बरेली: लाकडाउन में टैक्स चोरी का खुला खेल, अफसर फेल
बरेली,अमृत विचार। लंबे समय तक लाकडाउन रहने की वजह से वाणिज्यकर विभाग टैक्स वसूली में पिछड़ने की बात कह रहा है। वहीं, दूसरी तरफ शहर के कई स्थानों पर खुलेआम टैक्स चोरी का खेल चल रहा है। डेलापीर, गंगापुर, प्रेमनगर में अब भी यह खेल जारी है। मगर, वाणिज्यकर विभाग ने निगाहें फेर ली हैं। …
बरेली,अमृत विचार। लंबे समय तक लाकडाउन रहने की वजह से वाणिज्यकर विभाग टैक्स वसूली में पिछड़ने की बात कह रहा है। वहीं, दूसरी तरफ शहर के कई स्थानों पर खुलेआम टैक्स चोरी का खेल चल रहा है। डेलापीर, गंगापुर, प्रेमनगर में अब भी यह खेल जारी है। मगर, वाणिज्यकर विभाग ने निगाहें फेर ली हैं। साठगांठ होने की वजह से सचल दल भी टैक्स चोरों पर कार्रवाई करने से कतरा रहा है।
अनलाक में छूट मिलने के बाद पूर्व की तरह शहर में माधोबाड़ी, श्यामगंज समेत कई जगह वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) चोरी के गढ़ के रूप में फिर से चर्चा में है। करीब दो दर्जन ट्रांसपोर्ट कंपनियां ऐसी भी हैं। जहां 24 घंटे में 20 घंटे तक कई तरह का सैकड़ों टन माल लोड व अनलोड होता रहता है। इनमें ज्यादातर माल फुटकर का होता है।
एक ही ट्रक में 20 से 30 तरह का माल और सभी अलग-अलग व्यापारियों का होता है। इसमें कई तरह की खाद्य सामग्री भी होती है। जिस पर जीएसटी के अलावा मंडी शुल्क भी लगता है, लेकिन यहां सब दलालों के भरोसे चल रहा है। इसमें कुछ माल का बिलिंग होती है। बाकी की नहीं।
30 से 40 प्रतिशत टैक्स की चोरी कर सरकार को प्रतिदिन जहां लाखों रुपये का चूना लग रहा है, वहीं वाणिज्यकर विभाग का सचल दल शहर के अंदर अनलोड हो रहे माल के बिल चेक करने के बजाए केवल दिल्ली, लखनऊ और उतराखंड की सीमा से शहर में प्रवेश होने वाले प्वाइंट पर चेकिंग करने तक सीमित है।
बिल से कुछ इस तरह होती है गड़बड़ी
जब ट्रक लोड होकर चलता है तो माल के साथ बिल भी होता है, लेकिन चेकिंग के दौरान अधिकारी इस बिल को नेट पर अपलोड नहीं करते। माल अनलोड होने के बाद इसी बिल से दोबारा माल भेजने की प्रक्रिया तब तक चलती है, जब तक बिल क्रमांक नेट पर अपलोड नहीं होता। सूत्रों के मुताबिक एक ही बिल पर दर्जनों बार माल आ जाता है। करीब 40 फीसदी टैक्स चोरी का यही मुख्य खेल है।
इसलिए नहीं रुक रहा टैक्स चोरी का खेल
टैक्स चोरी का खेल अधिकारी इसलिए भी नहीं रोक पा रहे हैं। सचल दल के अधिकारी नंबर दो के माल की जानकारी आसानी से नहीं कर पाते हैं। कुछ व्यापारियों का नेटवर्क तो इतना जबरदस्त है कि वह आसानी से ही अधिकारियों के चेकिंग प्वाइंट की जानकारी आसानी से कर लेते हैं।
कुछ ट्रांसपोर्ट एजेंसियां लेती हैं ठेका
शहर में कुछ ट्रांसपोर्ट एजेंसी ऐसी भी है जो टैक्स चोरी के माल को सुरक्षित व्यापारी के पास पहुंचाने का ठेका लेती हैं। सबसे अधिक टैक्स चोरी का माल आगरा, झांसी, लखनऊ, हाथरस और गाजियाबाद की ओर से आने वाले ट्रांसपोर्ट में होता है। व्यापारी को अपना माल उठाने के लिए नहीं आना पड़ता है। ट्रांसपोर्ट एजेंसी व्यापारी की गोदाम तक ही माल को सुरक्षित पहुंचा देते हैं।
