बरेली: 'जरा सी रोशनी की चाहत में पूरी जवानी कट जाती है अंधेरे में', लंबी कैद ने बदला बबलू का नजरिया

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Edited By Amrit Vichar
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लंबी कैद ने बदला बबलू का नजरिया, कहा- लोगों का झुककर सलाम करना बनाता है और बड़ा अपराधी

बरेली, अमृत विचार। करीब 25 साल जेल की सलाखों के पीछे गुजारने के बाद माफिया डॉन बबलू श्रीवास्तव का जिंदगी के प्रति नजरिया बदल गया है। लंबी कैद ने उसे एहसास कराया है कि जरा सी रोशनी की चाहत युवाओं को अपराध के ऐसे दलदल में फंसा देती है कि उनकी पूरी जवानी जेल के अंधेरों में कट जाती है। अपराध चाहे छोटा हो या बड़ा, एक बार फंसने के बाद निकलना मुश्किल होता है।

बबलू श्रीवास्तव के लहजे और बातचीत में अब माफिया डॉन होने जैसा कुछ नहीं झलकता। शुक्रवार को अमृत विचार संवाददाता से लंबी बातचीत में बबलू ने बताया कि अपराध की दुनिया में कदम रखने के बाद लोगों का झुककर सलाम करना ही एक बड़ा अपराधी बनने की शुरुआत होती है। अपराध की दुनिया ऐसा दलदल है जिसमें फंसने के बाद बाहर निकलना आसान नहीं है। दो ही रास्ते बचते हैं, एक पुलिस या किसी दूसरे अपराधी के हाथों मारा जाना या फिर पूरी जवानी काल कोठरी में गुजर जाना। उनके साथ भी ऐसा ही हुआ। कई अपराध मजबूरी में हुए मगर किस्मत ने उनकी आधी उम्र को जेल में बर्बाद होने का लेख लिख दिया।बबलू ने बताया कि हाल के कई सालों का इस्तेमाल उन्होंने खुद को पूरी तरह बदलने में किया है। अब वह अपराध से मुक्त शराफत की जिंदगी जीना चाहते हैं।

जल्द प्रकाशित होगी तीसरी किताब ''क्रिमिनल''
बबलू श्रीवास्तव ने एक और किताब जेल में ही लिखी है। बबलू ने बताया कि ''क्रिमिनल'' शीर्षक से यह किताब जल्द ही प्रकाशित होगी। इससे पहले बबलू श्रीवास्तव ने 2004 में ‘अधूरा ख्वाब’ और 2018 में ‘बढ़ते कदम’ लिखी थी जो प्रकाशित हो चुकी हैं। बबलू ने बताया कि जेल में वह हर दिन कम से कम दो घंटे लिखते हैं। उनकी तीसरी किताब भी पूरी होने में काफी समय लग गया।

छात्र राजनीति ने पहुंचा दिया अपराध की दुनिया में
बबलू श्रीवास्तव ने लखनऊ यूनिवर्सिटी से लॉ की पढ़ाई की है। 1982 के छात्रसंघ चुनाव ने उनकी जिंदगी को बदल दिया। वह अपने दोस्त नीरज जैन काे महामंत्री पद का चुनाव लड़ा रहा था। चुनाव प्रचार के दौरान दो गुट भिड़े और चाकूबाजी हुई। माफिया अन्ना शुक्ला का समर्थक छात्र घायल हुआ। अन्ना ने बबलू पर केस दर्ज कराकर उसे जेल भिजवा दिया। इसके बाद बबलू ने अपराध जगत में कदम रखा और कुछ सालों बाद उसकी पहचान माफिया डॉन के रूप में होने लगी।

मुंबई बम ब्लास्ट के बाद बिगड़े दाऊद से संबंध
बबलू ने पैसा कमाने के लिए अपहरण के साथ कई बड़ी आपराधिक घटनाओं को अंजाम दिया। यूपी के साथ बिहार, मध्यप्रदेश में भी कई अपहरण किए। इन घटनाओं से नेताओं की भी नजर उस पर पड़ी और पुलिस की भी। मुकदमे दर्ज होते रहे। 1989 में वह पुलिस से बचने के लिए नेपाल भाग गया जहां उसकी मुलाकात नेपाल के माफिया डॉन नेता मिर्जा दिलशाद बेग से हुई। बेग ने उसे दाउद इब्राहिम से मिलवाया। इसके बाद वह अंडरवर्ल्ड के लिए काम करने लगा। बबलू का कहना है कि 1993 में मुंबई में बम ब्लास्ट पर उसने विरोध जताया तो दाऊद से उसके संबंध बिगड़ गए।

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