मुरादाबाद : आजादी के दीवानों के त्याग और समर्पण से मिली आजादी
गजरौला में रेलवे ट्रैक उखाड़ते समय पकड़े गए थे ओम प्रकाश, अंग्रेजों ने भेजा था जेल
मुरादाबाद, अमृत विचार। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी ओम प्रकाश की पत्नी श्यामो देवी कहती हैं कि भारत को अंग्रेजों से आजादी ऐसे ही नहीं मिली। उस समय बड़ा त्याग करना पड़ा है। घर छोड़कर छिप-छिपकर रहकर अंग्रेजों के विरोध में आवाज उठानी पड़ी है। कई-कई दिन भूखे-प्यासे रहकर आजादी की लड़ाई लड़ी है। यहां तक कि अंग्रेज पुरुषों के ही नहीं महिलाओं तक के कपड़े उतरवा लेते थे। कई-कई दिनों तक घर के बाहर जंगल-झाड़ियों में रहकर पेड़ के पत्ते लपेट कर महिलाओं को आबरू बचानी पड़ती थी।
श्यामो देवी कहती हैं कि वह खुद कई-कई दिनों तक भूखी रहीं, जंगल-झाड़ी में रहीं। कपड़े नहीं थे तो वह खुद शरीर पर पेड़ के पत्ते लपेटती थीं। बारिश के मौसम में भी वह घर से बाहर झाड़ियों में रही हैं। आम के बाग थे तो सीजन में कच्चा-पक्का आम खाकर मुसीबत वाले दिन काटे हैं। कभी-कभी पानी पीकर ही दिन गुजारने पड़े थे। इतने जतन के बाद आजादी मिल पाई थी।
श्यामो देवी पति ओम प्रकाश का एक पुराना किस्सा बताती हैं कि जब वह अपने साथियों संग आजादी की जंग लड़ रहे थे, उसी बीच उनके पति गजरौला में रेल की पटरी उखाड़ रहे थे तो उन्हें अंग्रेजों ने पकड़ लिया। अंग्रेजों ने ओम प्रकाश को प्रताड़ित किया और मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने के बाद जेल भेज दिया। श्यामो ने बताया कि हसनपुर के महावीर प्रसाद अग्रवाल उनके पति ओम प्रकाश के अच्छे मित्र थे।
महावीर प्रसाद ने भी आजादी की लड़ाई में काफी संघर्ष किया था। घर में रुकते तो अंग्रेज पकड़ कर ले जाते थे, इसलिए ये लोग बारिश हो या अन्य कोई मौसम घर के बाहर झाड़ियों में छिपे रहते थे और मौका देखते ही आंदोलन में शामिल होकर अंग्रेजों का विरोध करते थे। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी ओम प्रकाश को गुजरे करीब 33 साल हो गए हैं। इनके एक ही संतान रेखा शर्मा हैं। रेखा अपने पिता के जीवित रहते छह साल की थीं।
यात्रा पास खो गया, दूसरा नहीं बन पाया
मुरादाबाद। 85 वर्षीय श्यामो देवी ने बताया कि उनके देवर जय प्रकाश का परिवार मध्य प्रदेश के दतिया में रहता है। जय प्रकाश अब दुनिया में नहीं हैं। वह यदि देवर के परिवार के पास जाना चाहे तो उनके पास रेल या रोडवेज बस का कोई सरकारी पास नहीं है। पूर्व में मिला था तो वह छह साल पहले खो गया और अब दोबारा बन नहीं पा रहा है। कई बार प्रयास किया लेकिन, सफलता नहीं मिली। श्यामो ने बताया कि सरकारी मदद के तौर पर उन्हें केवल पेंशन मिल रही है। इसके अलावा दवा में कोई छूट या अन्य सरकारी सुविधाओं का लाभ उन्हें नहीं मिलता है।
इकलौती संतान रेखा के पास जीवन काट रहीं श्यामो
मुरादाबाद। श्यामो देवी काफी बुजुर्ग हैं, बीमार रहती हैं। 10 साल से वह साईंपुरा कांशीराम कॉलोनी में दामाद संजीव शर्मा के पास ही रहती हैं। श्यामो मूल रूप से हसनपुर गजरौला के मुहल्ला होली चौक की रहने वाली हैं। रेखा शर्मा के दो बेटे हिमांशु व रणवीर शर्मा और दो बेटियां साक्षी व पूजा हैं। दोनों बेटियां विवाहित हैं। पूर्व में श्यामाे देवी के नाम कटघर वार्ड की सस्ते गल्ले की दुकान थी। रेती मुहल्ले में सस्ते गल्ले की दुकान श्यामो के दामाद संजीव शर्मा के नाम थी। वर्तमान में ये इन दोनों ने घाटे के कारण दुकान को छोड़ दिया था। अब दामाद संजीव शर्मा घर पर ही रहते हैं, उनके बच्चे भी अब कमाने लगे हैं। श्यामो देवी को 15,000 रुपये पेंशन मिलती है।
ये भी पढ़ें : मुरादाबाद : दरोगा ने बोलकर लिखवाई तहरीर, कब्जेदार लूट ले गए नकदी-जेवर
