Fatehpur Power Crisis : 18 घंटा के बजाय बमुश्किल छह से सात घंटा मिल रही लाइट, गर्मी में ग्रामीण परेशान

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Edited By Amrit Vichar
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फतेहपुर में 18 घंटा के बजाय बमुश्किल छह से सात घंटा लाइट मिल रही।

फतेहपुर में 18 घंटा के बजाय बमुश्किल छह से सात घंटा लाइट मिल रही। बिजली न मिलने से नलकूप ठप पड़े होने से धान रोपाई का काम रुका है।

फतेहपुर, अमृत विचार। अंधाधुंध बिजली कटौती से ग्रामीणांचल की आपूर्ति लड़खड़ा गई है। योगी सरकार बिजली देने के दावे धरातल पर नजर नहीं आ रहे हैं। हाल यह है कि ग्रामीणांचल में महज छह से सात घंटे की बत्ती मिल पा रही है। वह भी टुकड़ों में। ऐसे में सिंचाई से लेकर हरेक तरह की बिजली चालित गतिविधिया एक तरीके से ठहर सी गई हैं। रुक रुक हो रही बरसात व उमस भरी गर्मी में बिजली विभाग, उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं देने में नाकाम हो रहा है।

असोथर उपकेंद्र के नरैनी फीडर की पिछले एक पखवारे से जारी बेतहाशा कटौती ने लोगों का सुख चैन छीन लिया है। दिन में अंधाधुंध कटौती से जरूरी काम प्रभावित हो रहे हैं तो रात में बिजली न रहने से नींद पूरी नहीं हो रही है।

हाल यह है कि मनमानी कटौती से शेड्यूल का कोई मतलब नहीं रह गया है। एक बार बिजली चली गई तो कब आएगी। कोई भरोसा नहीं किया जा सकता है। पूरे इलाके में मुश्किल से छह से सात घंटे बिजली मिलने से जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया है।

धान की रोपाई नहीं हो पा रही

असोथर क्षेत्र में मंसूरी, एमटीयू 6729 धान की पैदावर होती है। 12 से 15 क्विंटल प्रति बीघा उपज होती है। चूंकि इधर सिंचाई की सुविधा पर ऐन वक्त पर सवाल खड़े हो जाते हैं। ऐसे में तिरहार के अन्नदाता को दुश्वारियों का सामना करने के साथ नुकसान उठाना पड़ रहा है। अब तक धान की आधी रोपाई हो जानी चाहिए लेकिन अभी इसकी शुरूआत ही हो सकी है। यह फसल समय न लगने और पानी न मिलने से प्रभावित हो रही है। इससे इधर कुछेक साल में उपज में किसानों को हरेक बीघा कम से कम तीन से चार क्विंटल धान कम पैदा हो रहा है। 

उपकरण शो पीस, मोबाइल चलाने के भी लाले

असोथर क्षेत्र में बिजली की कमतर आपूर्ति ने हरेक सेक्टर पर प्रभाव डाला है। कल कारखाना बंद से हो गए हैं। घरो में रखे फ्रिज, एयरकंडीशनर, वाशिंग मशीन, एलईडी शो पीस बने नजर आ रहे हैं। इस वक्त दिन में सुबह 11 बजे से शाम छह बजे और रात में 12 बजे तक बिजली आपूर्ति की आवाजाही लगातार बनी रहती है। निर्धारित समय के अलावा घंटों कटौती किया जाना आम बात बनकर रह गई है।एक बात और आपूर्ति के समय लोकल फाल्ट हो गया तो दिन भर बिजली के दर्शन नहीं होते। लो वोल्टेज के चलते बिजली रहने ना रहने का कोई मतलब नहीं। लगातार बदतर हो रही स्थिति से लोग काफी गुस्से में हैं। ग्रामीण इलाको में सबसे ज्यादा दिक्कत पानी की है।

कर्मचारियों की कमी, संविदा कर्मियों ने संभाली कमान

असोथर क्षेत्र में केवल दो कर्मचारियों के भरोसे चल रहा जर्जर नरैनी फीडर, वर्षो पुरानी जर्जर तार आएं दिन टूट रही हैं। उसको ठीक करने के लिए केवल दो लाइनमैन के भरोसे पूरा फीडर चल रहा है। जबकि इसी फीडर से यमुना तटवर्तीय सरकंडी, सैबंसी व सातों धरमपुर, जोगा, मनावां, कौंडर, पुरबुजुर्ग, सुजानपुर, विधातीपुर समेत अन्य गांवों की बिजली इसी जर्जर फीडर के भरोसे चल रही हैं। रात्रि में कभी अगर किसी गांव में ट्रांसफार्मर में आग लग जाती है तो कभी कोई और फाल्ट। ऐसे में रात को बत्ती गुल होने के बाद इसके आसार एक तरह से खत्म हो जाते हैं। बिजली कटौती की शिकायत लेकर शाम के बाद शायद ही कोई फाल्ट बने ,यही हाल जिम्मेदार अधिकारियों के जिनके सीयूजी नंबर का है, जो अधिकतर स्विच ऑफ या नॉट रीचबल रहता है।

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