प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपठनीय आदेश पर की तल्ख टिप्पणी
प्रयागराज, अमृत विचार। इलाहाबाद हाइकोर्ट ने एक चकबंदी अधिकारी के अस्पष्ट और अपठनीय आदेश पर तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा है कि 21वीं सदी में भारत चंद्रयान भेज रहा है और उपनिदेशक चकबंदी, (डीडीसी) जौनपुर हस्तलेख में ऐसा आदेश पारित कर रहे हैं, जो बिल्कुल पढ़ने योग्य नहीं है,जबकि सुपाठ्य लेखन के लिए अन्य विकल्प भी उपलब्ध हैं, जैसे कंप्यूटर या वॉइस टाइपिंग आदि। हालांकि अधिकारी ने इसका उपयोग नहीं किया है।
इस पर कोर्ट ने डीडीसी को एक आदेश पारित करने का निर्देश दिया है जो स्पष्ट हस्तलिखित या कंप्यूटर टाइपिंग द्वारा सुपाठ्य हो। उक्त आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने संबंधित अधिकारी के आदेश को चुनौती देने वाली शम्सुद्दीन द्वारा दाखिल याचिका पर विचार करते हुए पारित किया। साथ ही संबंधित अधिकारी को तीन हफ्ते में पठनीय आदेश, स्वयं के हस्तलेख या कंप्यूटर टाइप में पारित करने और उसकी प्रमाणित प्रति याची को निःशुल्क प्रदान करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने याचिका के साथ दाखिल अपठनीय आदेश की स्कैन कॉपी भी संलग्न कर इस आदेश को उचित कार्रवाई हेतु उत्तर प्रदेश चकबंदी आयुक्त, लखनऊ व डीडीसी, जौनपुर को प्रेषित करने का भी आदेश दिया है। याचिका की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद होगी।
दरअसल कोर्ट में याचिका की सुनवाई के दौरान डीडीसी के आदेश की प्रमाणित प्रति ऐसी लगाई गई थी,जिसे पढ़ा नहीं जा सका। 30 पृष्ठ का आदेश दोनों पक्षों के अधिवक्ता भी सही ढंग से नहीं पढ़ सके।
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