Kannauj News : बालिका की दुष्कर्म के बाद हत्या, अंतिम सांस तक जेल में रहेगा आरोपी, मां-पिता भरेंगे जुर्माना
कन्नौज में बालिका की दुष्कर्म के बाद हत्या में अंतिम सांस तक जेल।
कन्नौज में बालिका की दुष्कर्म के बाद हत्या में अंतिम सांस तक आरोपी जेल में रहेगा। अर्थदंड की पूरी रकम माता-पिता को देने के आदेश है।
कन्नौज, अमृत विचार। अमृत विचार। टॉफी दिलाने के बहाने दस साल की बच्ची को अगवा कर दुष्कर्म और हत्या करने वाले युवक को विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) ने अंतिम सांस तक जेल में रहने की सजा सुनाई है। कोर्ट ने उस पर 2.20 लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। पूरी रकम क्षतिपूर्ति के रूप में बालिका के माता-पिता को दी जाएगी। घटना के साल भर बाद ही अपराधी को कठोर सजा मिलने पर माता-पिता की आंखों में आंसू छलक आए।
विशेष शासकीय अधिवक्ता किशोर दोहरे तथा शासकीय अधिवक्ता नवीन कुमार दुबे ने बताया कि गुरसहायगंज कोतवाली क्षेत्र के ग्राम मोहनपुर रतनपुर में 20 जनवरी 2022 को एक दस साल की बच्ची का अपहरण हो गया था। बाद में गांव से छह किलोमीटर दूर खेत में बच्ची की लाश मिली थी। पुलिस ने इस मामले में गांव के ही रामू यादव पुत्र परमेश्वरी दयाल को पकड़ा। उसने गुनाह कुबूल किया और बताया कि टॉफी दिलाने के बहाने वह बच्ची को खेत पर ले गया और दुष्कर्म किया।
इसके बाद उसकी गला दबाकर हत्या कर दी तथा शव को बोरे में भरकर साइकिल के कैरियर पर लादा। बाद में छह किमी दूर चियासर घाट के पास एक खेत में छिपा दिया था। उसके कपड़े लाकर गांव के बाहर एक कुएं में डाल दिए थे।
तत्कालीन एसओजी प्रभारी विक्रम सिंह ने रास्ते में लगे एक सीसीटीवी कैमरे की मदद से रामू यादव की पहचान की और उसे पकड़ लिया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दुष्कर्म की पुष्टि हुई थी। जिस समय बच्ची का अपहरण किया, उस समय उसके माता-पिता घर पर नहीं थे। पुलिस ने मामले की विवेचना करते हुए रामू के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया।
शुक्रवार को विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) गीता सिंह ने रामू यादव को दोष सिद्ध करते हुए हत्या व पॉक्सो एक्ट में कठोर आजीवन कारावास (अंतिम सांस तक जेल) व दो लाख रुपये जुर्माना, अपहरण में सात वर्ष का कठोर कारावास तथा दस हजार रुपये जुर्माना व साक्ष्य मिटाने के अपराध में भी सात साल कठोर कारावास व दस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। कोर्ट ने अर्थदंड की पूरी रकम बालिका के माता-पिता को देने के आदेश दिए हैं।
पार्थिव शरीर ही आएगा जेल से बाहर
विशेष शासकीय अधिवक्ता किशोर दोहरे ने बताया कि रामू यादव ने जघन्य अपराध किया था, जिसके लिए कोर्ट से मृत्युदंड की मांग की गई थी। उसके ऊपर पहले से कोई आपराधिक मुकदमे नहीं थे, इस वजह से उसे अंतिम सांस तक जेल में रहने की सजा सुनाई गई अर्थात उसका पूरा जीवन जेल की सलाखों के पीछे ही बीतेगा और पार्थिव शरीर ही जेल से बाहर आएगा। उन्होंने बताया कि सजा सुनाए जाने के वक्त अपराधी के चेहरे पर कोई सिकन नहीं थी और वह चुपचाप कठघरे में खड़ा रहा। सजा सुनाने के बाद उसे न्यायिक अभिरक्षा में जिला कारागार अनौगी भेज दिया गया।
