बरेली: नजूल संग अक्षर विहार तालाब की भूमि भी कराई थी फ्रीहोल्ड
बरेली, अमृत विचार। नजूल भूमि के साथ अक्षर विहार तालाब की करीब (4000 वर्ग मीटर) भूमि फ्रीहोल्ड कराकर बेचने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। साठगांठ कर कितनी भूमि तालाब की बेची गई, इसमें कौन अधिकारी-कर्मचारी शामिल रहे, इसकी तह तक पहुंचने के लिए कई माह से जांच चल रही है। पुरानी फाइलों …
बरेली, अमृत विचार। नजूल भूमि के साथ अक्षर विहार तालाब की करीब (4000 वर्ग मीटर) भूमि फ्रीहोल्ड कराकर बेचने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। साठगांठ कर कितनी भूमि तालाब की बेची गई, इसमें कौन अधिकारी-कर्मचारी शामिल रहे, इसकी तह तक पहुंचने के लिए कई माह से जांच चल रही है।
पुरानी फाइलों की पड़ताल में धीरे-धीरे परतें खुल रही हैं। जांच में अब मालूम हुआ है कि 21 साल पहले वर्ष 1999 में जो नजूल भूमि (6500 वर्ग मीटर) फ्रीहोल्ड कराकर पांच लोगों को बेची गई थी। उसमें तालाब की भूमि भी फ्रीहोल्ड कराई गई थी। उस वक्त तालाब की भूमि को बेचे जाने पर रोक संबंधी कोई शासनादेश प्रभावी नहीं था।
वर्ष 1998 में नजूल भूमि को फ्रीहोल्ड कराकर बेचने की नीति आने के दो-तीन साल बाद तालाब, पोखर की भूमि बेचने पर रोक लगाई गई थी। इसी का फायदा उठाकर तालाब की भूमि बेच दी गई लेकिन वर्ष 1999 में कराई गई फ्रीहोल्ड की सभी फाइलें अभी तक नहीं मिली हैं। रिकार्ड रूम में तीन फाइलों को ढूंढा जा रहा है। ये फाइलें मिलने के बाद तालाब और नजूल भूमि के रकबे की सही स्थिति मालूम हो जाएगी।
बताते हैं कि नजूल भूमि समेत अक्षर विहार तालाब की करीब 13000 वर्ग मीटर भूमि थी। इसमें एक और सवाल खड़ा हो रहा है, क्या तालाब की भूमि में से ही सड़क को भूमि दी गई थी। अधिकारी बताते हैं कि पांचों फाइलों के मिलने के बाद उनका वर्ष 2012-13 में फ्रीहोल्ड कराकर बेची गई करीब 4000 वर्गमीटर भूमि की फाइल से मिलान कराया जाएगा।
इसके बाद पूरे रकबे की पैमाइश कराई जाएगी। दोनों फ्रीहोल्ड की फाइलों के मिलान में रकबा कम मिला तो 21 साल पहले कराए गए फ्रीहोल्ड को रद कराने की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। बता दें कि पूर्व में हुई जांच के दौरान तालाब की करीब एक हजार वर्ग मीटर भूमि बेचने का मामला सामने आ चुका है। अपर जिलाधिकारी वित्त के नेतृत्व में टीम जांच कर रही है।
वर्ष 1999 में फ्रीहोल्ड कराई गई भूमि की दो फाइलें मिल चुकी हैं। तीन फाइलें रिकार्ड रूम में ढूंढी जा रही हैं। अब तक की जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि वर्ष 1999 में ही नजूल भूमि के साथ तालाब की भूमि फ्रीहोल्ड कराकर बेची गई। मामले की जांच जारी है। तीन फाइलों के मिलने के बाद तालाब की भूमि की सही स्थिति मालूम होगी। -मनोज कुमार पांडेय, अपर जिलाधिकारी वित्त
