बरेली: भूसंपत्तियों का दान... अपनों में वसीयत और बंटवारे के विवाद का झंझट ही खत्म

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अनुपम सिंह, बरेली, अमृत विचार। भूसंपत्तियों की दान की श्रेणी में रजिस्ट्री (दान विलेख) करने की सुविधा बंटवारे के विवादों का ही नहीं वसीयत का भी ठोस विकल्प बनकर उभरने लगी है। हर रजिस्ट्री ऑफिस में रोज औसतन आठ से दस रजिस्ट्री इसी श्रेणी में की जा रही हैं। जिले भर में यह औसत रोज 70 से ज्यादा रजिस्ट्रियों का है। सिर्फ 14 दिन में जिले में करीब नौ सौ रजिस्ट्री हुई हैं। नाममात्र का स्टांप शुल्क होने के कारण दान विलेख की शुरुआत के बाद वसीयत रजिस्टर्ड कराने वालों की संख्या घटकर आधी रह गई है।

प्रदेश कैबिनेट की बैठक में तीन अगस्त को ही स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग की ओर से रक्त संबंधों में स्टांप ड्यूटी से भारी छूट देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी। इसके बाद से जीवित रहते रक्त संबंधियों को जमीन और भवन दान करने वालों में होड़ सी शुरू हो गई है। जिले मुख्यालय पर दो और तहसीलों में पांच निबंधन कार्यालय हैं। इनमें मौजूदा औसत हर रोज 70 से ज्यादा रजिस्ट्रियों का है। रजिस्ट्री विभाग के अफसरों का अनुमान है कि कई तरह के विवादों से मुक्ति मिलने की वजह से दान विलेख कराने वालों की संख्या आने वाले समय में और तेजी से बढ़ेगी।

दरअसल, रक्तसंबंधों में दान श्रेणी की रजिस्ट्री बंटवारा समझौता और वसीयत का सशक्त विकल्प बनकर उभरी है। एक तो दान विलेख पर सिर्फ पांच हजार रुपये का स्टांप शुल्क निर्धारित है, दूसरे वसीयत और बंटवारे समझौते की तरह इसे चुनौती देना आसान नहीं है। वसीयत के मामले में संपत्ति पर अधिकार भी मृत्यु के बाद मिलता है। दान विलेख की अनुमति सरकार ने पहले 2022 में जून से दिसंबर तक के लिए दी थी। कैबिनेट में प्रस्ताव पास होने के बाद अग्रिम आदेश तक छूट दी गई है। इसमें संपत्ति के विक्रय विलेख की रजिस्ट्री की तरह जमीनों के मूल्य के सात प्रतिशत तक की स्टांप ड्यूटी नहीं देनी होगी। हालांकि संपत्ति की कीमत का एक प्रतिशत निबंधन शुल्क देना होगा।

40 फीसदी दान बेटों को, बाकी रजिस्ट्री बहन-बेटी, भाई-मां, पति-पत्नी के नाम
जिला मुख्यालय पर निबंधन कार्यालय प्रथम में अब 23 लोगों ने जमीनें दान की हैं। इनमें सर्वाधिक 10 लोग अपने बेटे को जमीन दान करने वाले हैं। तीन ने भाई, एक महिला ने अपने पति, चार ने अपनी पत्नी, दो ने बेटी और एक ने अपनी मां के नाम जमीन दान की है। इसके अलावा एक ने अपनी नातिन और एक ने बहन को जमीन दान की है। इसी से मिलते-जुलते आंकड़े जिले के दूसरे रजिस्ट्री दफ्तरों के भी बताए जा रहे हैं। ज्यादातर लोगों ने बेटे और पत्नी और भाइयों को जमीन दान कर रजिस्ट्री कराई है।

दान विलेख के दायरे में ये रक्त संबंध
दान विलेख के दायरे में बेटा-बेटी, माता-पिता, पति-पत्नी, सगे भाई-बहन, पुत्रवधु, बेटे-बेटी की संतान, दामाद को रखा गया है। सगे भाई की मौत के बाद उसकी पत्नी भी इसमें शामिल मानी जाएगी।

पहले होती थीं औसतन 30 वसीयत मगर अब 15
दान विलेख के तहत जमीन दान करने में स्टांप छूट मिलने से वसीयत के मामलों में कमी आई है। उप रजिस्ट्रार प्रथम रवि वर्मा के अनुसार, इसमें 50 फीसदी कमी हुई है। एक निबंधन कार्यालय में रोजाना 4 से 5 वसीयतें होती थी। इस तरह से औसतन प्रतिदिन जिले में 30 वसीयत होती थी, लेकिन अब इसका ग्राफ 15 पर ही आकर रह गया है।

दान विलेख के तहत हर एक निबंधन कार्यालय में रोज औसतन आठ से 10 रजिस्ट्रियां हो रही हैं। उम्मीद है कि स्टांप शुल्क में भारी छूट मिलने की वजह से आगे दान विलेख करने वालों संख्या और बढ़ेगी। पारिवारिक विवाद भी खत्म होंगे। - रामेंद्र श्रीवास्तव, उप रजिस्ट्रार द्वितीय

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