कौशांबी से चित्रकूट सपरिवार रहने आया एक 'मृतक', जिंदा घोषित होने के लिए खा रहा ठोकरें, जानें- पूरा मामला
कौशांबी से चित्रकूट सपरिवार एक मृतक रहने आया।
कौशांबी से चित्रकूट सपरिवार एक मृतक रहने आया। परिवार रजिस्टर में मृत दर्ज है। जिंदा घोषित होने के लिए ठोकरें खा रहा है।
चित्रकूट, अमृत विचार। कौशांबी जिले से एक 'मृतक' सपरिवार चित्रकूट जिले के पहाड़ी कस्बे में रहने आया है। यह मजाक नहीं बल्कि हकीकत है। अब यह 'मृतक' खुद का जिंदा साबित करने के लिए भटक रहा है और अधिकारी खुद को किंकर्तव्यविमूढ़ बता रहे हैं।
असल में यह पूरा मामला मूल रूप से तहसील मंझनपुर (कौशांबी) के गांव ऊनो निवासी शिवगुलाम सिंह पुत्र सुराज प्रताप सिंह का है। शिवगुलाम ने बताया कि उसकी पत्नी आरती की ससुराल पहाड़ी के मजरे महाराजपुर में है। साथ ही आसपास में कई रिश्तेदारियां हैं। इस वजह से उसने ऊनी गांव का अपना घर और जमीन बेच दी और सन् 2021 में सपरिवार पहाड़ी चला आया। यहां उसने महाराजपुर रोड के पास जमीन खरीदी और मकान बनवाकर सपरिवार रहने लगा।
शिवगुलाम के अनुसार, जब उसे लगा कि उसने यहां घर बनवा लिया है तो उसे निवास प्रमाणपत्र और उसे राशनकार्ड भी बनवा लेना चाहिए। इसके अलावा अन्य सरकारी योजनाओं के लाभ के लिए भी आवेदन करना चाहिए। इसके लिए उसे आधार कार्ड में पता बदलवाने की आवश्यकता महसूस हुई। इस मंशा को लेकर जब वह पहाड़ी के तत्कालीन सचिव से मिला तो सचिव ने उसको सलाह दी कि वह पहले कौशांबी जाकर वहां से परिवार रजिस्टर की नकल इस आशय की लाए कि उसका वहां से नाम काट दिया गया है।
शिवगुलाम ने बताया कि जब वह कौशांबी में संबंधित सचिव नवीन सिंह से मिला तो सचिव ने परिवार रजिस्टर देखकर बताया कि इसमें तो शिवगुलाम के आगे मृतक दर्ज है। यह सुनकर उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। उसने सचिव से कहा कि वह तो उसके सामने जिंदा खड़ा है पर सचिव ने उसे परिवार रजिस्टर की नकल देने से हाथ खड़े कर दिए। नवीन ने बताया कि यह काम उनके पूर्ववर्ती सचिव ने किया है और इसमें जब तक उच्चाधिकारियों के स्तर पर निर्देश आदेश जारी नहीं होंगे, वह उसे जीवित नहीं घोषित कर सकते।
उधर, रामगुलाम खुद को कुटुंब रजिस्टर में जीवित घोषित कराने के लिए परेशान हैं। बिना इसके उसका और उसकी पत्नी आरती, पुत्र राज सिंह, पुत्रियां जानू और रानू का नाम पहाड़ी के परिवार रजिस्टर में दर्ज नहीं होगा। आधार कार्ड में पता परिवर्तित हुए बिना उसे और उसके परिवार को न तो सरकारी योजनाओं का लाभ मिल पाएगा और न निवास प्रमाणपत्र ही बन सकेगा।
हर स्तर पर दिए प्रार्थनापत्र
शिवगुलाम ने बताया कि इसके बाद उसने कौशांबी के जिला पंचायत राज अधिकारी के नाम कई प्रार्थनापत्र दिए, जनसुनवाई में भी अपील की पर कुछ नहीं हुआ। उसने बताया कि उसने खुद के जीवित होने का हलफनामा भी डीपीआरओ को दिया पर उसे जिंदा नहीं किया गया।
खुली बैठक के बाद भी नहीं हुआ 'जिंदा'
शिवगुलाम ने बताया कि गांव में खुली बैठक हुई और इसमें भी ग्राम पंचायत सदस्यों और सचिव ने प्रमाणित किया कि वह जिंदा है और उसके पिता की जगह उसे मृत घोषित कर दिया गया है। इसके बाद भी कुंटुब रजिस्टर में उसे जिंदा नहीं किया गया।
साजिश की भी है आशंका
सरसवां के सचिव ने बताया कि अगर उसे मृतक घोषित किया गया है तो निश्चित रूप से इसका मृतक प्रमाणपत्र भी कहीं लगाया गया होगा। इसके पीछे उसके परिचितों, परिवारीजनों या किसी अन्य द्वारा साजिश की भी आशंका है।
कार्रवाई तो सचिव को करनी है- बीडीओ
इस संबंध में बीडीओ सरसवां सतीश कुमार सिंह ने कहा कि कार्रवाई सचिव को ही करनी है। ग्रामसभा की बैठक बुलाई जाए और नाम चढ़वाया जाए। हालांकि बीडीओ इस मामले पर ज्यादा कुछ कह नहीं पाए।
प्रधान बोले, कराएंगे बैठक
ऊनो गांव के प्रधान राहुल त्रिपाठी ने बताया कि उनको शिवगुलाम के इस मामले की जानकारी नहीं थी। वह गांव में खुली बैठक बुलाएंगे और इसमें जीवित घोषित करने की कार्रवाई की जाएगी।
जांच कराई जाएगी- डीपीआरओ कौशांबी
कौशांबी जिले के डीपीआरओ बालगोविंद श्रीवास्तव ने बताया कि उनकी जानकारी में यह मामला नहीं है। उन्होंने कहा कि संबंधित व्यक्ति अगर उनको प्रार्थनापत्र दे तो वह जांच कराएंगे। यह गंभीर मामला है। यह देखना होगा कि किस परिस्थिति में किसने इनका मृत प्रमाणपत्र बनवाया।
