बरेली: पीएचडी छात्र योगेंद्र के शोध में बात आई सामने, काला जीरा से बढ़ेगी मुर्गियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता
बरेली, अमृत विचार। काला जीरा से मुर्गियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होगी। बरेली कॉलेज के जंतु विज्ञान विभाग के पीएचडी छात्र योगेंद्र के शोध में यह बात सामने आई है। उनका दावा है कि चारे-दाने में काला जीरा मिलाकर देने से मुर्गियों में 10 से 15 प्रतिशत शारीरिक वृद्धि भी हो सकती है। इस शोध को जर्नल में प्रकाशित किया गया है।
योगेंद्र के अनुसार भारतीय पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली में कलौंजी के बीज और तेल का आयुर्वेद और यूनानी में उपयोग किया जाता है। कलौंजी को आमतौर पर ब्लैक जीरा के रूप में जाना जाता है, जो रेनुनकुलेसी परिवार से संबंधित है। उन्होंने मुर्गियों के दाने में कलौंजी (काला जीरा) के मेथनॉलिक अर्क की जांच की है। इस जांच में उन्होंने पाया कि कलौंजी के मेथनॉलिक अर्क ने एंटीवायरल जीन (IL-1बीटा, IL-10 और IL-12) की अभिव्यक्ति को बढ़ाया। ये जीन मुर्गियों में शारीरिक वृद्धि के महत्वपूर्ण कारक माने जाते हैं।
इस शोध के आधार पर उन्होंने दावा किया है कि मुर्गियों को दाने के साथ काला जीरा मिलाकर देने से मुर्गियों में रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है। इसलिए वैक्सीन या एंटीजन के साथ इसे सहायक के रूप में आजमाया जा सकता है। उन्होंने यह शोध कार्य बरेली कॉलेज के जंतु विज्ञान विभाग की एसोसिएट प्रो. डॉ. बीनम सक्सेना और आईसीएआर-आईवीआरआई के प्रतिकरीय अनुभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. आर. सरवानन के मार्ग दर्शन में किया। डॉ. बीनम सक्सेना ने बताया कि इस शोध अध्ययन के पीछे पोल्ट्री फार्म व्यवसाय में नए आयाम स्थापित करना प्रमुख उद्देश्य है।
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