे गए 80 फीसदी बेटियों के गुनहगार, जानिए पूरा मामला

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Edited By Amrit Vichar
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पॉक्सो अदालतों में मुकदमों की भरमार के बीच गवाहों के मुकरना और पुलिस का साक्ष्य पेश न कर पाना पीड़ित बेटियों पर पड़ रहा है भारी

अनुपम सिंह, बरेली। बेटियों के गुनहगारों पर सख्ती के दावे तो बहुत किए जा रहे हैं लेकिन असलियत यह है कि पॉक्सो अदालतों में 80 फीसदी तक केसों में अपराध साबित नहीं हो पा रहा है। मई में ही मंडल की अदालतों में 27 आरोपी बरी हो गए, सिर्फ 11 का ही अपराध साबित हो पाया। किसी केस में गवाह मुकर गए तो किसी में पुलिस के पर्याप्त साक्ष्य पेश नहीं कर पाई। दूसरा चिंताजनक पहलू यह है कि मंडल की पॉक्सो अदालतों पर मुकदमों का बोझ बढ़ते-बढ़ते 4727 तक पहुंच गया है। केसों के निपटारे की रफ्तार अपेक्षाकृत काफी धीमी है।

पिछले सप्ताह मंडल स्तर पर पहली बार अभियोजन की समीक्षा बैठक में पॉक्सो के केसों की परतें उधड़ीं तो अफसर भी हैरान रह गए। पॉक्सो एक्ट के तहत 18 साल से कम यानी नाबालिग लड़कियों के साथ यौन अपराध के मामले दर्ज किए जाते हैं जिनमें अपराध साबित होने का प्रतिशत काफी कम है। मई में पॉक्सो अदालतों में निपटाए गए केसों में सबसे ज्यादा खराब स्थिति शाहजहांपुर में निकली जबकि बरेली में अपेक्षाकृत ठीक है। बदायूं और पीलीभीत का भी हाल खराब है। बरेली को छोड़कर तीनों जिलों में दोषी करार दिए जाने वाले आरोपियों की तुलना में दोषमुक्त करार दिए गए आरोपियों की संख्या काफी ज्यादा है।

अभियोजन की समीक्षा में दूसरा चिंताजनक पहलू पॉक्सो अदालतों पर मुकदमो का बढ़ते बोझ का सामने आया। मई तक बरेली, बदायूं, शाहजहांपुर और पीलीभीत की पॉक्सो अदालतों में 4727 मुकदमे लंबित हैं। बताया जा रहा है कि इनमें तमाम कई साल पुराने हैं, जिनका गवाहों और साक्ष्यों के पेश न होने के साथ कई दूसरे कारणों से निस्तारण नहीं हो पा रहा है। मुकदमों की संख्या लगातार बढ़ रही है और उन बेटियों का इंतजार लगातार लंबा खिंचता जा रहा है जो अपने गुनहगारों को सख्त सजा मिलने की आस लगाए बैठी हैं।

हर केस की होगी स्टडी, डीजीसी और एडीजीसी से मांगा जाएगा जवाब
बड़ी संख्या में बेटियों के गुनहगारों के दोषमुक्त होने के मामलों में अब कारणों की तलाश कराई जाएगी। जिन केसों में आरोपी बरी हुए हैं, उनका अध्ययन कर इस बात का पता लगाया जाएगा कि आरोपियों को अपने बचाव के लिए कानूनी लाभ कैसे मिला। कमिश्नर साैम्या अग्रवाल ने एडी अभियोजन, डीजीसी और एडीजीसी सभी को इनमें से हर केस की स्टडी कर रिपोर्ट देने का आदेश दिया है।

एडी अभियोजन से कहा गया है कि मई में जिन 27 मामलों में आरोपी छूटे हैं, उन सभी के अध्ययन के साथ संबंधित डीजीसी और एडीजीसी से भी जवाब मांगें कि ऐसा कैसे हुआ। सभी केसों स्टडी के बाद जो भी कारण सामने आएंगे, उनका समाधान तलाश किया जाएगा। आगे से मजबूती के साथ कार्रवाई और पैरवी होगी, ताकि आरोपी कानूनी झोल का लाभ उठाकर बचकर न निकल पाएं।

इन बिंदुओं पर मांगी गई रिपोर्ट
-आरोपियों के कोर्ट से बरी होने के मुख्य कारण क्या रहे।
-गवाहों के मुकरने से आरोपियों का क्या कानूनी लाभ मिला।
-अभियोजन पक्ष के स्तर से तो किसी तरह की लापरवाही नहीं हुई।
-गवाहों को अपनी सुरक्षा के लिए तो किसी तरह का भय नहीं था।
-क्या सभी मामलों में समय से गवाहों की गवाही हुई या नहीं।
-ऐसा तो नहीं कि बार-बार आने की वजह से गवाह पीछे हट गए।
-थानों से समय से दस्तावेजों के पहुंचने या कोई और चूक तो नहीं हुई।

लापरवाही पर अभियोजन की भी तय होगी जिम्मेदारी
पॉक्सो के आरोपियों के बच निकलने के तलाशे जा रहे कारणों में अगर अभियोजन पक्ष की लापरवाही सामने आती है तो उनकी भी जिम्मेदारी तय की जा सकती है। यही वजह है कि इन मामलों में स्पष्टीकरण लेने का आदेश दिया गया है ताकि बेटियों का उत्पीड़न करने वाले आरोपियों के छूटने का क्रम आगे भी ऐसे ही न जारी रह सके। कहा गया है कि अगली बैठकों में अभियोजन की भी समीक्षा होगी और लापरवाही मिलने पर कार्रवाई भी प्रस्तावित की जाएगी।

मई में किस जिले में कितने आरोपी हुए बरी

जिला          दोष सिद्ध आराेपी     दोष मुक्त आरोपी
बरेली                     7                         8
शाहजहांपुर             1                         8
पीलीभीत                1                         4
बदायूं                     2                         7

पॉक्सो अदालतों में इतने केस लंबित
1326 बरेली पॉक्सो कोर्ट में, 827 पीलीभीत पॉक्सो कोर्ट में, 1323 शाहजहांपुर कोर्ट में, 1241 बदायूं पॉक्सो कोर्ट में।

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