लखनऊ : स्थानान्तरण नीति में बदलाव पर नाराज कर्मचारी संगठनों को मिला चिकित्सा स्वास्थ्य महासंघ का समर्थन
लखनऊ, अमृत विचार। स्थानान्तरण नीति में बदलाव पर नाराज कर्मचारी संगठनों को चिकित्सा स्वास्थ्य महासंघ ने अपना सर्मथन दिया है। पत्र लिखकर चिकित्सा स्वास्थ्य महासंघ ने स्थानान्तरण नीति-2023 का विरोध भी किया है।
दरअसल, उत्तर प्रदेश के कर्मचारी-शिक्षक संयुक्त मोर्चा के आहवाहन पर सभी घटक संगठनों के प्रमुख पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील की थी। यह अपील वार्षिक स्थानान्तरण नीति 2023-24 में मान्यता प्राप्त सेवा संघों के पदाधिकारियों के स्थानान्तरण के नियमों में किये परिवर्तन को निरस्त करने के लिए की गई है। कर्मचारियों ने स्थानान्तरण को लेकर सात जून को जारी हुये आदेश को लेकर भारी आक्रोश है। कर्मचारी इस बदलाव के खिलाफ गुरुवार को एक बार फिर बैठक कर आन्दोलन की रणनीत तैयार कर रहे हैं।
स्थानान्तरण नियमों में बदलावा को कर्मचारी नेताओं ने इसे लोकतंत्र पर प्रहार बताया है। बुधवार को हुई बैठक में मोर्चें के सभी घटक संगठनों के पदाधिकारियों ने एक स्वर से सरकार की कर्मचारी विरोध नीतियों पर आक्रोश व्यक्त करते कहा कि विगत 3 दशक से अधिक समय से सरकारी सेवकों के मान्यता प्राप्त सेवा संघ के अध्यक्ष,सचिव, जिनमें जिला शाखाओं के अध्यक्ष एवं सचिव भी सम्मिलित हैं के स्थानांतरण, उनके द्वारा संगठन में पदधारित करने की तिथि से 2 वर्ष तक न किए जाएं। यदि स्थानांतरण किया जाना अपरिहार्य हो तो स्थानांतरण के लिए प्राधिकृत अधिकारियों से एक स्तर उच्च अधिकारी का पूर्वानुमोदन प्राप्त किया जाए। जिला शाखाओं के पदाधिकारियों के स्थानांतरण प्रकरणों पर जिलाधिकारी की पूर्व अनुमति प्राप्त की जाए की बात कही गई है।
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