पीलीभीत: 13 साल पुराने मामले में अब दरोगा और सिपाहियों पर चलेगा हत्या का मुकदमा..जानिए मामला
पीलीभीत, अमृत विचार। पुलिस अभिरक्षा में 13 साल पहले गांव जार कल्लिया निवासी अनुसूचित जाति के रामपाल की पिटाई के बाद हुई मौत के मामले में विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट महेशानंद झा ने दरोगा, तीन सिपाही व तीन ग्रामीणों के विरुद्ध पूर्व में लगाए गए आत्महत्या को प्रेरित करने के आरोपों (चार्ज) को संशोधित कर हत्या की धाराओं में आरोप विरचित के आदेश दिए हैं। हत्या की धाराओं में आरोप लगने के बाद दरोगा, सिपाहियों समेत तीनों ग्रामीणों पर रामपाल हत्याकांड में कत्ल की धाराओं में मुकदमा चलेगा।
बरखेड़ा थाने की पुलिस चौकी करोड़ की पुलिस ने एक लड़की भगाने के आरोप में 13 अगस्त 2010 को गांव जार कल्लिया निवासी अनुसूचित जाति के रामपाल को असम चौराहा से गिरफ्तार कर लिया। करोड़ चौकी में बंद कर बुरी तरह मारा पीटा, मरणासन्न अवस्था में रामपाल के गले में रस्सी का फंदा डालकर खींचा। रामपाल को गंभीर अवस्था में शहर के एक निजी अस्पताल में 15 अगस्त 2010 को भर्ती कराया।
रात में ही रामपाल को राममूर्ति अस्पताल बरेली भेजा गया। जहां इलाज के दौरान 38 वें दिन उसकी मौत हो गई। 24 सितंबर 2010 को शव का पोस्टमार्टम हुआ। मृतक रामपाल के भाई परमवीर ने घटना की रिपोर्ट दर्ज कराई। रिपोर्ट के अनुसार करोड़ चौकी इंचार्ज महेश बाबू शर्मा ने रामपाल को छोड़ने के बदले 25 हजार रुपये मांगे। रुपये न मिलने पर जिस लड़की को भगाने का आरोप था। उसके परिवार वालों को जहूर बख्श, मोहम्मद आरिफ और शेर बहादुर के उकसाने पर रामपाल को कमरे में बंद करके दरोगा और सिपाहियों ने बेरहमी से मारा।
पुलिस ने चौकी पर दूध देने वाले कन्हैयालाल की ओर से रामपाल के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली कि रामपाल ने चौकी के अंदर गर्दन में फंदा लगाकर आत्महत्या करने का प्रयास किया। विवेचना के बाद दरोगा महेश बाबू शर्मा, सिपाही जितेंद्र सिंह, गोविंद सिंह, रामप्रकाश व गांव जारकल्लियां निवासी मोहम्मद आरिफ और शेर बहादुर के खिलाफ रामपाल को आत्महत्या को उकसाने, मारपीट करने सहित एससी-एसटी एक्ट की धाराओं में आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया गया।
न्यायालय ने इन्हीं धाराओं (आरोप पत्र वाली) में आरोप लगाकर मामले की सुनवाई शुरू की। वादी सहित अन्य गवाहों के बयान भी अंकित किए जा चुके हैं। अभियोजन पक्ष की ओर से न्यायालय में प्रार्थना पत्र देकर कहा गया कि रामपाल की मौत पुलिस कस्टडी में हुई है। यह सीधा-सीधा हत्या का मामला है। आरोपी पुलिसकर्मी होने के कारण विवेचक ने जानबूझकर हल्की धाराओं में चार्जशीट न्यायालय में दाखिल की है।
मामले की सुनवाई के बाद स्पेशल जज महेशानंद झा ने आदेश दिया है कि सभी आरोपियों के खिलाफ हत्या व हत्या में सहयोग करने की धाराओं में मुकदमा चलाया जाएगा। अगली सुनवाई 13 जुलाई 2023 को होगी। हत्या की संशोधित धाराओं में अभियुक्तों के विरुद्ध आरोप विरचित किया जाएगा। उसके बाद राज्य सरकार की ओर से साक्ष्य प्रस्तुत किया जाएगा।
न्यायालय ने माना, पुलिस ने की साक्ष्य छिपाने की कोशिश
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने माना कि जानबूझकर महेश बाबू शर्मा द्वारा रामपाल को सदर अस्पताल की जगह प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया और उस अस्पताल में रामपाल की कोई आघात आख्या तैयार नहीं की गई। विवेचना के दौरान इस मामले में उस अस्पताल के मेडिकल प्रपत्रों को भी शामिल नहीं किया गया।
16 अगस्त 2010 को पुलिस द्वारा तैयार किए गए आघात आख्या में जानबूझकर रामपाल के शरीर पर आई चोटों का गोपन (छिपाया) किया गया। 24 सितंबर 2010 को सरकारी अस्पताल पीलीभीत में रामपाल की पोस्टमार्टम रिपोर्ट की कार्रवाई में उसके शरीर पर चोटें पाई गईं। निश्चित ही रामपाल के शरीर पर यह चोटें मृतक द्वारा स्वयं कारित नहीं की गईं थी। अस्पताल में भर्ती होने के बाद भी यह चोटें नहीं आ सकतीं।
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