Farrukhabad News : बाढ़ आने से पशुओं को जिंदा रखना हो रहा मुश्किल, पशुपालक के सामने रोजी-रोटी का सकंट

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Edited By Amrit Vichar
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फर्रुखाबाद में पशुओं को भूखा मरने को मजबूर रही गंगा में आई बाढ़।

फर्रुखाबाद में पशुओं को भूखा मरने को मजबूर रही गंगा में बाढ़ आई। चारा भूसा बाढ़ के पानी से खराब हो गया।

फर्रुखाबाद, अमृत विचार। गंगा नदी में आई बाढ़ से नष्ट हुए भूसा व चारे की वजह से यहां के पशु पालकों को अपने पशुओं को जिंदा रखना मुश्किल हो रहा है। जिला प्रशासन की ओर से खाद्यान्न की व्यवस्था तो कर दी गई है, लेकिन पशुओं के चारे की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। पशुपालक किसान दूरदराज से चारा लाकर अपने पशुओं को जिंदा रखे हुए हैं। लेकिन तिल तिल कर भूखों मर रहे पशुओं को देखकर पशुपालक भी परेशान हैं।

उनका कहना है कि बाढ़ ने जो हालात पैदा किए हैं। उनसे आम जनमानस की कमर टूट गई है। हालांकि जिला प्रशासन बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों पर पूरी नजर रखे हुए है। लेकिन अभी तक उसका ध्यान पशुओं की ओर नहीं गया है। इन बेजुवानों को पशुपालक किस तरह जिंदा रखें यह चिंता उन्हें सता रही है। बाढ़ की विभीषिका से जूझ रहे लोगों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि उनके पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था कराई जाए।

अमृतपुर प्रतिनिधि के अनुसार पिछले एक महीने से गंगा नदी की बाढ़ का दंश झेल रहे तलहटी के गांवों के लोगों ने जलस्तर घटने से कुछ राहत की सांस ली है। लेकिन बाढ़ ने लोगों के सामने जीविका की समस्या पैदा कर दी। पशुओं के चरने के लिए घास तक बाढ़ ने समाप्त कर दी है। जलभराव से चारा घास सब सड़ गया है। जिससे पशुओं के चारे की समस्या पैदा हो गई है। जलभराव वाले गांवों मे गंदगी ही गंदगी दिखाई पड़ रही है।

गांवों मे जमा गोबर और कचरे के ढेरों से सड़ांध फैल रही है। कुतुलुपुर, दौलतपुर, हरिहरपुर, बिरसिंहपुर, कड़क्का, मोहद्दीपुर, सबलपुर, जगतपुर, अंबरपुर, बमियारी, रामपुर जोगराजपुर, बरुआ, चित्रकूट आदि गांवों मे जलभराव से फैली गंदगी से रोग फैलने की संभावना बढ़ गई है। एसडीएम रविन्द्र सिंह ने बताया 3000 पैकेट बाढ़ राहत सामग्री का वितरण हो चुका है। 1350 पैकेटों की डिमांड और भेजी गई है। प्रशासन पूरी तरह से बाढ़ पीड़ितों के साथ है।

राजपुर प्रति निधि के अनुसार-बाढ़ की विभीषिका का दंश झेल रहे पशुपालक किसान जलभराव के कारण पशुओं को खिलाने के लिये  चारे को भटक रहे हैं। घरों में भूसा आदि चारा था वो सब पानी से भीगने की बजह से खराब हो गया। जिससे पशुपालक किसानों के सामने बहुत बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। बाढ़ प्रभावित इलाके में कुछ चारा बचा नहीं तो किसान दूरदराज इलाकों से जिस जगह बाढ़ का पानी नहीं पहुंचा है। वहां से अपने पशुओं के लिए चारा लाने को मजबूर हैं। सरकार द्वारा बाढ़ से प्रभावित इलाकों में खाद्यान्न आदि का वितरण किया जा रहा है।

परन्तु पशुओं के लिए कोई समुचित व्यवस्था नहीं कि गई। जिससे पशुपालक किसानों के आगे बहुत गंभीर समस्या   पैदा हो गई है। किसान हरीराम निवासी भाऊपुर चौरासी बताते हैं कि हम लोग तो किसी तरह अपनी गुजर बसर कर रहे हैं। अनाज बगैरह था तो पानी बढ़ता देख ऊंचे स्थानों पर रखकर बचा लिया था। मगर जो पशुओं के लिए भूसा चारा था उसको रखने के लिए कोई ऐसी जगह नहीं थी जिसे बचा पाते। दरवाजे के बाहर हम लोग भूसे का कूप बनाकर सुरक्षित कर लेते थे। जो हमारे पशुओं के लिए पूरे साल भर के लिए  चारा हो जाता था।

परन्तु इस साल अचानक आयी बाढ़ से सब भींग कर खराब हो गया। अब हम लोग जहां बाढ़ का पानी नहीं पहुंचा था।   वहां सुवह को निकल जाते और अपने पशुओं के लिए चारा की व्यवस्था करते हैं। आज हम अपने गांव से आठ किलोमीटर दूर से पशुओं के लिए चारा लेकर आ रहे हैं। यही हाल लगभग हमारे पूरे गांव के पशुपालकों का है।

भाऊपुर चौरासी के मेघनाथ, फूलसिंह, अमरसिंह, सत्ते, आदि ने जिला प्रशासन से मांग की जिस तरह से बाढ़ पीड़ितों के लिए सरकार खाद्यान्न उपलब्ध करा रही है। उसी तरह हमारे पशुओं के लिए भी  भूसा चारे की व्यवस्था करे जिससे बेजुबानों को बचाया जा सके।

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