Kanpur: गुरुवाणी को किसी भी चैनल से सीधे प्रसारण का रास्ता साफ, श्रीगुरु सिंह सभा ने पंजाब की मान सरकार के फैसले को सराहा
गुरुवाणी को किसी भी चैनल से सीधे प्रसारण का रास्ता साफ।
गुरुवाणी को किसी भी चैनल से सीधे प्रसारण का रास्ता साफ। श्रीगुरु सिंह सभा ने पंजाब की मान सरकार के फैसले को सराहा।
कानपुर, अमृत विचार। श्रीगुरु सिंह सभा ने पवित्र गुरुवाणी का प्रसारण दायरा बढ़ाने और मुफ्त प्रसारण का मार्ग प्रशस्त करने के पजाब सरकार के निर्णय का स्वागत किया। सभा की अशोक नगर में हुई बैठक में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान सरकार के निर्णय का स्वागत करते हुए श्रीगुरु सिंह सभा के पदाधिकारियों ने कहा कि सिख गुरुद्वारा प्रबंधन (संशोधन) विधेयक 2023 पारित कराने का मान सरकार का फैसला सिख समाज के हित में हैं। पवित्र गुरुवाणी पूरे विश्व के किसी भी चैनल में सीधे प्रसारण के माध्यम से सुने का रास्ता लगभग साफ हो गया है।
श्रीगुरु सिंह सभा के प्रधान पूर्व एमएलसी सरदार कुलदीप सिंह ने कहा कि अब तक एक परिवार के हितों को साधने वाले एक न्यूज चैनल के पास प्रसारण का एकाधिकार था। इसी परिवार की पहल पर हुकुमनामा जारी कराकर गुरमीत रामरहीम को दोषमुक्त कराया गया था। उन्होंने कहा कि सिख समाज के विद्वतजनों के एक साथ बैठकर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी को सत्ता के प्रभुत्व और प्रलोभनों से मुक्त रखने विचार करने का वक्त आ गया है।
भ्रामक प्रचार कर रहे हैं विरोध में खड़े दल
सभा के कानपुर के प्रधान सिमरनजीत सिंह (सीए), महामंत्री प्रिंस वासु व कोषाध्यक्ष तेजितंदर पाल सिंह ने संयुक्त वक्तव्य में कहा कि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान गुरुवाणी प्रसारण को लेकर एसजीपीसी (संशोधन) एक्ट 2023 को धार्मिक मामलों में छेड़छाड़ या एक्ट का उल्लंघन नहीं कहा जा सकता। विरोध करने वाले राजनीतिक दल भ्रामक प्रचार कर रहे हैं। मान का यह प्रयास गुरुवाणी के व्यापक प्रचार और प्रसार को बल देगा। उल्लेखनीय है कि गरुवाणी प्रसारण के मान सरकार के इस फैसले को लेकर कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल, भाजपा समेत कई दल इसके विरोध में हैं।
क्यों मचा है विवाद
गुरुवाणी का विश्व में अलग-अलग टाइमजोन में प्रसारण किया जाता है। टेलीकास्टर की जिम्मेदारी पवित्रता बनाए रखने की है। एसजीपीसी ने इस पर आपत्ति जताते हुए इसे सरकारी दखलंदाजी बताया। सिख गुरुद्वारा अधिनियम 1925 का है। इसमें संशोधन का फैसला लागू करना आसान नहीं है। वर्ष 1998 से हरमंदिर साहब से इसका प्रसारण हो रहा है। वर्ष 2007 से इसके प्रसारण का अधिकार बादल परिवार के स्वामित्व वाले पीटीसी नेटवर्क के पास है। पीटीसी स्वर्ण मंदिर से प्रसारण की एवज में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (एसजीपीसी) को हर साल 2 करोड़ रुपये देता है। पीटीसी नेटवर्क का कहना है कि वो दुनिया भर में SGPC के कार्यक्रमों को अलग से भी प्रसारित करता है, वो इसमें कुल मिलाकर 10 से 12 करोड़ रुपये कवरेज और टेलीकॉस्ट पर खर्च करता है। एसजीपीसी और पीटीसी नेटवर्क का कॉन्ट्रैक्ट जुलाई 2023 में खत्म हो रहा है। मान सरकार टेंडर प्रक्रिया दोबारा शुरू नहीं करना चाहती है. बल्कि जो कोई भी चैनल पवित्र गुरुबाणी को प्रसारित करना चाहता है, वो उसे इसकी इजाजत देने के पक्ष में है।
