एसजीपीजीआई में फिजियोथेरेपिस्ट के पद पर सेवा नियमावली के विपरीत हुई नियुक्ति

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Edited By Amrit Vichar
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लखनऊ, अमृत विचार। राजधानी के संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान की तरफ से फिजोयोथेरेपी पद के लिए निकाली गई नियुक्ति का राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने विरोध किया है। इस विरोध के पीछे की वजह फिजियोथेरेपी पद के लिए निकाले गये विज्ञापन में शैक्षिक योग्यता को बताया जा रहा है। 

दरअसल, एसजीपीजीआई की तरफ से फिजियोथेरेपी पद पर नियुक्ति के लिए बीते साल 2021-22 में विज्ञापन प्रकाशित किया गया था।  जिसमें शैक्षिक अर्हता 3 वर्ष डिप्लोमा इन फिजियोथेरेपी मांगी गई थी। जिस पर परिषद द्वारा पुरजोर विरोध करते हुये तत्कालीन अपर मुख्य सचिव चिकित्सा शिक्षा को अवगत कराया था। इस पर तत्कालीन अपर मुख्य सचिव चिकित्सा शिक्षा ने एसजीपीजीआई प्रशासन को सेवा नियमावली के विपरीत नियुक्ति न करने का निर्देश दिया था। साथ ही यह भी कहा था कि चयन प्रक्रिया में 2 वर्षीय डिप्लोमा 4 वर्षीय डिग्री धारकों को भी शामिल किया जाये, लेकिन ऐसा नहीं हो सका है। एसजीपीजीआई प्रशासन द्वारा उसको नजरअंदाज करते हुये 15 जुलाई 2023 को भर्ती संबंधी आनलाइन परीक्षा करा ली गई व 16 जुलाई 2023 को मध्य रात्रि में परीक्षा परिणाम घोषित कर दिया गया। इससे प्रदेश के हजारो फिजियोथेरेपिस्ट इस परीक्षा में हिस्सा नहीं ले सके। जिससे उनमें आक्रोश व्याप्त है।

उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के महामंत्री अतुल मिश्रा ने बताया कि 3 वर्षीय डिप्लोमा फिजियोथेरेपी पाठ्यक्रम उत्तर प्रदेश में केवल अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में ही संचालित हो रहा था। प्रदेश में स्टेट मेडिकल फैकल्टी द्वारा 4 वर्षीय डिग्री कोर्स व 2 वर्षीय डिप्लोमा /डिग्री पाठ्यक्रम एसजीपीजीआई ,केजीएमयू सहित कई अन्य संस्थानो में चलाया जा रहा है। ऐसे में केवल 3 वर्षीय डिप्लोमा धारकों को फिजियोथेरेपिस्ट पद के लिए चयन करने पर 4 वर्षीय डिग्री धारक एवं 2 वर्षीय डिप्लोमा धारकों के साथ अन्याय होगा। शासन द्वारा संज्ञान लेते हुये चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा बनाई गई फिजियोथेरेपिस्ट सेवा नियमावली के अनुसार 2 वर्षीय डिप्लोमा 4 वर्षीय डिग्री धारकों की चयन प्रक्रिया में शामिल करने के लिए निर्देशित किया गया था। इसके बाद भी एसजीपीजीआई प्रशासन द्वारा पुनः फिजियोथेरेपिस्ट संवर्ग के पद का विज्ञापन निकाल कर परीक्षा करा ली गई है। जिसमें न्यूनतम शैक्षिक अर्हता मास्टर इन फिजियोथेरेपी मांगी गई, जो न्यायसंगत नहीं है। इससे डिग्री व डिप्लोमा के छात्र परीक्षा में सम्मिलित होने से वंचित रह जायेंगे । प्रोवेंशियल फ़िज़ियोथेरेपिस्ट एसो के महामंत्री अनिल कुमार ने बताया कि केन्द्र व प्रदेश सरकार में समूह ग के पद की न्यूनतम शैक्षिक अर्हता परास्नातक है ही नहीं। इस पूरे मामले को लेकर मुख्यमंत्री से उचित कार्रवाई करने की अपील की गई है।

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