कासगंज में बेकाबू हुई गंगा की धार, सड़कों को पार कर गांव की आबादी में घुसा पानी

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Edited By Amrit Vichar
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कासगंज, अमृत विचार। बाढ़ की विभीषिका से प्रभावित गांव को राहत नहीं मिल रही है। गंगा की धार बेकाबू हो चुकी है और पानी खेतों का सीना चीरकर सड़कों के रास्ते कई गांवों में घुस गया है। गांव जलमग्न हो गए हैं। ग्रामीण बेहद परेशान हैं। सिंचाई विभाग द्वारा किए जा रहे प्रयास सार्थक नहीं हो रहे। कई क्षेत्रों के बांधों में रिसाव जारी है। हालांकि सिंचाई विभाग के अधिकारियों का दावा है कि दतलाना और कादरगंज के बांधों की मरम्मत जल्द पूरी कर ली जाएगी। इधर जलस्तर में तेजी से बढ़ोत्तरी होती जा रही है। डीएम हर्षिता माथुर ने वार्ड प्रभावित गांव का निरीक्षण किया है।

ग्रामीणों का मानना है कि जब तक बाढ़ का लेवल साधारण स्तर तक नहीं आएगा तब तक यह समस्या बनी रहेगी । बाढ़ प्रभावित इलाकों में ग्रामीणों का जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त है। बुधवार को गंगा के जलस्तर में 5 सेंटीमीटर की बढोत्तरी हुई है।  

बैराजों से लगातार छोड़ा जा रहा पानी गंगा नदी में दबाव बनाए हुए है। बरौना और कादरगंज के हालात खराब है।बरौना में गंगा की धार कटान कर रही है। वहीं सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने दावा किया है कि काफी हद तक कटान रोक लिया गया है। लेकिन जलस्तर में अभी और बढोत्तरी होती दिख रही है।

वहीं बाढ़ का पानी कई गांवों में घुस गया है। 30 से अधिक गांवों में पानी जमा हो गया है। अब तक गांव के चारों तरफ जमा पानी आबादी में घुसने लगा है। रास्ते जलमग्न हो गए हैं। ऐसी स्थिति देखते हुए प्रभावित गांव के लोगों का मानना है कि जब तक जलस्तर साधारण नहीं होगा तब तक प्रभावित इलाकों को राहत नहीं मिलेगी।

इन गावों तक पहुंचा पानी
गांव दतलाना, खेरा, घूरनपुर, कुबेर नगरी, कादरवाड़ी, पाठकपुर, बघेला पुख्ता, गऊपुरा, नगला खेरी, अल्लीपुर बरबारा, महमूदपुर पुख्ता, बरौना, कादरगंज, नगला दुर्जन, नगला जयकिशन, ओमनगरिया, नगला नैनसुख, नगला खना, नगला जैली, नगला चतुरी, नगला पदम, मूज खेड़ा, नगला नरपति, नगला शीशम बाढ़ के पानी से घिर गए हैं।

पशुओें के सामने हरे चारे की दिक्कत
बाढ़ प्रभावित गांव में सर्वाधिक परेशानी पशुओं के चारे की है। खेतों में पानी भरा होने के कारण ग्रामीण चारा नहीं काट पा रहे। इससे हरे चारे की समस्या बनीं हुई है। दिन के समय में सूखे और ऊंचे इलाकों की ओर ग्रामीण पशुओं को ले जाते हैं। आबादी के बीच पानी भरा होने से ग्रामीणों को आवाजाही में दिक्कतें हो रही हैं। कच्चे मकानों की दीवारें भी नमी से खराब हो रहीं हैं।

बाढ़ का स्तर
- साधारण बाढ़ - 30 हजार क्यूसेक से 1 लाख क्यूसेक।
- निम्न बाढ़ - 1 लाख क्यूसेक से डेढ़ लाख क्यूसेक।
- मध्यम बाढ़ - 1.5 लाख क्यूसेक से 2.5 लाख क्यूसेक।
- खतरे की बाढ़ 2.5 लाख क्यूसेक से ज्यादा पानी छोड़े जाने पर।

गांव बचाने के लिए ग्रामीण खींच रहे लक्ष्मण रेखा
गांव में पानी जमा न हो और पानी की धार को कम किया जा सके। इसके लिए ग्रामीण लक्ष्मण रेखा खींच रहे हैं। गांवों के चारों तक मिट्टी और बालू के पैकिट लगाकर पानी को रोकने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन प्रयास सफल नहीं हो पा रहे हैं।

बनाया गया राहत कैंप
जिला प्रशासन ने ग्रामीणों की सुविधा के मद्देनजर सभी तैयारियां पूरी की हैं। बाढ़ यदि और बढ़ती है तो ग्रामीणों को राहत कैंप में पनाह दी जाएगी। इसके लिए प्रशासन ने पटियाली क्षेत्र के गांव म्यूनी में राहत कैंप बना दिया है।

आंकड़े की नजर से-
136344 क्यूसेक पानी हरिद्वार बैराज से छोडा गया।
139743 क्यूसेक पानी बिजनौर बैराज से छोड़ा गया।
213749 क्यूसेक पानी नरौरा बैराज से छोड़ा गया।
163.95 मीटर जलस्तर रविवार को रहा कछला नदी में।

गंगा का जलस्तर बढ़ रहाहै।दतलाना में बांध पर और कटान न हो इसके लिए युद्धस्तर पर काम हो रहा है। कादरगंज के मनरेगा के बांध पर भी काफी काम हो चुका है। बरौना में कटान नहीं हो रहा है। कुछ गांव के खेतों के बाद पानी गांव तक पहुंचा है। सिंचाई विभाग लगातार निगरानी कर रहा है---अरुण कुमार, अधिशाषी अभियंता सिंचाई।

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