ओडीओपी: तीन सालों में 1232 आवेदन... 871 निरस्त

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Edited By Amrit Vichar
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अनुपम सिंह, बरेली, अमृत विचार। एक जिला एक उत्पाद यानी ओडीओपी रोजगार कम दे रही है, बेरोजगारों को लाचारी की हालत में ज्यादा डाल रही है। एक तरफ उद्योग विभाग साल दर साल लक्ष्य से कई गुना ज्यादा फाइलें मंजूर कर बेरोजगारों को झूठी उम्मीदें बंधाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है तो दूसरी तरफ बैंकों में उनमें से ज्यादातर चकनाचूर कर दी जा रही हैं। तीन सालों में उद्योग विभाग की ओर से मंजूर 1232 आवेदनों में से 871 को निरस्त कर दिया गया। इन आवेदनों को अगले वित्तीय वर्ष के लिए लंबित न रखे जाने से बेरोजगारों की भागदौड़ और आवेदन करने में किया गया खर्च भी बेकार चला गया।

ओडीओपी योजना के तहत सूक्ष्म एवं लघु उद्योग की श्रेणी में आने वाली औद्योगिक इकाइयां स्थापित करने के लिए बेरोजगारों को ऋण दिए जाते हैं। यह योजना 2018-19 में शुरू हुई थी। उद्योग विभाग उन्हीं बेरोजगारों के आवेदन इस योजना के तहत मंजूर करता है जो पात्रता के मानकों पर सही साबित होते हैं यानी वाकई बेरोजगार होते हैं। फिर भी साल दर साल उनके आवेदनों के खारिज होने की संख्या बढ़ती जा रही है। 

शासन से बेहद सीमित संख्या में बेरोजगारों को लाभ देने के लिए लक्ष्य तय किए जा रहे हैं, लेकिन उद्योग विभाग उसकी तुलना में कई गुना ज्यादा आवेदकों की फाइल मंजूर कर बैंकों को भेज रहा है, जहां उन्हें रद्द कर दिया जा रहा है। तीन सालों में ऐसी 871 फाइलों को बैंकों में लक्ष्य पूरा हो जाने की वजह से रद्द किया जा चुका है।

बता दें कि ओडीओपी के तहत आवेदन करने की लंबी प्रक्रिया है। बेरोजगार लोगों को योजना का लाभ लेने के लिए लंबी भागदौड़ करनी पड़ती है। दस्तावेज तैयार कराने में भी हजारों रुपये फूंकने पड़ते हैं। इसके बाद उद्योग विभाग से फाइल पास कराने के लिए न जाने कितने जतन करने पड़ते हैं। इसके बावजूद जब फाइल निरस्त हो जाती है तो उनके लिए यह किसी सदमे से कम नहीं होता। बैंकों की ओर से भी उनके आवेदन सीधे निरस्त कर दिए जाते हैं, उन्हें अगले साल के लिए लंबित भी नहीं रखा जाता। लिहाजा कोई अगर दोबारा लोन हासिल करने की कोशिश करता है तो उसे नए सिरे से भागदौड़ करनी पड़ती है।

हर साल चार गुना फाइलें निरस्त
वित्तीय वर्ष 2022-23
120 इकाइयों को तीन करोड़ का ऋण देने का लक्ष्य था। आवेदन करने वाले 455 लोग थे, इन सबकी फाइलें बैंक भेजी गईं मगर इनमें 128 ही पास हो सकीं। इनमें भी 113 इकाइयों को ही 3.21 करोड़ का लोन दिया गया। 342 फाइलें निरस्त कर दी गईं।

वित्तीय वर्ष 2021-
110 इकाइयों को 2.75 करोड़ का ऋण देने का लक्ष्य था जिसके सापेक्ष 128 इकाइयों को 3.04 करोड़ का लोन दिया गया। 408 फाइलों को निरस्त कर दिया गया।

वित्तीय वर्ष 2020-21
120 इकाइयों के लिए तीन करोड़ का ऋण देने का लक्ष्य था मगर 110 इकाइयों के लिए 171.14 लाख का लोन ही स्वीकृत हो सका। 241 में से 121 फाइलें इस साल भी निरस्त कर दी गईं।

लक्ष्य पूरा न होने के बाद भी फाइलें निरस्त
वर्ष 2020-21 के आंकड़े यह भी बता रहे हैं कि शासन से निर्धारित लक्ष्य को विभाग पूरा नहीं कर सका, फिर भी तमाम फाइलें निरस्त कर दी गईं। इस साल 120 इकाइयों को तीन करोड़ के सापेक्ष 110 उद्योगों के लिए 171.14 करोड़ का लोन स्वीकृत हुआ था, लेकिन इसके बाद भी 121 फाइलों को विभाग ने निरस्त कर दिया था। बता दें कि यह साल कोरोना के दौर में गुजरा था जिसमें बड़े पैमाने पर लोग बेरोजगार हुए थे और मजबूरी के हालात में नए रोजगार के लिए इधर-उधर भटक रहे थे। उन्हें इस योजना से कोई मदद नहीं मिल पाई।

जोड़तोड़ के बगैर फाइल मंजूर होनी मुश्किल
जिला उद्योग विभाग और बैंकों के बीच तमाम आवेदकों को लंबे समय तक चक्कर काटने पड़ते हैं। उनकी फाइलें इसके बाद भी पास नहीं होतीं। आवेदन करने वालों के ये आरोप आम हैं कि जोड़तोड़ करने के बाद ही फाइलें मंजूर होती हैं। जोड़तोड़ कामयाब हो तो आवेदक हर स्तर पर पास हो जाता है। यह भी कहा जाता है कि फाइलों को निरस्त ही इसलिए किया जाता है ताकि वे उद्योग विभाग और बैंकों में ज्यादा आवेदन लंबित न दिखाई दें।

एक महीने में मंजूरी का नियम, दो महीने बाद भी लटकी हैं तमाम फाइलें
शासन ने इस साल बरेली में 99 इकाइयों के लिए 2.97 करोड़ का लक्ष्य निर्धारित किया है। वित्तीय वर्ष शुरू होने के बाद अब तक 52 आवेदन आ चुके हैं। उद्योग विभाग 45 फाइलों को संस्तुति के साथ बैंक भेज चुका है लेकिन अब तक अलग-अलग बैंकाें से सिर्फ 10 फाइलें ही पास हुई हैं, 35 अटकी हुई है। वैसे नियम एक महीने के अंदर फाइल पास करने का है, लेकिन दो महीने बाद भी न फाइलें मंजूर हुई हैं न आवेदकों को कोई जवाब मिला है।

ओडीओपी का हर साल लक्ष्य आता है, उसी के अनुसार लाभार्थियों को लाभ दिया जाता है। लक्ष्य पूरा होने के बाद लोन स्वीकृत नहीं होते हैं। अगले वित्तीय वर्ष में पुरानी फाइलों को शामिल किया जाता है या नहीं, यह हमारे सॉफ्टवेयर पर पता नहीं चल पाता। - ऋषि रंजन गोयल, संयुक्त आयुक्त उद्योग

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