बजट का इंतजार : Kanpur में जेके कैंसर बीमार, सड़क पर मरीजों की कतार, ओपीडी बंद होने पर रोगी तड़पते

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Edited By Amrit Vichar
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कानपुर में जेके कैंसर संस्थान में दर्द से तड़पते हुए जमीन में लेटकर रात गुजारने को मजबूर मरीज।

कानपुर में जेके कैंसर संस्थान बीमार हो गया है। अस्पताल के बाहर सड़क पर मरीजों की कतार लगी है। संस्थान में इमरजेंसी के साथ पैथोलॉजी की सुविधा भी नहीं है।

कानपुर, [विकास कुमार]। कभी प्रदेश के साथ दिल्ली, मध्यप्रदेश व बिहार से आने वाले कैंसर के मरीजों का इलाज करने वाला जेके कैंसर संस्थान इस समय खुद बीमार चल रहा है। यहां अब केवल ओपीडी में आने वाले मरीजों को ही परामर्श दिया जाता है। ओपीडी का समय खत्म होने के बाद आने वाले मरीजों को इलाज के लिए भटकना पड़ता है। इमरजेंसी सुविधा नहीं होने से तीमारदार मरीज को लेकर परिसर में ही रात काटने को मजबूर रहते हैं। 

रावतपुर स्थित जेके कैंसर संस्थान में एक समय मरीजों की भीड़ से बेड कम पड़ जाते थे। संस्थान में उत्तर प्रदेश, दिल्ली, मध्यप्रदेश व बिहार तक से मरीज कैंसर का इलाज कराने आते थे, लेकिन वर्तमान में संस्थान में न तो मरीजों की सभी जांच हो पा रही हैं और न ही भर्ती मरीजों को पूरी चिकित्सा सुविधाएं मिल रही हैं। सिर्फ ओपीडी में आने वाले औसतन 200  मरीजों को परामर्श दिया जाता है।

सीटी स्कैन, एमआरआई, एक्सरे व अन्य जांचों के लिए मरीजों को हैलट अस्पताल या निजी डायग्नोस्टिक सेंटर भेज दिया जाता है। इसकी वजह यह है कि मशीनों की मरम्मत और रखरखाव के लिए  शासन से हर साल मिलने वाला एक करोड़ रुपये का बजट दो साल से नहीं मिला है।  अस्पताल प्रशासन के मुताबिक संस्थान को पहले तीन से चार करोड़ रुपये का बजट मुहैया होता था।

अब संस्थान में सिर्फ रेडिएशन और कीमोथेरपी की सुविधा ही मरीजों को मिल रही है। ओपीडी का समय खत्म होने पर इमरजेंसी की सुविधा नहीं है। इस जानकारी के अभाव में आने वाले मरीजों को दर्द से तड़पना पड़ता है। उन्नाव, मैनपुरी, इटावा, जालौन, हमीरपुर आदि जिलों से आने वाले मरीज दूसरे दिन इलाज मिलने की आस में परिसर में लेटकर ही रात बिताते हैं। 

सर्जरी व पैथोलॉजी की सुविधा नहीं 

संस्थान में कैंसर मरीजों की सर्जरी की व्यवस्था नहीं है। सर्जरी के मरीजों को हैलट अस्पताल, निजी अस्पताल और लखनऊ  व दिल्ली जाने की सलाह दी जाती है। यहां तक कि मुंह के कैंसर के मरीजों को हैलट अस्पताल भेजा जा रहा है।  पैथोलॉजी नहीं होने से मरीजों की कई जरूरी  जांचें नहीं हो पाती हैं।  

अस्पताल में सर्जरी व पैथोलॉजी की सुविधा मरीजों की नहीं मिल पा रही है। फंड नहीं होने से मशीनों का संचालन बंद पड़ा है। संस्थान में मौजूद 14 डॉक्टर मरीजों को परामर्श देते हैं और वार्ड में भर्ती मरीजों का इलाज करते हैं। बजट की मांग के लिए महानिदेशक चिकित्सा को कई बार पत्र लिखा गया है।- डॉ. एसएन प्रसाद, निदेशक, जेके कैंसर संस्थान

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