अयोध्या: गुप्तार घाट की व्यवसाय योजना पड़ी खटाई में, जानें वजह
आवंटित होने वाली 30 दुकानों का मामला पहुंचा हाईकोर्ट
अयोध्या/अमृत विचार। गुप्तारघाट में अयोध्या विकास प्राधिकरण की व्यवसायिक योजना में दुकानों के आवंटन की प्रक्रिया का मामला उच्च न्यायालय इलाहाबाद खंडपीठ लखनऊ में रिट याचिका दाखिल होने के बाद अधर में पड़ गया है।
भगवान श्री लक्ष्मी नरसिंह मंदिर के सर्वराहकार चतुर्भुज दास की ओर से फैजाबाद के सिविल कोर्ट में दीवानी वाद दायर किया गया था, जिसमें न्यायालय ने स्थगन आदेश पारित किया बावजूद इसके विकास प्राधिकरण के कर्मचारी विवादित स्थल पर तोड़फोड़ करके न्यायालय के आदेश की अवमानना किया। वादी मुकदमा चतुर्भुज दास ने अयोध्या विकास प्राधिकरण सहित कई अन्य जिले के प्रशासनिक अधिकारियों के विरुद्ध न्यायालय के आदेश की अवहेलना के संबंध में कंटेम्पट का वाद दायर किया।
न्यायालय में मुकदमा विचाराधीन होते हुए अयोध्या विकास प्राधिकरण ने गुप्तार घाट व्यवसायिक योजना में दुकान प्राप्त करने हेतु समाचार पत्रों में निविदा का प्रकाशन कराया तथा 30 दुकानों का 30 वर्ष के लीज पर 18 लाख 26 हजार अनुमानित क्रय मूल्य भी तय कर दिया।
समाचार पत्रों में निविदा प्रकाशन व पंजीकरण की जानकारी होने पर महंत चतुर्भुज दास ने मजबूर होकर उच्च न्यायालय की की शरण लिया तथा रिट याचिका संख्या 5447/ 23 भगवान श्री लक्ष्मी नरसिंह मंदिर बनाम उत्तर प्रदेश राज्य योजित करते हुए जिलाधिकारी अयोध्या अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व अयोध्या विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष व सचिव सहित कई लोगों को पार्टी बनाते हुए निविदा की प्रक्रिया को निरस्त करने सिविल न्यायालय के आदेश का पालन कराए जाने तथा उनके शांतिपूर्ण कब्जा दखल में हस्तक्षेप न करने की मांग किया। उच्च न्यायालय की डबल बेंच के न्यायमूर्ति राजन राय व न्यायमूर्ति मनीष कुमार में सुनवाई करते हुए मामले में जिले के अधिकारियों को तलब किया है ।
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