Kanpur News: जलवायु परिवर्तन के कारण मानसून में हो रही पैची रेन, 100 किमी दायरे में ही बदल गया वर्षा का पैटर्न
जलवायु परिवर्तन से कानपुर के आसपास बढ़ी पैची रेन।
जलवायु परिवर्तन से कानपुर के आसपास बढ़ी पैची रेन। मानसून की बरसात में भी कई बार आधे शहर तो कभी मोहल्ले-मोहल्ले बादल बरस रहे है।
कानपुर, [राजीव त्रिवेदी]। जाड़ों के मौसम में अक्सर ‘पैची फॉग’ देखा और सुना जाता है। मसलन किसी इलाके में काफी घना कोहरा होता है और 10-20 किलोमीटर के बाद आसमान साफ होता है। हाईवे पर वाहन चालकों का इस स्थिति से खूब आमना-सामना होता रहता है। कुछ इसी तर्ज पर इस बार मानसून में बरसात हो रही है।
मौसम वैज्ञानिक इसे ‘पैची रेन’ बता रहे हैं। बादल कई बार आधे शहर में तो कभी मोहल्ले-मोहल्ले बरस रहे हैं। वैज्ञानिक इसके लिए पेड़ों की कटान, भूगर्भ जल में गिरावट, बढ़ते शहरीकरण, वाहनों से निकलने वाली जहरीली गैसें और बढ़ते कार्बन उत्सर्जन को जिम्मेदार मान रहे हैं। कानपुर और उसके आसपास का इलाका इस बार बरसात में वर्षा का पैटर्न बदलने से ‘पैची रेन’ जैसी परिस्थिति का सामना कर रहा है।
मौसम और कृषि क्षेत्र से जुड़े वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण वर्षा की मात्रा और वितरण बदल गया है। इसका सबसे बड़ा खामियाजा कृषि क्षेत्र को उठाना पड़ रहा है। अत्यधिक शहरीकरण, हरियाली में कमी, वाहनों और एसी व रेफ्रिजरेटर से निकलने वाली जहरीली गैसें, वर्षा जल का संचयन नहीं होना जैसे कारणों के चलते वायुमंडलीय स्थितियां बदल जाती हैं। इससे बादलों का निर्माण और गति प्रभावित होती है। इसी से वर्षा का पैटर्न परिवर्तित हो जाता है।
कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि कृषि कार्य, शहरीकरण, हाईवे निर्माण या अन्य उद्देश्य के लिए जंगल साफ करने से भूमि शुष्क हो जाती है। इससे भी वर्षा के पैटर्न में बदलाव होता है। इसी तरह पेट्रोल चालित वाहनों से कार्बन मोनोऑक्साइड तथा डीजल के वाहनों से कार्बन डाई ऑक्साइड, सल्फर डाई ऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसी जहरीली गैसें निकलती हैं। ये भी वर्षा की असमान स्थितियों को बढ़ावा देती हैं।
100 किमी दायरे में ही बदल गया वर्षा का पैटर्न
चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के मौसम विशेषज्ञ डॉ. एसएन सुनील पांडेय ने वर्षा की असमान स्थिति को लेकर अध्ययन किया तो कानपुर से कन्नौज तक 100 किलोमीटर के क्षेत्र में ही वर्षा की मात्रा काफी अंतर मिला। कहीं झमाझम बारिश हुई तो कहीं सिर्फ तेज बूंदाबांदी। उनके मुताबिक इसका कारण जलवायु परिवर्तन है।
बारिश की अस्थिरता की सबसे बड़ी वजह शहर में बढ़ते वाहन और एसी का अंधाधुंध प्रयोग हैं। इनसे पर्यावरण को प्रदूषित करने वाली गैसें वायुमंडल में एक परत बना रही हैं। इस परत से नम हवाओं में बाधा उत्पन्न होने से बादल बनने में समस्या आ रही है। इसके चलते जिससे बारिश का पैटर्न इतना बदल गया है कि 100 किलोमीटर के दायरे में ही एकरूपता नहीं रही है।
