जर्जर भवनों के संरचनात्मक सुरक्षा की जांच करेगा Kanpur IIT, Nagar Nigam चिह्नित कर गिराने में करेगा मदद
कानपुर आईआईटी जर्जर भवनों के संरचनात्मक सुरक्षा की जांच करेगा।
कानपुर आईआईटी जर्जर भवनों के संरचनात्मक सुरक्षा की जांच करेगा। नगर निगम द्वारा स्थलीय निरीक्षण के बाद चिह्नित भवनों को गिराने में मदद करेगा।
कानपुर, [अभिषेक वर्मा]। शहर में जर्जर और गिराऊ हो चुके भवनों की संरचनात्मक सुरक्षा (स्ट्रक्चरल सेफ्टी) की जांच अब आईआईटी करेगा। नगर निगम ने स्थलीय निरीक्षण के बाद ऐसे चिह्नित भवनों को गिराने के लिए संस्थान से सहयोग मांगा है। हालांकि, भवनों को गिराने की जांच का खर्च भवन स्वामियों को खुद ही वहन करना होगा। नगर निगम अधिकारियों ने इसको लेकर कार्य योजना तैयार की है।
नगर निगम मुख्य अभियंता मनीष अवस्थी ने आईआईटी के सिविल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट को जर्जर भवनों की स्ट्रक्चरल सेफ्टी की रिपोर्ट को लेकर पत्र लिखा है। उन्होंने बताया कि शहर में जर्जर भवनों को गिराने के लिए लगातार पत्र नगर निगम में आ रहे हैं।
जिसके आधार पर नगर निगम अधिकारियों ने एक-एक भवनों का स्थलीय निरीक्षण करना शुरू किया है। ऐसे भवन जो वाकई में रहने लायक नहीं बचे हैं और उन्हें गिराया जाना ही उचित है, इसके लिए आईआईटी द्वारा संरचनात्मक सुरक्षा की रिपोर्ट मांगी जा रही है। ताकि, भवन को बिना किसी जनहानि के गिरवाया जा सके।
नयागंज, परमट समेत कई क्षेत्रों में निरीक्षण
शहर में कई क्षेत्रों में ऐसे मकान हैं, जों पूरी तरह से जर्जर हैं। इनको गिराने के लिए जो पत्र नगर निगम पहुंचे हैं उनमें से नगर निगम अधिकारियों ने पिछले सप्ताह नयांगज, परमट में निरीक्षण किया है। नयादाल मंडी नयागंज में भवन संख्या 50/40 का भी निरीक्षण किया गया। अधिकारियों ने पाया कि यह मकान पूरी तरह से गिराऊ हो चुका है। जो अपनी आयु पूरी कर चुका है। जिसे गिराया जाना आवश्यक है।
वहीं, परमट, जूही, कर्नलगंज में भी जोनल अधिकारियों ने खस्ताहाल हो चुके भवनों का सथलीय निरीक्षण किया। जिसके बाद विभागीय अधिकारियों ने आईआईटी से इसको गिराए जाने से पहले संरचनात्मक सुरक्षा की रिपोर्ट मांगी है।
430 जर्जर और गिराऊ मकान
नगर निगम के अनुसार शहर में 430 जर्जर और गिराऊ मकान हैं, इस बार बरसात में भी कई नए ऐसे मकानों की सूचना नगर निगम पहुंची हैं, जो जर्जर हो चुके हैं, और कभी भी गिर सकते हैं। सबसे ज्यादा जर्जर मकान जोन 1 में हैं। जिनकी संख्या 222 है। कई मकानों को खाली करने का नोटिस दिया जा चुका है। लेकिन फिर भी यहां लोग रह रहे हैं। कई जगहों पर तो जर्जर भवनों में ही फैक्ट्री, गोदाम व बड़ी-बड़ी दुकानें तक चल रही हैं। बरसात आते और मौसम में नमी बढ़ते ही मकानों के गिरने का खतरा मंडराने लगता है।
पैसे देने की बात हट जाते हैं पीछे
जर्जर मकानों के गिराने के लिए अभी तक नगर निगम में 50 से ज्यादा प्रार्थना पत्र पहुंचे हैं। जिसमें लोगों ने अपने जर्जर मकान गिराने की दरख्वास्त की है। क्योंकि, नगर निगम भवनों को गिराने और जांच का खर्च मकान मालिक से लेता है। इसलिए यह बात सुनते ही निवासी पीछे हट जाते हैं। वहीं, कोर्ट में केस चलने की वजह से भी गिराने की कार्रवाई नहीं हो पाती है।
यहां पर सबसे ज्यादा गिराऊ मकान
लक्ष्मीपुरवा, लाठीमोहाल, सिरकीमोहाल, नौघड़ा, बांसमंडी, जवाहर नगर, नेहरू नगर, चंद्र नगर, पी रोड, अनवरगंज, बेकनगंज, बंदरिया हाता, लाटूश रोड, चमनगंज, फहीमाबाद, कछियाना, चटाई मोहाल, नयागंज, मनीराम बगिया, टोपी बाजार, मछलीबाजार, हरबंशमोहाल, जूही नहरिया क्षेत्र आदि।
क्या है स्ट्रक्चरल सेफ्टी
स्ट्रक्चरल सेफ्टी में जानकार किसी भी भवन के इंजीनियरिंग पहलू को सत्यापित करते हैं, जिसमें डिज़ाइन, स्थान और भूकंपीय अनुपालन शामिल हैं। इसके अलावा, वे नागरिक निकायों को रिपोर्ट सौंपने से पहले अग्नि सुरक्षा, सार्वजनिक सुरक्षा और स्वास्थ्य सुरक्षा अनुपालन की भी जांच, मिट्टी परीक्षण करते हैं, और नगर निगम को रिपोर्ट देते हैं।
जोन जर्जर मकान
जोन-1 222
जोन-2 06
जोन-3 42
जोन-4 120
जोन-5 18
जोन-6 22
कुल 430
शहर में जो मकान जर्जर हैं। उनका स्थलीय निरीक्षण किया जा रहा है। जो भवन गिराने लायक हैं, उनकी स्ट्रक्चरल सेफ्टी की रिपोर्ट के लिए आईआईटी से सहयोग मांगा गया है।- मनीष अवस्थी, मुख्य अभियंता
