चंद्रमा की संरचना का रहस्य खोजेंगे IIT Kanpur के विशेषज्ञ, चंद्रयान-3 मिशन में इसका लगाएंगे पता

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चंद्रमा की संरचना का रहस्य खोजेंगे आईआईटी कानपुर के विशेषज्ञ।

चंद्रमा की संरचना का रहस्य आईआईटी कानपुर के विशेषज्ञ खोजेंगे। चंद्रयान-3 मिशन में पानी, गैस व अन्य तत्वों का पता लगाएंगे। मिशन के अंतर्गत चांद के दक्षिणी पोल पर लैंडर उतारा जाएगा।

कानपुर, [शशांक शेखर भारद्वाज]। सूचना प्रौद्योगिकी, चिकित्सा, कृषि, शोध कार्यों और उद्यमिता विकास के क्षेत्र में दुनिया भर में कामयाबी का परचम लहरा चुके आईआईटी कानपुर के नाम एक और उपलब्धि जुड़ने वाली है। यहां के विशेषज्ञ भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के चंद्रयान -3 मिशन में अपने अनुभव और योग्यता से चंद्रमा की संरचना का रहस्य खोजेंगे। वह चंद्रमा पर पानी, गैस और अन्य तत्वों का पता लगाएंगे। उनका यह शोध खगोल शास्त्र और अंतरिक्ष अभियान में नई क्रांति ला सकता है। इसरो के विशेषज्ञों के साथ ही आईआईटी की टीम रॉकेट की लांचिंग को लेकर तैयार है। 

चंद्रयान -3 मिशन का काउंट डाउन शुरू हो गया है। इस मिशन पर विकासशील देशों के साथ विकसित देशों ने भी टकटकी लगा रखी है। मिशन की सफलता देश के लिए कामयाबी के नए रास्ते खोलेगी। अब तक अमेरिका, रूस और चीन ही चंद्रमा की सतह पर यान उतरने में सफल हो सके हैं। चंद्रयान -3 की लांचिंग 14 जुलाई को 2.35 बजे आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित अंतरिक्ष केंद्र से की जाएगी।

मिशन से आईआईटी कानपुर के अर्थ साइंस विभाग के प्रो. दीपक ढींगरा जुड़े हुए हैं। वह चंद्रमा के कंपोजिशन (पृथ्वी की रचना) का पता लगाएंगे। उनके पास चंद्रमा के अध्ययन का काफी अनुभव है। उन्होंने चंद्रमा की सतह के खनिज विज्ञान और उससे संबंधित भूगर्भिक संदर्भ को चिह्नित करने के लिए विभिन्न प्रकार के रिमोट सेंसिंग डेटा के साथ काम किया है। चंद्रमा पर चमकीले अल्बेडो जमा (भंवर), उच्च टाइटेनियम बेसाल्ट और एक नए रॉक-प्रकार (एमजी-स्पिनल एनोर्थोसाइट) के अध्ययन में भी उनका योगदान है।

कई बिंदुओं पर की जाएगी खोज 

प्रो. दीपक ढींगरा के मुताबिक चंद्रयान-3 में कई बिंदुओं पर खोज की जाएगी। लैंडर को चंद्रमा के दक्षिणी पोल पर उतारा जाएगा। वहां के वातावरण, मिट्टी और अन्य जगहों पर कौन सी धातु है। पानी की उपब्धता किस रूप में है। वहां कौन सी गैसें हैं और वह किसके साथ जुड़ी हुई हैं। मेटल्स के कण कैसे हैं, इन सब पर विस्तार से कार्य किया जाएगा। उनका यह शोध इसरो के सहयोग से किया जा रहा है। 

अंतरिक्ष अभियान में आएगी नई क्रांति

आईआईटी विशेषज्ञ ने बताया कि चंद्रयान -3 के बाद अंतरिक्ष अभियान में नई क्रांति आएगी। भारत के लिए यह बड़ी उपलब्धि होगी। कई स्टार्टअप इस पर तैयार हो चुके हैं, जो अच्छा कार्य कर रहे हैं। उपग्रहों की लांचिंग में कई निजी कंपनिया भी आगे आई हैं। यह देश की तकनीक के लिए अच्छी बात है।

चंद्रयान 2 में आईआईटियंस की भूमिका 

22 जुलाई 2019 को लांच हुए चंद्रयान-2 मिशन में भी आईआईटी कानपुर के विशेषज्ञों की अहम भूमिका रही थी। इसमें मैप जनरेशन और पॉथ प्लानिंग का पूरा सिस्टम संस्थान में ही तैयार हुआ था। कई अहम उपकरण भी यहीं विकसित किए गए थे। मिशन से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के प्रो. केए वेंकटेश और मैकेनिकल इंजीनियरिंग के प्रो. आशीष दत्ता जुड़े थे

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