बरेली: नार्थ रेलवे कॉलोनी में डर के बीच जिंदगी

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Edited By Amrit Vichar
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कॉलोनी में दो दर्जन से अधिक आवास जर्जर हाल में, 400 से अधिक हैं कॉलोनी में आवास

बरेली, अमृत विचार। जिन कर्मियों के कंधों पर रेल संचालन की जिम्मेदारी है, उनके आवास जर्जर हैं। कर्मी जान जोखिम में डालकर परिवार के साथ इन आवासों में रहने को मजबूर हैं। बारिश में हादसे का डर बना हुआ है, मगर अफसर उनकी सुध नहीं ले रहे हैं। रेल कर्मचारियों का कहना है कि कई बार इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारियों को समस्या से अवगत करा चुके हैं, लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं है।

जंक्शन स्थित रेलवे की नार्थ कॉलोनी में 400 से अधिक आवास हैं। जिनमें बड़ी संख्या में ऐसे आवास हैं, जो रहने लायक नहीं हैं, मगर रेल कर्मचारी जान जोखिम में डालकर रह रहे हैं। अमृत विचार की टीम ने सोमवार को रेलवे आवासों की स्थिति को परखा तो हैरान करने वाली तस्वीरें सामने आईं। किसी मकान में लिंटर टूटकर गिर रहा तो किसी में फर्श पूरी तरह टूट चुका था। कई मकानों में लंबे समय से पेंट तक नहीं कराया गया था। एक आवास के अंदर रसोईघर की हालत देखकर ऐसा लगा कि यहां खाना बनाना तो दूर चंद मिनट खड़ा होना भी मुश्किल है। अधिकारियों के डर से कोई कर्मचारी बोलने को तैयार नहीं हुआ, लेकिन दबे अल्फाजों में बताया कि कई बार लिखित में अधिकारियों को शिकायत कर चुके हैं, मगर स्थिति जस की तस है। बताया कि कई घरों की छत बरसात में टपकती है। इस संबंध में सीनियर सेक्शन इंजीनियर कार्य चमन सिंह से बात करने का प्रयास किया, मगर उनका फोन नहीं उठा।

स्टेशन अधीक्षक का दर्द छलका, बोले- खुद ही करानी पड़ी आवास की मरम्मत
नार्थ रेलवे कॉलोनी में ऑपरेटिंग, इंजीनियरिंग, रेलपथ, कमर्शियल आदि विभागों के कर्मचारियों के आवास हैं। इस संबंध में जब स्टेशन अधीक्षक भानु प्रताप सिंह से बात की गई तो उनका दर्द छलक उठा। उनका कहना था कि वह अपना पैसा लगाकर सरकारी आवास को ठीक करा रहे हैं। मरम्मत के लिए इंजीनियरिंग विभाग से कहा गया, लेकिन आवास को ठीक नहीं कराया गया।

मकान ही नहीं सड़कें भी बदहाल
नार्थ कॉलोनी के अंदर जाने वाले सड़कों की हालत भी खराब है। पूर्व में जिन सड़कों को खोदा गया, वहां अब बड़े नालेनुमा गड्ढे बन गए हैं। रेलवे कर्मचारी और उनके परिजन इन रास्तों से निकलते हैं। ऐसे में हादसे का डर बना रहता है।

बरसात में दीवारों पर जमी काई
कॉलोनी में आवास की छतें जर्जर हो चुकी हैं। मरम्मत नहीं होने से दीवारों में झाड़ियां उग गई हैं। यहां आवास में रहने वाली फराह खान ने बताया कि उनके घर की दीवारों पर काई जम चुकी है। बारिश से छत टपक रही है। मरम्मत के लिए सीनियर सेक्शन इंजीनियर कार्य से कहा गया, लेकिन इस ओर ध्यान नहीं दिया गया। दीवारों पर पेंट भी नहीं कराया गया है।

समय-समय पर रेलवे क्वार्टरों की मरम्मत कराई जाती है। कुछ कर्मचारियों के आवेदन भी मिले हैं, बारिश की वजह से कुछ मकानों की मरम्मत का काम बीते दिनों रुक गया था-आयुष द्विवेदी, सहायक मंडल अभियंता।

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