बरेली: स्कूल खुल गए पर 14 स्कूलों का नहीं हो सका कायाकल्प, योजना में 50 लाख के होने है काम

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Edited By Amrit Vichar
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ठेकेदारों को नहीं मिला पुराना बकाया, तीन बार निकाला जा चुका है टेंडर, कुछ टेंडर आए हैं जो खुलने बाकी हैं

बरेली, अमृत विचार : नगर निगम की वित्तीय हालत का असर कामों पर पड़ रहा है। यही वजह है कि स्कूल खुलने के बाद भी 14 का कायाकल्प नहीं हो पाया है। तीन बार टेंडर निकालने के बाद भी कोई ठेकेदार काम करने को राजी नहीं हो रहा है।

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कायाकल्प योजना के तहत अफसर ठेकेदारों से काम करने का आग्रह कर रहे हैं लेकिन पुराना बकाया भुगतान नहीं होने से कर्जदार हो चुके ठेकेदार अब और रकम फंसाने को तैयार नहीं हैं। फिर से टेंडर निकालने पर कुछ ठेकेदारों ने निविदाएं डाली हैं लेकिन अभी यह खोली नहीं गई हैं।

शहरी इलाके के बेसिक स्कूलों में सुधार के लिए नगर निगम ने लगभग 50 लाख रुपये के काम कराने के लिए टेंडर निकाले हैं। इनमें प्राथमिक विद्यालय खुर्रम गौटिया में दिव्यांग शौचालय, प्राथमिक विद्यालय परतापुर चौधरी में बालक मूत्रालय व दिव्यांग शौचालय, बिहारीपुर करोलान में कंपोजिट विद्यालय की मरम्मत, भूड़ प्राथमिक विद्यालय में मरम्मत के काम होने हैं।

इसके अलावा उच्च प्राथमिक विद्यालय हरुनगला द्वितीय में कायाकल्प, माॅडल टाॅउन स्थित प्राथमिक विद्यालय कांकरटोला में मरम्मत के काम होने हैं। प्राथमिक विद्यालय खलीलपुर प्रथम, प्राथमिक विद्यालय रहपुरा चौधरी, प्राथमिक विद्यालय परसाखेड़ा प्रथम और द्वितीय, प्राथमिक विद्यालय गोविंदापुर, कंपोजिट विद्यालय रोठा, नगर निगम परिसर में प्राथमिक स्कूल के बराबर क्षतिग्रस्त कमरे की मरम्म्त, रंगाई पुताई व छत पर स्लैब डालने के कार्य के लिए टेंडर निकाले हैं लेकिन अभी तक कोई ठेकेदार इन्हें लेने आगे नहीं आया है।

ठेकेदारों का कहना है कि उनके करोड़ों रुपये पिछले बकाया हैं। भुगतान नहीं हो रहा है। अफसर भी कुछ बताने की स्थिति में नहीं है। ठेकेदार कर्ज में दबते जा रहे हैं। हर महीने बैंक के कर्ज की किश्त निकालनी मुश्किल हो रही है। ऐसे में निगम के काम में दोबारा पैसा फंसाने की स्थिति नहीं है।

स्कूल खुलने के बाद भी काम कराए जाएंगे। ठेकेदार काम करने को राजी हैं। प्रक्रिया के तहत कार्य कराने की तैयारी है। -निधि गुप्ता वत्स, नगर आयुक्त

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