अयोध्या: विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव ने जिला कारागार का किया निरीक्षण
अयोध्या। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के प्लान आफ एक्शन के अनुपालन में मंगलवार को जिला कारागार का निरीक्षण व विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष जनपद न्यायाधीश ज्ञान प्रकाश तिवारी के मार्गदर्शन में प्रशिक्षु न्यायिक अधिकारी अंशुमान यादव के साथ ही प्राधिकरण सचिव सुमन तिवारी भी इसमें शामिल …
अयोध्या। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के प्लान आफ एक्शन के अनुपालन में मंगलवार को जिला कारागार का निरीक्षण व विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष जनपद न्यायाधीश ज्ञान प्रकाश तिवारी के मार्गदर्शन में प्रशिक्षु न्यायिक अधिकारी अंशुमान यादव के साथ ही प्राधिकरण सचिव सुमन तिवारी भी इसमें शामिल रहीं। इसके अलावा जिला कारागार के अधिकारी, कर्मचारी तथा बन्दीगण उपस्थित रहे।
निरीक्षण के समय कुल 1079 बन्दी जेल निरूद्ध पाये गये, जिसमें अयोध्या जनपद के 980 पुरूष बन्दी, 51 महिला बन्दी एवं 39 अल्प व्यस्क बन्दी थे। निरीक्षण के समय पाकशाला का निरीक्षण किया गया जिसमें रोटियां बनायी जा रही थीं। पाकशाला में सफाई व्यवस्था ठीक पायी गयी। इसके पश्चात बैरक का भी निरीक्षण किया गया। बैरक में साफ-सफाई पायी गयी। पूछे जाने पर किसी बन्दी ने कोई समस्या नहीं बताया।
कोविड-19 को दृष्टिगत रखते हुए बन्दियों की सुरक्षा के लिए मास्क लगाने, सेनिटाइज कराने व बचाव के अन्य उपाय सामाजिक दूरी बनाये रखने आदि का अनुपालन कराये जाने के संबन्ध में अधीक्षक, जिला कारागार को निर्देशित किया गया। अधीक्षक जिला कारागार को कारागार परिसर की साफ-सफाई एवं समय-समय सेनिटाइजेशन कराने हेतु भी निर्देशित किया गया।
इसके पश्चात विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। प्राधिकरण सचिव ने बताया कि शिविर का उद्देश्य जेल में निरूद्ध बन्दियों को विधिक जानकारी प्रदान किया जाना है तथा किसी भी बन्दी को प्रत्येक दशा में न्याय प्राप्त हो। उन्होंने कहा यदि किसी के पास अधिवक्ता की सुविधा उपलब्ध नहीं है तो उसे जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा अपने मुकदमे की पैरवी हेतु निःशुल्क अधिवक्ता की सुविधा प्रदान की जाती है।
प्राधिकरण सचिव ने बताया कि जेल में लीगल एड क्लीनिक की स्थापना की गयी है जिससे किसी बन्दी को कोई समस्या हो तो वह जेल में स्थापित लीगल एंड क्लीनिक के माध्यम से कानूनी सहायता प्राप्त कर सकता है। यदि किसी बन्दी की कोई समस्या हो और उसका निराकरण न हो पा रहा हो तो वह प्रार्थना पत्र लिखकर जानकारी दे सकता है और उसकी समस्या का निराकरण नियमानुसार अवश्य किया जायेगा।
