मिशन 2024: संयुक्त विपक्ष को शिकस्त देने को तैयार भाजपा के मुस्लिम मोदी मित्र, जनवरी 2024 में दिल्ली में महासम्मेलन

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संयुक्त विपक्ष को शिकस्त देने को तैयार भाजपा के मुस्लिम मोदी मित्र।

संयुक्त विपक्ष को शिकस्त देने को तैयार भाजपा के मुस्लिम मोदी मित्र। मुस्लिम बहुल सीटों पर पांच हजार मोदी मित्र दस वोटर लाएंगे। उत्तर प्रदेश में कानपुर समेत 13 लोकसभा सीटें मुस्लिम बहुल हैं।

कानपुर, [महेश शर्मा]। मिशन 2024 फतह करने के लिए मुस्लिम बहुल सीटों पर भाजपा के मुस्लिम ‘मोदी मित्र’ बनाओ योजना पर काम तेजी से चल रहा है। दिल्ली में भाजपा के मुस्लिम समर्थकों का एक बड़ा सम्मेलन निकट भविष्य में होने की संभावना है। यूपी में 13 लोकसभा सीटों के साथ ही देश में 65 ऐसी लोकसभा सीटें हैं जहां पर मुसलमान वोट निर्णायक है।

इनमें कानपुर सीट भी बतायी जाती है जहां पर मुसलमानों का एक मुश्त वोट निकटतम प्रतिद्वंद्वी प्रत्याशी को मिल जाए तो खेल बिगड़ सकता है। भाजपा का पसमांदा मुस्लिम अबकी लोकसभा चुनाव में प्रभावी साबित हो सकता है। मुसलमानों पर पार्टी का फोकस यही संकेत देता है कि भाजपा अबकी फूंक-फूंककर कदम  रख रही है। मुस्लिम समुदाय से ‘मोदी मित्र’बनाने का अभियान जारी है। विपक्ष का नवगठित मोर्चा ‘इंडिया’ के समीकरण बिगाड़ने के लिए ‘मोदी मित्र‘ ही काफी होंगे।

भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जमाल सिद्दीकी ने अमृत विचार को बताया कि एक लोकसभा क्षेत्र पांच हजार मुसलमानों को मोदी मित्र बनाने की योजना है और इन्हें भाजपा प्रत्याशियों के लिए करीब दस वोट जुटाने को कहा जा रहा है। इस प्रकार एक मुस्लिम बहुल सीट से पार्टी प्रत्याशी को 50 हजार वोट मिल सकते हैं। यह प्रत्याशी की जीत का एक बड़ा आधार हो सकता है।

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जमाल सिद्दीकी

जमाल का कहना है कि ‘मोदी मित्र’ अभियान चल रहा है। कहीं दस तो कहीं पांच हजार मुस्लिम मोदी मित्र बने हैं। लक्ष्य पूरा होने पर ‘मोदी मित्र’ के बैनर तले दिल्ली में विशाल सम्मेलन होगा जिसमें देश भर से ‘मोदी मित्र’ आएंगे। इसकी तारीख तय की जा रही है। जमाल का कहना है कि यह सम्मेलन जनवरी 2024 में आयोजित किया जाएगा। खुद प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी इसे संबोधित करेंगे।

हैदराबाद में भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति की बैठक में पसमांदा मुस्लिम की समस्याओं पर गंभीर होते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इस वर्ग का ध्यान रखना होगा। सरकार की प्रत्येक कल्याणकारी योजना में पसमांदा मुस्लिमों में लाभ दिया जाता रहा। यूपी में तो मुस्लिम लाभार्थी गैर मुस्लिम लाभार्थी लगभग बराबर हैं। मुस्लिम मतदाताओं का रुझान भाजपा की तरफ 2014 के चुनाव के साथ ही शुरू हो गया था। लोकनीति और सीडीएस सर्वे रिपोर्ट की मानें तो भाजपा ने नौ फीसदी मुस्लिम वोट हासिल किए थे जो 2009 (चार फीसदी) के मुकाबले दोगुने थे।

कांग्रेस को 38 फीसदी मिले थे जो 2014 में भी इतने ही थे। 2019 में भी 9 फीसदी के लगभग बताया जाता है। यूपी विस चुनाव में यह आठ फीसदी रहा। राज्य में कुल 20 फीसदी वोट था जिसमें सपा ने इतने में से 79 फीसदी वोट पाए भाजपा को आठ फीसदी मिले जो 2017 विस चुनाव के मुकाबले एक फीसदी अधिक था।

यूपी अल्पसंख्यक मोर्चा के उपाध्यक्ष सलीम अहमद कहते हैं कि मोदी सरकार ने मुस्लिम समाज के तमाम कल्याणकारी योजनाएं दीं जिनका लाभ मिल रहा है। उड़ान योजना में मुस्लिम छात्र-छात्राओं को प्रतियोगता परीक्षा की तैयारी के लिए फ्री कोचिंग मुहैया कराती है। घर में रहकर मुस्लिम छात्रों को डेढ़ हजार रुपया दिया जाता है। बाहर पढ़ाई करने पर तीन हजार। शादी शगुन योजना में ग्रेजुएशन करने वाली छात्राओं को लाभ मिलता है। उस्ताद योजना में मुस्लिम कारीगरों को व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जाता है।

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सलीम अहमद

सलीम कहते हैं कि सीखो और कमाओ योजना में नौकरियां मिल जाती है। इसी तरह ईदी योजना में पांच करोड़ मुस्लिम छात्र-छात्राओं को पीएम छात्रवृत्ति देने की योजना चल रही है। मोर्चा उपाध्यक्ष सलीम अहमद का कहना है कि नगर निकाय चुनाव में 365 सीटों पर मुस्लिम प्रत्याशी लड़ाए गए।  इनमें 61 ने सीट हासिल की। वह कहते हैं कि यूपी में मुस्लिम वोटिंग का पैटर्न महत्वपूर्ण संकेत देता है। 

मोर्चा के प्रदेश मंत्री अनस बताते हैं कि विधान परिषद सदस्य तारिक मंसूर को भाजपा की राष्ट्रीय कमेटी उपाध्यक्ष के पद से नवाज कर पार्टी ने संकेत दिया है कि मुसलमानों को नेतृत्व करने वाली टीम में शामिल किया जाता रहेगा। मुस्लिम आबादी का 85 फीसदी पसमांदा मुस्लिम है जिन्हें जोड़ा जा रहा है। मुस्लिमों में मोदी मित्र योजना को पर लग चुके हैं लोग जुड़ रहे हैं।

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अनस उस्मानी

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