बरेली: तीन दिन बाद टीसी और अनुचर के निलंबन का आदेश जारी, जानें पूरा मामला

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Edited By Amrit Vichar
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जांच और निलंबन का आदेश रुकवाने को मेयर से मिले थे कर्मचारी

बरेली, अमृत विचार। नगर निगम में भारी भरकम टैक्स को हल्का करने में मिलीभगत की जांच में निलंबन आदेश जारी नहीं करने पर नगर आयुक्त ने नाराजगी जाहिर की। इसके बाद टीसी और अनुचर को निलंबित करने का आदेश जारी कर उन्हें जोन -1 में संबद्ध किया गया है। कर्मचारी निलंबन का आदेश रुकवाने के लिए मेयर डॉ. उमेश गौतम से भी मिले थे।

नगर निगम के टैक्स विभाग में तमाम अनियमितताएं हैं। बरसों से सीट पर जमे अफसर और कर्मचारी की निष्पक्ष जांच नहीं होने पर कई घपले सामने नहीं आ पाए हैं। मार्च में अमृत विचार ने टैक्स विभाग में गड़बड़ी उजागर की थी। नगर आयुक्त निधि गुप्ता वत्स ने मामले की जांच करवाई तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए थे। जोन- 2 का टीसी जोन-4 की टैक्स की फाइल को लोड करवाने कंप्यूटर ऑपरेटर तक पहुंच गया था। प्रकरण की जांच हुई तो पता चला कि राजेन्द्र नगर में सी-43 की आईडी संख्या 079932 का वार्षिक मूल्यांकन 309118 की जगह 14686 कर दिया गया। इसके लिए फाइल पर फर्जी ड्राफ्टिंग की गई। राजस्व निरीक्षक के फर्जी हस्ताक्षर बनाकर फाइल तैयार कर दी गई थी। 

वार्षिक मूल्यांकन कम होने से टैक्स की रकम भी 11 लाख 29 हजार रुपये कम हो गई। इसके बाद शेष 45 हजार 850 रुपये जमा दिखा दिये गये। दो माह की जांच और संबंधित कर्मचारियों के बयान दर्ज करने के बाद अफसरों की भी लापरवाही सामने आई और टीसी विशाल जौहरी और अनुचर सोमपाल को निलंबित करने की संस्तुति नगर आयुक्त ने की, लेकिन तीन दिन तक निलंबन आदेश जारी नहीं किया गया।

इस बीच निलंबित कर्मचारियों के साथ टैक्स विभाग के कर्मचारी बीते दिनों मेयर से मिले और उनसे जांच और निलंबन आदेश रुकवाने का आग्रह किया। मेयर डाॅ. उमेश गौतम ने भी टैक्स विभाग की अनियमितताओं पर नाराजगी जाहिर की थी। नगर आयुक्त के निर्देश के बाद भी निलंबन आदेश जारी नहीं होने पर उन्होंने सीटीओ से जवाब तलब कर लिया। इसी के बाद दोनों कर्मचारियों का निलंबन आदेश जारी कर उन्हें जोन-1 कार्यालय में संबद्ध कर दिया गया है।

निगम ने भूल सुधार की अब बिल हुआ 15 लाख
बरेली: नगर निगम के जोन चार के राजेन्द्र नगर के हरिओम गुगल्यानी के आवास पर व्यावसायिक गतिविधि हो रही थी। इस आधार पर निगम के अभिलेखों में उनके आवास सी-43 का वार्षिक मूल्यांकन 309118 रुपये दिखाया गया था। इसी आधार पर हर साल उनका टैक्स बिल निकल रहा था। वर्ष 2018 में उनका बिल 5 लाख 35 हजार 165 रुपये था। यह जमा नहीं किया गया तो 2018-19 में एक लाख 32 हजार 225 रुपये और जुड़ गया।

वर्ष 2021-22 तक कोई बिल जमा नहीं किया गया और फरवरी 2023 में निगम के राजस्व को चूना लगाने वाले कर्मचारियों और अफसरों की मिलीभगत से टैक्सदाता से नकद 45 हजार 850 रुपये जमा कराए गए और उसी माह वार्षिक मूल्यांकन को 14,686.65 रुपये करते हुए इसी आधार पर 11 लाख 29 हजार 69 रुपये कम कर दिये गये। जांच के बाद जब मामला खुला तो 31 मार्च को मुख्य कर निर्धारण अधिकारी के आदेश के बाद निगम ने माना कि त्रुटिपूर्ण ढंग से किये गये संशोधन का सुधार करते हुए बिल को पूर्ववत वार्षिक मूल्यांकन अनुसार किया गया है। इस तरह हरिओम गुल्यानी का बिल पहले की तरह ही चलता रहेगा और चालू वित्तीय वर्ष में उनका बिल 15 लाख 56 हजार 849 रुपये हो गया है।

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